इंडियन रेल कहने को खुशखबरी दे रहा है. IRCTC टिरेन में 25 तरह की चाय पिलाएगा. वो भी ऑनलाइन. नादान पसेंजर खुशी से नाच सकते हैं. लेकिन लल्लन दुख से दोहरा हो रहा है ये खुशखबरी सुन कर. वजह जानोगे तो रो पड़ोगे. लल्लन कांपते हाथों से ये खत लिख रहा है IRCTC को.
डियर IRCTC कुछ भी करके यह चाय पर खर्चा और चर्चा रोक लो. हम आपके बहुत बहुत आभारी रहेंगे. ये फैसला भारी पड़ेगा आपके यात्रियों पर. आप नहीं जानते कितने जतन करते हैं हम खुद को ट्रेन में मिलने वाली चाय से बचाने के लिए. इसका दर्द वही समझ सकता है जो ट्रेन में 500 किलोमीटर सफर करके अपने घर जिंदा पहुंच गया हो. हम पहुंचे हैं, उस हृदय विदारक जर्नी का हाल सुनाने के लिए. ट्रेन में अंदर पहले अपने पैर फेंके हमने. उसके बाद अपनी सीट पर पहुंचने तक हमला हुआच्वाय च्वाय च्वायवाले का. जितनी देर में हम अपनी सीट पर धंसे, कोई 15 चाय वाले बोगी पास कर गए. हांफते हुए एक चाय का ऑर्डर पेला. चाय वाला चाय दिहिस. इत्ती देर में हम अपनी सीट अंगोछे से पोंछ चुके थे. जितना हिस्सा पैंट का पेंदा नहीं पोंछ पाया था. पैसा पूछा कि "कित्ते हुए दद्दा". बोला "दस रुपिया, स्पेसल है." नई कड़क नोट उसके मुंह के सामने लहराई हमने. उसने पैसा दांत से पकड़ा और आगे बढ़ गया.
चाय का पहला घूंट अंदर किए हम. पुरखे पानी पा गए. आंखों के आगे अंधेरा छा गया. चाय वाला 10 रुपए की चोट तो लगाइस ही था. एक रोग और लगा दिहिस था. चाय से मोह भंग हो गया था. हम कसम खा लिए कि जिस दिन डॉक्टर लिख के देगा कि चचा चाय के कैप्सूल लेना शुरू कर दो. वरना बचना मुश्किल है. अपन तब्भी चाय मुंह से लगाएंगे. साली इतनी गंदी चाय कि जिंदगी से भरोसा उठ जाए. तुम 25 तरह की चाय पिलाओगे. मतलब गंधैली चाय में भी पच्चिस ठो वैरायटी. रुलाओगे क्या भाई.
और ये खाना-नाश्ता बेचने वालों को क्या खिलाते हो यार. इनकी एनर्जी कभी खत्म होती है कि नहीं. रात होते ही आंख लगे बस इनका रेंकना चालू. खाना ले लो खाना बोलो. स्याले खाना बोलने की क्या जरूरत जब हम खाना पेल के खा चुके. अब सोने तो दे चैन से. सुबह कौवा छिच्छी पर नहीं बैठता कि ये नारद मुनि परगट. खाना बोलो भाई खाना. मन करता है कह दें भाई थोड़ी सल्फास मिला कर दे दे. तन्ने भी चैन मिल जाएगा बोगी में एक चटंत कम हुआ और हमको भी सद्गति हासिल हो जाएगी. और इतने मनुहार से खिलाने आते हैं कि हमारे बाप ने न पूछा कभी. खाना बड़ा जबर होता है लेकिन. चंद पोलियो की मारी पूड़ियां, पानी और मसाले वाली सब्जी. कभी कभी अंडा बिरयानी वाले पूंछ पकड़ कर लटक लेते हैं. जब तक तुम अपनी जेब की गर्मी उनके हवाले न कर दो वो किसी तरह हटने के नहीं. इनको ये चिंता खाए रहती है कि सवारी हमारी ट्रेन से उतरेगी. स्टेशन पर इसके घर वाले रिसीव करने बैठे होंगे. इस सवारी की दुबली शकल देख कर हमको ताना देंगे कि ठीक से खिलाया पिलाया नहीं. बस इसी चिंता में वो हमें जड़ीला खाना पेश किए रहते हैं. हम पशोपेश में जमे रहते हैं. तो प्रिय IRCTC आपसे कोहनी तक हाथ जोड़ निवेदन है. हम भूखे मर जाएं वो मंजूर है. लेकिन आपको कसम है आपके ब्रह्मास्त्र टिकट बुकिंग कैप्चा की. इन चाय और अंडा बिरयानी वालों को हमसे दूर रखना. इनकी आवाजें हमारी जर्नी खत्म होने के साथ खत्म नहीं होती. महीनों बाद तक बिछखोपड़ा के जहर की तरह उल्टंगा किए रहती हैं. प्लीज बचा लो हमें.