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'12 साल की उम्र में पहली फिल्म आई, फिल्म समीक्षक मेरे उभर रहे ब्रेस्ट पर लिख रहे थे'

ऑस्कर जीत चुकीं नताली पोर्टमैन ने जब पहला फैन मेल खोला, तो उसमें उनसे रेप की कल्पना थी.

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नताली ने जब अपनी पहली फिल्म की थी, तब वो 12 साल की थीं. उन्हें उम्मीद थी कि लोग फिल्म देखकर उनकी ऐक्टिंग की तारीफ करेंगे. ऐसा हुआ भी. मगर इन तारीफों के अलावा ऐसी भी बातें हुईं जब लोगों ने उनके स्तनों के उभार के बारे में लिखा. जब उनके फैन ये बताने के लिए उन्हें मेल करने लगे कि किस तरह वो नताली के साथ रेप करने की कल्पना करते हैं.
किसी फिल्म का रिव्यू करते समय क्या देखा जाता है? किन-किन बातों को गौर करने लायक माना जाता है? क्या उस फिल्म में काम करने वाली 12 साल की बच्ची के स्तनों का उभार फिल्म रिव्यू का विषय हो सकता है? उसके स्तन कितने बड़े थे, उनका उभार कितना था, ये सारी चीजें समीक्षा के लायक हैं? नताली पोर्टमैन के साथ 
'ब्लैक स्वॉन' याद है? एक अंग्रेजी फिल्म थी. 2010 में आई थी. जिसमें वो डांस करने वाली लड़की होती है. जो राजकुमारी 'वाइट स्वॉन' बनना चाहती है. मगर फिर उसे महसूस होता है कि कैसे एक रोल पाने की खातिर उसके अंदर का अंधेरा बढ़ता जा रहा है. उस फिल्म के लिए नताली पोर्टमैन को ऑस्कर मिला था. जब नताली ने अपनी पहली फिल्म की थी, तब वो बस 12 साल की थीं. लोग जब फिल्म देखने गए, तब पर्दे पर उस 12 साल की बच्ची के अंदर औरत तलाशने लगे. वो बच्ची उन्हें सेक्शुअल लग रही थी. आकर्षित कर रही थी. नताली पोर्टमैन अब बड़ी हो गई हैं. मगर बचपन का वो अनुभव नहीं भुला सकी हैं. उन्हें अब भी वो दौर याद है. और बहुत खौफनाक तरीके से याद है. नताली के पास उन सारी बुरी यादों के लिए एक खास शब्द है- सेक्शुअल टेररिज़म. यानी, यौन आतंकवाद. जब फिल्म देखने वाले एक फिल्म की तमाम बातें पीछे छोड़कर उसमें काम कर रही बच्ची की छाती के उभार पर गौर करने लगें, तो वो भी तो एक किस्म का 'आतंक' ही है. कि आपके लिए एक औरत और बच्ची में भी फर्क नहीं रहा! आपको अपनी सेक्स की कल्पनाओं के लिए बच्ची भी चलेगी! कि मौका मिले तो आप एक बच्ची को जबरन अपने बिस्तर तक घसीटने से नहीं चूकेंगे!
नताली ने लॉस ऐंजिलिस में एक प्रोग्राम के दौरान बताया कि इस तरह के अनुभवों के कारण वो बहुत सहम गई थीं. पब्लिक में कैसे बोलना है, कैसे रहना है, इन सब बातों का बहुत लोड लेने लगीं.
नताली ने लॉस ऐंजिलिस में एक प्रोग्राम के दौरान बताया कि इस तरह के अनुभवों के कारण वो बहुत सहम गई थीं. पब्लिक में कैसे बोलना है, कैसे रहना है, इन सब बातों का बहुत लोड लेने लगीं.

