नाम एनडी तिवारी. पूरा नाम नारायण दत्त तिवारी. प्यार का नाम DNA तिवारी. उम्र 91 साल. अगर युवा हो और ये खबर पढ़ रहे हो तो मुंह पर पानी के छींटे मार लो. क्योंकि आगे जो पढ़ोगे न, शर्म से अपना माथा पीट लोगे. क्योंकि जब तक तुम इसे पढ़ोगे, ये 91 साल का आदमी कितनी डील साइन कर चुका होगा. आज सुबह उठकर तुम मूतने गए. मंजन किया. बाथरूम से लौटकर चाय हाथ में ली. टीवी ऑन करके न्यूज चैनल लगाया. पता चला कि एनडी तिवारी ने 53 साल कांग्रेस की सेवा करने के बाद आज बीजेपी जॉइन कर ली. उनका हृदय परिवर्तन हो गया क्योंकि कांग्रेस में टिकट मिलने का चांस नहीं था. इसी वजह से उन्हें मोदी जी की नीति में भरोसा हो गया.

जो नहीं दिख रहे हैं वही हैं
इन्होंने पहली बार कांग्रेस नहीं छोड़ी. सन 94 में एक बार और छोड़ी थी. और अपनी पार्टी कांग्रेस तिवारी बनाई थी. फिर सोनिया गांधी ने बुलाया तो वापस आ गए कांग्रेस में. तुम कितने भी हंसीं, जवां हो. बादाम, अखरोट से लेकर शिलाजीत का सेवन करो. कभी इस युवा नेता के बराबर युवा नहीं हो पाओगे जिसका हाथ भी नहीं उठता लेकिन वो पार्टी बदल पत्र पर साइन करने के लिए कलम उठा ले. जिस उम्र में वानप्रस्थ, संन्यास सब निपटकर समाधि नजदीक आ जाती है उस वक्त ये आदमी देश की सेवा करने की सोच रहा है. और हमारे देश का युवा भटसप में खर्च हो रहा है रजाई में पड़े पड़े. शर्मनाक नहीं है यह?
कुछ लोग कह रहे हैं कि वो इस उम्र में अपने बेटे, जी हां अपने बेटे का फ्यूचर बनाने के लिए पार्टी बदल रहे हैं. अजीब बचकाना तर्क है भई. बेटा कोई दूध पीता बच्चा है क्या? वो चाहे जिस पार्टी में जाए अपना भविष्य बनाने. अभी तो इनका खुद का कितना भविष्य बाकी है. पहले अपना भविष्य तो सुरक्षित कर लें.
बीजेपी वाले चालू हैं. वो ऐसे कर्मठ और जुझारू नेता को अपनी पार्टी में शामिल करके अपना भविष्य बना रहे हैं. अगर दोबारा नोटबंदी होती है तो इस बार मोदी जी अपनी मां की जगह इनको लाइन में लगाकर फोटो खिंचवा देंगे. पूरा माहौल बन जाएगा. यूथ को एक और आइकन मिल जाएगा.
एक और बात है. उन्होंने इतने साल घास नहीं खोदी. ट्रिविया खोलकर देख लीजिए. यूपी से लेकर उत्तराखंड तक के सीएम रह चुके हैं. ये वही उत्तराखंड है जिसके बारे में इन्हीं एनडी तिवारी ने कहा था कि "उत्तराखंड मेरी लाश पर बनेगा." उत्तराखंड भी बन गया और ये सीएम भी बन गए. उस हिसाब से देखें तो उत्तराखंड ने एक लाश को सीएम बनते भी देख लिया. पॉलिटिकली करेक्ट करने के चक्कर में हमको फैक्ट्स मत छोड़ देना भैया. ये खुद उनका ही बयान है.
ये वही एनडी तिवारी हैं. ये वही बेटा रोहित शेखर है जिसकी वजह से इनका नाम DNA तिवारी पड़ा. पैदा हुआ तो इनका बेटा नहीं था. 6 साल केस चलने पर बेटा हो गया. बेटा हुआ तो मां भी हो गई. उज्ज्वला शर्मा से 2014 में शादी कर ली. नहीं, न बेटा होना गलत है न शादी होना. लेकिन इतनी दहकच्चर होनी तो गलत थी न. इतनी गलतियां एक साथ नौजवान ही करते हैं. नेताजी मुलायम की भाषा में कहें तो "लड़के हैं, गलती हो जाती है."

2009 में एक तेलुगू चैनल ने आग लगा दी थी. इनको तीन लड़कियों के साथ राजभवन के बिस्तर में दिखा दिया था. इसे सेक्स स्कैंडल कहकर मजे लिए गए तो तिवारी ने इस्तीफा दे दिया. बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला देकर. लेकिन ये बड़ी अबूझ पहेली थी. लेकिन क्या ये बड़ी बात नहीं थी कि खराब स्वास्थ्य और इतनी उम्र होने के बावजूद DNA तिवारी सेक्स स्कैंडल में फंसे.
हमारा थककर चूर हो रहा मैसेंजर में "लब्बू बाबू शोना" करके हुए चुम्मियां भेजने वाला युवा. रजाई में सिकुड़े हुए क्रांति कर रहा युवा काहिल और कामचोर युवा आज भी अगर एनडी तिवारी से कुछ नहीं सीखता तो उसे कोई हक नहीं समाज की समस्याओं पर बोलने का.
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