पीएम मोदी का कार्यक्रम शिवसागर जिले में जेरेंगा पठार में कराया जा रहा है. इसके पीछे भी BJP की रणनीति बताई जाती है. जेरेंगा पठार का संबंध असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य से है और यहां बड़ी आबादी अधिकतर आदिवासी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और चाय बागान से जुड़े श्रमिक हैं. अवैध अप्रवासी के चलते यहां की जनजातीय के लोग परेशान थे. राज्य सरकार नई भूमि नीति के तहत जनजातीय मूल के लोगों को जमीन उपलब्ध करा रही है और उनका भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है.
असम का शिवसागर, जहां PM मोदा का कार्यक्रम होना है. (फोटो- PTI)जाति, माटी, भेती असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का कहना है कि BJP सरकार ये सब ‘जाति, माटी और भीती’ की रक्षा के लिए कर रही है. जाति से यहां मतलब है असम के ट्राइबल्स से, पिछड़ी जातियों से. माटी से मतलब है उनकी ज़मीनों से. और भीती का मतलब है मूल. यानी इन्हें असम के मूल नागरिक कहकर संबोधित किया जा रहा है. क्यों अहम है असम? 2016 के विधानसभा चुनाव में BJP ने 126 सीटों में से 60 पर जीत हासिल की थी. अपने सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ मिलकर ये संख्या 86 सीटों तक पहुंचाई. इस तरह असम में पहली बार BJP की सरकार बनी. ये पूर्वोत्तर की राजनीति में पैंठ बनाने के लिहाज से काफी अहम साबित हुआ. अब BJP दोबारा और बड़ी जीत हासिल कर असम को अपना गढ़ भी बनाना चाहेगी.





