लॉस ऐंजिलिस में एक कार्यक्रम के दौरान नताली के आपबीती लोगों के साथ साझा की. नताली ने इस प्रोग्राम में बताया:
जब मेरी पहली फिल्म 'लियॉन: द प्रफेशनल' की शूटिंग हुई, तब मैं 12 साल की थी. जब फिल्म आई, तब मैं महज 13 साल की हुई थी. फिल्म रिलीज होने पर मैं बहुत खुश थी. बड़ा उत्साह था मेरे अंदर. कि लोग मेरे काम की, मेरी कला की तारीफ करेंगे. जब मेरे पास पहले फैन का मेल आया, तो मैंने बहुत खुश होकर उसे पढ़ना शुरू किया. जिस शख्स ने मुझे वो मेल किया था, उसने लिखा था कि वो मेरा बलात्कार करने की कल्पना करता है.
उन्होंने कहा,
मूवी का रिव्यू करने वाले अपनी समीक्षा में मेरे बढ़ते स्तनों की बातें कर रहे थे. लिख रहे थे कि कैसे मेरे स्तन मेरे कपड़ों के नीचे से झांक रहे थे. मेरी उम्र भले ही 13 साल की रही हो, लेकिन मैं बहुत जल्दी ही ये बात समझ गई थी कि अगर मैं अपने जज्बातों को, खुद को सेक्शुअली एक्सप्रेस करूंगी तो बहुत असुरक्षित महसूस करूंगी. कि तब पुरुष मेरे शरीर के बारे में बातें करेंगे. जैसे मैं कोई चीज हूं. कि जैसे मेरा शरीर शरीर नहीं, कोई सामान है. वो इस बात की भी परवाह नहीं करेंगे कि इन सब चीजों को लेकर मैं कितनी असहज हूं.
सोचिए. कितना डरावना है ये. ऐसे ही लोग रेप पॉर्न और चाइल्ड पॉर्न में आनंद खोजते हैं. 12 साल की एक बच्ची सुंदर हो सकती है. देखने में अच्छी लग सकती है. मगर वो बच्ची है. कोई बीमार इंसान ही उसके साथ सेक्स करने की कल्पना कर सकता है. कोई घटिया इंसान ही उसके साथ बलात्कार करने के सपने देखकर आनंद ले सकता है. मगर नताली की बुरी यादें इतने तक ही नहीं हैं. उनकी बातों में छुपी दहशत महसूस कीजिए:
मेरे 18वें जन्मदिन से पहले मेरे यहां के एक रेडियो शो पर उल्टी गिनती शुरू की गई. लोग कह रहे थे कि अरे, अब तो ये 18 साल की होने जा रही है. अब तो ये कानूनी तौर पर किसी के साथ सो सकती है. सेक्स कर सकती है.
नताली के मुताबिक, अपने बचपन के उस अनुभव ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया. आगे के फिल्मी करियर में फिल्में चुनते समय भी वो बातें उनके दिमाग पर हावी रहती थीं.
नताली के मुताबिक, अपने बचपन के उस अनुभव ने उन्हें बहुत बदल दिया. अपने करियर में फिल्में चुनते समय भी वो उनके दिमाग पर हावी रहती थीं.

ये इतनी घिनौनी बातें हैं कि सुनकर आप सन्न रह जाते हैं. स्वाभाविक है कि इन बातों ने नताली को बहुत परेशान किया. वो बहुत डर गई थीं. इस डर ने नताली पर बहुत असर छोड़ा. सार्वजनिक तौर पर लोगों के सामने कैसे रहना है, कैसे बात करनी है, इस सबपर वो बहुत ध्यान देने लगीं. सोच-समझकर फिल्म चुनने लगीं. वो नहीं चाहती थीं कि उनकी फिल्मों को देखकर लोग उनके बारे में यौन कल्पनाएं करें. और शायद इसी वजह से नताली को देखे जाने का पब्लिक का तरीका बदल गया. लोग उन्हें 'गंभीर' और 'दकियानूसी' तक कहने लगे. वो समझ ही नहीं सके कि ये गंभीरता नताली की चॉइस नहीं थी. ये उन्होंने खुद के ऊपर थोपी थी. वो भी डरकर. खौफ खाकर. और इस खौफ की वजह बेहद शर्मनाक है.


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