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क्या डॉक्टर ने ही कर दीं 3 हत्याएं या फिर इस धनी लड़की ने?

बुक रिव्यू: Charlatans by Robin Cook

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रॉबिन कुक ने ब्रेन, फीवर, म्यूटेशन, टॉक्सिन समेत तमाम किताबें लिखी हैं.
रेलवे स्टेशन पर सिडनी शेल्डन, सुरेंद्र मोहन पाठक, अगाथा क्रिस्टी की किताबें खूब मिलती हैं. बाकी दुकानों पर भी किसी और की मिले न मिले इनकी जरूर रहेगी. ढेर सारी. ऐसा लगता है कि ये लोग जूस निकालने वाली मशीन ले के बैठते थे और जूस गारने की तरह ही किताबें गार के निकाल देते थे. हालांकि इन चीजों पर विद्वानों में बड़ा मतभेद रहता है. कई लोग कह देते हैं कि लेखन गंभीर काम है. ऐसे रोज़-रोज़ किताब निकालने से थोड़ी न हो जाता है. पर ज़माना बदल रहा है. सलमान रुश्दी भी अब उसी राह पर हैं. उतनी तो नहीं, पर काफी किताबें लिख रहे हैं. पढ़ने वालों को कोई मतलब नहीं रहता कि कौन कितना लिख रहा है. उनके लिए तो अच्छा वही है जो रोज नया-नया लिख के ला दे.
ऐसे ही एक लेखक हैं रॉबिन कुक. अमेरिका के हैं. इनकी ही किताब आई है : 'Charlatans'. मेडिकल थ्रिलर है. इनकी विशेषता ही है कि इनकी सारी किताबें हॉस्पिटल, डॉक्टर, नर्स को लेकर बनी कहानियों पर होती हैं. मतलब ऐसे तो भरोसा नहीं होता कि कोई डॉक्टर कत्ल भी करता होगा. उनका काम नहीं है कत्ल करना. पर रॉबिन की दुनिया में डॉक्टर ही बुरे जीव निकलते हैं ज्यादातर.

रॉबिन की 'कोमा' खूब पढ़ी गई.
रॉबिन की 'कोमा' खूब पढ़ी गई.

टेक्नोलॉजी के साथ बदलते गए

1970 में इन्होंने अपनी पहली किताब लिखी थी. द इयर ऑफ इंटर्न. चली नहीं. 1975 में दूसरी आई. कोमा. दबा के चली. इसके बाद इन्होंने स्फिंक्स, ब्रेन, फीवर, म्यूटेशन, टॉक्सिन समेत तमाम किताबें लिख डालीं. नाम भी मेडिकल वाले ही रखे. सबसे खास बात रही कि पहली किताब में आला और सीरींज की बात हुई थी पर जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ी, रॉबिन ने भी बहुत बदलाव किया. स्टेम सेल तक को मिलाकर किताब लिख डाली.
 

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सोशल मीडिया की बातें

तो नई किताब शार्लटन्स बाकी किताबों से अलग है. इसमें एक ऐसी महिला किरदार है जो सोशल मीडिया पर बहुत लगी रहती है. रॉबिन एकदम अपडेट हैं. आज के माहौल को ध्यान में रखकर ये किरदार गढ़ लिया. मुख्य पात्र हैं डॉक्टर नोआ. उनकी मौजूदगी में हॉस्पिटल के सबसे पॉपुलर व्यक्ति की हर्निया के एक छोटे ऑपरेशन में मौत हो जाती है. मातम मना लिया जाता है. पर धीरे-धीरे पता चलता है कि ये मौत नहीं थी. ऐसे ही दो और मौतें होती हैं. इनमें विदेशी हाथ नहीं रहता है, बल्कि लगता है कि हॉस्पिटल के ही किसी व्यक्ति का हाथ है. नोआ इसी की पड़ताल करते हैं.
किताब की खूबसूरती ये है कि मेडिकल की चीजें बहुत प्रेम से बताई गई हैं. आप को हॉस्पिटल की फील आती रहेगी. कुछ ऐसे शब्द जरूर हैं जिनके लिए आपको डिक्शनरी की मदद लेनी पड़ेगी. क्योंकि ये मेडिकल फील्ड से जुड़े शब्द हैं.

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कहानी कुछ यूं बढ़ती है

तो हॉस्पिटल के सुपर चीफ नोआ को ये नहीं पता था कि नौकरी के पहले दिन ही ये ड्रामा शुरू हो जाएगा. तीन कत्ल होते हैं. हत्यारे का पता नहीं चलता. इसी बीच एनेस्थेसियोलॉजिस्ट एवा लंडन से इश्क़ भी हो जाता है. एनेस्थेसिया की ही वजह से मौतें होती हैं. तो शक एवा पर भी जा रहा था. वहीं हॉस्पिटल के स्टार डॉक्टर विलियम मैसन भी समस्या खड़ी करते रहते हैं. वो अपने आगे किसी को कुछ समझते ही नहीं. इसी में चक्कर और बढ़ता जा रहा है. मामला संगीन तब हो जाता है जब पता चलता है कि लंडन का बहुत बड़ा घर है. इसके लिए वो कई तरीकों से पैसे कमाती है. सोशल मीडिया पर उसके कई अवतार हैं. उसकी पर्सनैलिटी वो नहीं है, जो दिखती है. प्यार इसको और पेच में डाल देता है.
सबसे अच्छी बात है कि रॉबिन ने सस्पेंस बना के रखा है. पकड़ में नहीं आता है. जिन लोगों ने इनकी सारी किताबें पढ़ी होंगी उनको भी तकलीफ़ होगी गेस करने में. हालांकि कुछ लोग कर ही लेते हैं. इस किताब की एन्डिंग वैसी नहीं है जैसी इनकी बाकी किताबों की होती है. ये जानकारी उनकी किताबों के फैन से मिली. क्योंकि मैंने इनकी सारी किताबें पढ़ी नहीं है.

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रॉबिन की किताबों पर बनी हैं फिल्में


रॉबिन कुक की कई किताबों पर टीवी फिल्में बन चुकी हैं. जैसे कि कोमा, स्फिंक्स, मॉर्टल फियर, आउटब्रेक, इन्वेजन. इनकी किताबें पढ़ के लगेगा कि हमारे यहां ऐसे हॉस्पिटल क्यों नहीं हैं. हमारे यहां तो ऑक्सीजन की कमी से बच्चे मर जा रहे हैं. क्या रॉबिन इन पर भी किताब लिखेंगे? तब शायद असली अपराधी पकड़ में आए.
बुक का नाम: Charlatans  
लेखक:  Robin Cook
प्रकाशन: पेंगुइन 
कीमत: करीब 1124 रुपए (पेपरबैक)

बुक का रिव्यू 'दी लल्लनटॉप' के लिए ऋषभ ने किया है.

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