The Lallantop

सरकार बीड़ी पर रहम क्यों?

कैंसर से सड़े हुए गले और गले हुए गाल लेकर हर साल कित्ते निपट जाते हैं. जरूरत है कि टुबैको प्रॉडक्ट्स को आम आदमी की औकात से बाहर कर दिया जाए.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
नशेड़ियों के लिए बहुत फायदे का है ये बजट. हर टुबैको प्रोडक्ट महंगा होगा. उस पर टैक्स बढ़ रहा है. दांत और होंठों के बीच में ठीक मसूढ़ों के पास सुरक्षित बंकर में खैनी इंस्टाल कीजिए. फिर बात करिए. बातों में वजन आता है. स्टाइल में कूलता आती है. सिगरेट फूंकते हुए नीचे वाले होठ को थोड़ा आगे ले जाकर धुंआ ऐसे छोड़िए कि वो सिर पर बालों के पास बादल सा बन जाए. सामने वाला किलस कर रह जाएगी आपकी पर्सनेलिटी से. और इन प्रोडक्ट्स में अब और जान आ जाएगी. क्योंकि महंगा हो रहा है न. लेकिन सरकार ने गरीबों के साथ खिलवाड़ किया है. उनकी भावना को ठेस पहुंचाई है. आखिर क्यों छीन लिया मौका उनसे भौकाली बनने का? क्यों बीड़ी महंगी नहीं की. सरकार कह सकती है कि हमने ये तुम्हारे भले के लिए किया. बीड़ी ज्यादा खतरनाक होती है सिगरेट से. इसलिए सस्ती है. इसे पीकर जल्दी इस असार संसार से कूच करोगे. क्या रखा है इस फालतू दुनिया में. बस बदनामियां, नाकामियां और बकैतियां. यहां से कट लो यही बेहतर है. कोई लल्लन से पूछे कोई पूछे इसकी दरकार नहीं. लल्लन पब्लिक के मतलब की सलाहें फ्री में दागता है. सरकार से दरख्वास्त है कि हर टुबैको प्रोडक्ट की कीमत खूब बढ़ा दे. बीड़ी की भी. उसको वीवीआईपी बनाने की जरूरत नहीं है. कुछ ऐसी रेट लिस्ट बने. बीड़ी का सड़िल्ला सा बंडल 60 रुपए. लोंदू सिगरेट का एक कश 35 से 40 रुपए का. एक सिगरेट सैकड़ा पार. पूरी डिब्बी खरीदने वाले को पैनकार्ड दिखाने के बाद. दारू की एक बोतल के लिए किसी केंद्र सरकार के राजपत्रित अधिकारी से लिखवा कर लाने का प्रावधान बने. पान की दुकान पर एक रजिस्टर विद स्टांप पेपर रखा रहे. डेढ़ सौ रुपए का रजनीगंधा का छोटा सा पाउच खरीदने से पहले डेथ वारंट साइन करना रहे. विमल पान अपने 25 साल पूरे होने का ऐड भरे रहती दुनिया तक दिखाएं. लेकिन उसका पान मसाला आसानी से दुनिया को न मिले. इत्ती तगड़ी बॉर्डर लगा दो सरकार कि नशेड़ियों की तिली लिली धुप बोल जाए. मुकेश हराने हर पिच्चर से पहले समझा समझा कर पंचर हो गया. कितने लोग हर साल कैंसर से सड़े हुए गले और गले हुए गाल लेकर दुनिया से विदा हो जाते हैं. तलब कंट्रोल नहीं कर पाते. करें भी क्यों? जब इत्ता सस्ता जहर आसानी से उपलब्ध हो. अर्तन बर्तन, कपड़े लत्ते और बीवी के गहने बेच कर पी जाते हैं लोग. उनको रोकने का जुगाड़ यही है. फुल्ल कारगर भले न हो. लेकिन नए उगते नशेड़ियों को रोकने में कामयाब होगा. फिर जिसे अपनी जिंदगी की फाइल बंद ही करानी है वो किसी भी रास्ते करा लेगा. शायर निदा फाजली बड़ी मारके की बात कहे हैं कि: "जो आता है वो जाता है ये दुनिया आनी जानी है यहां हर शय मुसाफिर है सफर में जिंदगानी है" आप फिकर न करो.  टुबैको प्रॉडक्ट्स को उस आम आदमी की औकात से बाहर कर दो जो इनसे होने वाली बीमारियों का इलाज नहीं करा सकता. और जो ढेर सारा पैसा आए उससे फिर वही हॉस्पिटल बनवाओ जो इन बीमारियों का इलाज कर सकें. अमा दर्द आप दे रहे हैं तो दवा कौन देगा. बस इत्ता काम कर दो. लल्लन आपकी बलाएं लेगा.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement