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पोलैंड पर हमले के बाद नेटो में हंगामा!

पोलैंड पर मिसाइल अटैक की पूरी कहानी क्या है?

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पोलैंड में मिसाइल हमले के बाद तफ्तीश करती पुलिस (AP)

एक मिसाइल, दो मौत और 32 देशों में हंगामा मच गया. इस हंगामे की कहानी एक मिसाइल अटैक से शुरू हुई थी. 15 नवंबर की शाम पोलैंड के एक गांव में मिसाइल से हमला हुआ. इसमें दो लोगों की मौत हो गई. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ये मिसाइल रूस ने दागी थी. अगर ये दावा सही साबित हुआ तो ये पूरी दुनिया के लिए ख़तरनाक हो सकता है.
पोलैंड, नेटो का सदस्य देश है. नेटो चार्टर के आर्टिकल फ़ाइव के अनुसार, एक सदस्य देश पर हमले को पूरे नेटो पर हमला माना जाता है. ऐसी स्थिति में पूरा नेटो संबंधित देश की तरफ़ से लड़ता है. ये हमला रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच में हुआ है. अगर पोलैंड पर हमले के मामले में रूस की भूमिका पाई जाती है तो नेटो के 30 देश मिलकर रूस पर हमला कर सकते हैं. ये एक संभावना है. ऐसा होगा या नहीं? ये पूरी तरह से आगे की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

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फिलहाल, हम जान लेते हैं,
- पोलैंड पर मिसाइल अटैक की पूरी कहानी क्या है?
- हमले के बाद नेटो के आर्टिकल 4 और आर्टिकल 5 चर्चा में क्यों है?
- और, रूस पर नेटो के हमले की आशंका में कितना दम है?

आज हम पोलैंड पर हुए हमले की कहानी सुनाने वाले हैं.

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सबसे पहले ये नक्शा देखिए.

पोलैंड मैप (गूगल मैप)

रूस के पश्चिम में बेलारूस और यूक्रेन हैं. बेलारूस और यूक्रेन की पश्चिमी सीमा से सटा है पोलैंड. जहां से यूक्रेन की सीमा खत्म होती है, वहां से चार मील अंदर पोलैंड में प्रिसेवूडाव नाम का एक गांव पड़ता है. आज से पहले तक इस गांव में बहुत कम लोगों को दिलचस्पी थी. लेकिन 15 नवंबर को हुए हमले के बाद ये अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है. हलचल का आलम समझना हो तो कुछ यूं समझिए,

- मिसाइल हमले के तुरंत बाद पोलैंड ने नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी आपातकालीन बैठक बुला ली. पोलैंड ने अपनी सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश भी दिया.

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- G-7 के सभी नेता बाली में G20 समिट में हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं. हमले का असर वहां पर भी दिखा. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने G7 और नेटो की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. न्यूज़ एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, जिस समय हमले की ख़बर आई, उस समय बाइडन सो चुके थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें आधी रात को जगाया गया. रात में ही उन्होंने पोलैंड के प्रधानमंत्री आंद्रेज़ डुडा को फ़ोन मिलाया. बाइडन ने आश्वस्ति दी कि उनका देश पोलैंड के साथ खड़ा रहेगा.

- अगली अपडेट ब्रुसेल्स से आई. ब्रुसेल्स में नेटो का मुख्यालय है. नेटो के सेक्रेटरी-जनरल जेंस स्टोलेनबर्ग ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में आगे की स्थिति पर चर्चा हुई.

- पोलैंड पर हमले के बाद से नेटो के आर्टिकल 04 और आर्टिकल 05 को लागू करने पर बहस हो रही है. ये नेटो का रेस्पॉन्स सिस्टम है. इन्हें सदस्य देशों पर ख़तरा पैदा होने की स्थिति में लागू किया जाता है.

अब समझ लेतेे हैं कि इन दोनों आर्टिकल्स में क्या दर्ज़ है? इसे समझने के लिए हमें नेटो का इतिहास समझना होगा.

ये उस दौर की बात है, जब दूसरा विश्वयुद्ध खत्म हो चुका था. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत संघ महाशक्ति बनकर उभरे. अमेरिका तो पूंजीवादी था, लेकिन सोवियत संघ की अलग विचारधारा थी. उसने अपने आस-पड़ोस में कम्युनिज़्म का प्रचार-प्रसार शुरू किया. इससे अमेरिका और यूरोप के उसके सहयोगी देशों को ख़तरा महसूस हुआ. उन्हें लगा कि सोवियत संघ आगे चलकर उन्हें निशाना बना सकता है. कि सोवियत आगे चलकर उन पर हमला कर सकता है. सोवियत संघ की योजना तुर्की और ग्रीस पर अपना दबदबा बनाने की थी. तुर्की और ग्रीस पर पर कंट्रोल से सोवियत संघ काला सागर के जरिए होने वाले दुनिया के व्यापार को नियंत्रित करना चाहता था. सोवियत संघ की विस्तारवादी नीतियों के कारण पश्चिमी देशों और अमेरिका से उसके संबंध पूरी तरह खराब हो गए. इसी डर के चलते अप्रैल 1949 में 12 देश साथ आए और एक संगठन बनाया. नाम रखा NATO, नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी आर्गेनाइजेशन. मकसद था यूरोप में शांति कायम रखना. सभी मेम्बर देशों के साथ परस्पर सहयोग बनाए रखना और उनकी आज़ादी की रक्षा करना.

नेटो फ्लैग (AFP)

वक्त बीतने के साथ नेटो में और भी देश जुड़ते गए. साल 1999 में पोलैंड भी इसमें शामिल हो गया. पोलैंड अब अलग-थलग नहीं पड़ा हुआ था. अब उसके साथ दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिलिट्री अलाइंस थी. पोलैंड की छवि दुनिया में शांतिप्रिय रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी वो हमेशा शांति वार्ता की बात करता रहा है.

अब दोनों आर्टिकल के बारे में जान लेते हैं.

आर्टिकल 4 –

नेटो चार्टर के आर्टिकल 4 में कहा गया है कि जब भी किसी सदस्य देश को ये लगे कि उसकी या किसी भी सदस्य देश की क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता या सुरक्षा को खतरा है तो वे एक साथ उस मसले पर चर्चा करेंगे. इससे नेटो देशों के बीच आगे की स्थिति और सूचनाओं को साझा किया जाएगा. इससे उस मसले को अच्छे ढंग से समझने में मदद मिलेगी. ये स्टेप इसलिए भी ज़रूरी है ताकि मसले को पहले बातचीत से समझकर सैन्य संघर्ष की संभावनाओं को कम किया जा सके. इस तरह की चर्चाओं का प्राथमिक मंच नॉर्थ अटलांटिक काउंसिल (NAC) है, जो नेटो की राजनीतिक निर्णय लेने वाली संस्था है.

1949 में नेटो की स्थापना के बाद से आर्टिकल 4 को कुल 7 बार लागू किया जा चुका है. उदाहरण के लिए, तुर्की ने इसका इस्तेमाल 2015 में किया था. जब सीरिया की सीमा के पास एक आत्मघाती बम विस्फोट में 30 लोगों मारे गए थे. उस समय तुर्की सरकार ने कहा था कि वो अपने नेटो सहयोगियों को उन उपायों के बारे में बताना चाहता है जो वो हमले के जवाब में उठा रहे हैं. आर्टिकल 4 के इस्तेमाल के बाद मीटिंग बैठाई गई. उसके बाद NAC VS बयान जारी किया और कहा कि नेटो तुर्की के खिलाफ आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा करता है  हालांकि आगे इस मसले पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई. नेटो के आर्टिकल 4 को आसान भाषा में ऐसे कह सकते हैं कि इसमें बातचीत होती है. इस आर्टिकल के इस्तेमाल के बाद सभी मेम्बर देशों को एक्शन लेना लाज़मी नहीं होता है, अगर मीटिंग में ये बात तय हो जाए तभी ऐक्शन लिया जाता है.

अब आर्टिकल 5 के बारे में समझ लेते हैं -

इसमें साझा सुरक्षा की बात लिखी. आर्टिकल फ़ाइव के मुताबिक अगर, किसी नेटो सदस्य देश पर सैन्य हमला होता है तो उसे सभी नेटो देशों पर हमला माना जाएगा. ऐसे हालात में नेटो के हर सदस्य देश को इलाके की सुरक्षा बहाल करने के लिए सैन्य कार्रवाई और दूसरे ज़रूरी उपाय करने होंगे. इसका इस्तेमाल केवल एक बार किया गया है. जब 11 सितंबर 2001 में अमेरिका पर आतंकवादी हमला हुआ था. उसके बाद अमेरिका के नेतृत्व में नेटो सेनाओं को अफगानिस्तान में तैनात किया गया था.

अब सवाल उठता है कि क्या इन आर्टिकल्स का इस्तेमाल पोलैंड करेगा?

इसकी संभावना कम नज़र आती हैं. जानकारों का कहना है कि हो सकता है कि ये मिसाइल ग़लती से दाग दी गई हो, या किसी तकनीकी समस्या की वजह से ये पोलैंड की सीमा में आ गिरी हो. इसके साथ जानकार इस बात की भी संभावना बताते हैं कि पिछले कुछ समय से यूक्रेन का एयर डिफ़ेंस सिस्टम काफ़ी एक्टिव चल रहा है. क्योंकि रूस ताबड़तोड़ मिसाइलें यूक्रेन पर दाग़ रहा था. ऐसे में संभव है कि यूक्रेनी डिफ़ेंस सिस्टम ने रूसी मिसाइल को निशाना बनाया हो और वो पोलैंड की सीमा के भीतर जा गिरी हो.  अगर ये बात निकलती है तो पोलैंड के इन आर्टिकल्स के इस्तेमाल की संभावना कम हो जाएगी.

ये तो रही नेटो और पोलैंड की बात. अब हालिया घटनाक्रम के बारे में जान लेते हैं. पोलैंड के समय के अनुसार 15 नवंबर की शाम 3 बजकर 40 मिनट पर प्रिसेवूडाव गांव में 2 मिसाइल आकर टकराई. पोलैंड की स्थानीय मीडिया के अनुसार, मिसाइल उस जगह आकर गिरी जहां अनाज सुखाया जा रहा था. मिसाइल टकराते ही धमाका हुआ. धमाके में 2 लोग मारे गए. धमाके के बाद आनन-फानन में दमकल की टीम मौके पर पहुंची. दमकल विभाग ने विस्फोट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.

सनद रहे कि पोलैंड से ये मिसाइल उस वक्त टकराई है जब रूस, यूक्रेन पर एक बड़ा मिसाइल हमला कर रह था. इसी के चलते ये बात आई कि पोलैंड से टकराने वाली ये मिसाइल रूसी हैं. पोलैंड में मिसाइल हमले की बात जब मीडिया में रिपोर्ट हुई तो प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हुआ. दुनिया के कई बड़े नेताओं की तरफ से बयान आए.

- घटना के तुरंत बाद पोलैंड के विदेश मंत्री ज़बिग्नू राऊ ने रूस के राजदूत को तलब किया. उन्होंने रूस से पूरी रिपोर्ट मांगी है. उन्होंने अंदेशा जताया है कि ये मिसाइल रूसी है. लेकिन अभी इसकी जांच चल रही है तो हम खुलकर कुछ नहीं कह सकते.

- पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने कहा कि अभी ये ठीक-ठीक नहीं पता है कि किसने मिसाइल दागी है.

- इंडोनेशिया के बाली में जी20 सम्मेलन चल रहा है. जैसे ही पोलैंड पर मिसाइल अटैक की ख़बर बाली पहुंची तो जी 20 सम्मलेन में भी इसका असर दिखा, जो मुद्दे तय किए गए थे वो फ़ीके पड़ते दिखे. चर्चा पोलैंड पर केंद्रित होने लगी. वहीं से G7 नेताओं ने इस मसले पर बातचीत करने के बाद एक साझा बयान जारी किया. इसमें कहा गया,

"हमने पोलैंड में हुए धमाके पर चर्चा की है. हम पोलैंड को इसकी जांच में पूरा सहयोग करने का प्रस्ताव दे रहे हैं. हम अगले क़दम के लिए पोलैंड के साथ नज़दीकी संपर्क में रहेंगे."

पोलैंड में मिसाइल हमले के बाद G20 सम्मलेन में मीटिंग (AP)

- इस मसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का भी बयान आया. वो बोले,

"मैं तब तक कुछ नहीं कहूंगा जब तक हम अपनी जांच पूरी नहीं कर लेते. उन्होंने कहा कि इस बात की कम संभावना है कि ये मिसाइल रूस ने दागी हो.”

- अगर इस बात की पुष्टि होती है कि ये मिसाइल रूस ने चलाई है तो ये पहली बार होगा जब किसी नेटो सदस्य देश में रूसी मिसाइल गिरी हो.

- पोलैंड पर रूसी हमले के इतर एक बात और है जो सुर्खियां बना रही है, वो ये है जब रूस ने यूक्रेन पर मिसाइल से हमला किया तो यूक्रेन के एयर डिफेन्स सिस्टम ने उन मिसाइल को डेमेज कर दिया होगा, और वो मिसाइल सही जगह न गिरकर पोलैंड की सीमा में गिर गई हो.  

- यूक्रेन की वायु सेना की तरफ से कहा गया है कि 15 नवंबर को रूस की तरफ से 70 मिसाइल हमारी सीमा की तरफ दागी गई थीं. जिनको हमने नष्ट कर दिया था, उनमें से नष्ट हुई एक मिसाइल टुकड़ा कीव की एक रिहायशी इमारत पर जा गिरा. जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई.

इस मामले पर रूस ने क्या कहा है?

रूस ने इन सभी आरोपों से इंकार किया है. रूस के रक्षा मंत्रालय ने टेलीग्राम पर एक लिखित बयान जारी किया है. इसमें कहा गया है कि पोलिश अधिकारियों और मीडिया आउटलेट्स में रूसी मिसाइलों के हमले की ख़बर जानबूझकर उत्तेजना फैलाने के लिए गढ़ी जा रही हैं. इसमें सच्चाई नहीं है.

जैसा कि हमने शुरू में बताया कि पोलैंड नेटो का सदस्य है. नेटो के सदस्य होने से उसे दुनिया की सबसे ताकतवर सेना का समर्थन मिला हुआ है. मिसाइल के हमले की ख़बर आते ही नेटो में भी इसकी चर्चा हुई.

नेटो के एक सैन्य अधिकारी ने CNN को बताया कि जब वो मिसाइलें पोलैंड की हवाई सीमा के ऊपर उड़ रही थीं उस समय नेटो के एयर क्राफ्ट ने उसे ट्रैक किया गया था. हालांकि उस सैन्य अधिकारी ने भी इसकी जानकारी नहीं दी कि ये मिसाइल किसने दागी थी. G20 मीटिंग के दौरान भी नेटो सदस्यों ने सुबह-सुबह मीटिंग की और कहा कि हम पोलैंड में जांच का पूरा समर्थन करते हैं. पोलैंड में मिसाइल किसने दागी या किसी से ग़लती से दग गई? इन सबका पता तो जांच के बाद ही चलेगा.

G20 से भारत को कितना फायदा?

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