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'ये चिट्ठी ज्यादा पढ़ ली तो जिंदगी से घिन आने लगेगी'

जो अभी ताजा-ताजा 12वीं पास हुए हैं. वो जरूर पढ़ें. ये संडे वाली चिट्ठी आपका करियर प्लान चेंज कर सकती है.

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symbolic image, क्रेडिट: Reuters
दिव्य प्रकाश दुबे
दिव्य प्रकाश दुबे

12वीं का रिजल्ट आ गया है. टॉपर्स की तस्वीरें और चर्चे फेसबुक और जिंदगी दोनों की फीड में तैरने लगे हैं. 12 वीं पास होते ही, खुशी के फौरन बाद जो टेंशन होती है. वो होती है आगे क्या करना है. ऑबियसली, पढ़ाई ही ऑप्शन नजर आता है. क्योंकि एक वही तो ऑप्शन है. क्या सच्ची? शायद नहीं. इस बार 12वीं का रिजल्ट संडे से ठीक पहले आया. ये बात इसलिए लिखनी अच्छी लग रही है, क्योंकि अब महज संडे चाय-पापे वाला संडे नहीं होता. संडे वाली चिट्ठी वाला संडे भई होता है. दिव्य प्रकाश दुबे की संडे वाली चिट्ठी आ गई है. 12 वीं से जो पास हुए हैं, उनके नाम लिखी है ये चिट्ठी. पढ़िए और पढ़ाइए. क्योंकि ये संडे और जिंदगी आपकी है. 


 
सुनो यार,
12th तो पास हो गए यार तुम! तुम्हारे बहुत से दोस्तों ने या तो इंजीनियरिंग या मेडिकल की तैयारी शुरू कर दी होगी. और तुम, हां तुमसे ही बात कर रहा हूं. तुम्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है न कि आखिर ये हो क्या रहा है.
अभी थोड़े दिन में एक दिल्ली यूनिवर्सिटी के एडमिशन की ‘वाहियात’ सी एक कट ऑफ़ की लिस्ट भी आ जाएगी. जो चुटकुले बनाने के काम आएगी. एजुकेशन इस देश में या तो मज़ाक है नहीं तो बिज़नेस.
देखो तुम्हें बहुत लोग समझाएंगे अपने दिल की सुनना, जो मन आए वो करना. ये सब बकवास है. तुम अपने पैरेंट्स की सारी बातें मानना, आखिरी क्यूं नहीं मानोगे. उन्होंने तुमसे ज़्यादा दुनिया देखी है. अपना दिमाग मत लगाना, तुम्हारी जिंदगी मम्मी पापा का सपना है. उनके हर एक दो कौड़ी के सपने को पूरा करना. नहीं मैं मज़ाक नहीं कर रहा. हिदुस्तान में मां बाप जो सबसे बड़ा सपना देख सकते हैं वो इतने छोटे हैं कि मुझे डर लगता है. खैर तुम मत डरना, वो जो बोलेंगे वो वाली कोचिंग जॉइन कर लेना. वो जिस भगवान/खुदा के सामने सर झुकवाएंगे झुका लेना. सर झुकाते झुकाते एक दिन तुम्हारी गर्दन मान जाएगी कि ‘कोई सुपरपावर तो है.’
सब कुछ उनके हिसाब से करना. कॉलेज में पहुंचकर उस कंपनी में प्लेसमेंट में नौकरी के लिए कोशिश करना, जिसका नाम तुम्हारे पापा और उनके दोस्तों को याद हो. इस बीच गलती से कहीं प्यार व्यार, सेक्स- वेक्स मत कर लेना. वो ढूंढ़ लेंगे तुम्हारे लिए एक अच्छी सी लड़की या लड़का. फिर जहां नौकरी मिले वहां बॉस को खुश रखना हर साल Increment के लिए काम करना. इतना काम करना कि मां बाप जब तुम्हारे पास घूमने आएं तो बड़ी मुश्किल से टाइम निकाल पाना. हर एक दो साल में कंपनी स्विच करना और 2-3BHK घर बुक करा लेना. जिसका लोन अगले 20 साल चले.
घरवालों की मर्जी से एक दिन सेम कास्ट में धूमधाम से शादी कर लेना. फ़िर अपने मां बाप के प्रैशर में आकर बच्चा पैदा कर लेना. फ़िर तुम जो हर मदर’s डे और फादर’s डे पर अपने पापा- मम्मी जैसा बनना चाहते हो. वैसे ही बन जाना और अपने बच्चे के साथ सब कुछ REPEAT करना जो कुछ भी तुम्हारे साथ हुआ है.
नहीं मज़ाक नहीं कर रहा हूं. तुम्हारे साथ यही सब होने वाला है. ये चिट्ठी पढ़ने के बाद या तो जला देना नहीं तो किसी जगह छुपा कर भूल जाना. क्यूंकि गलती से ये चिट्ठी तुमने ज़्यादा बार पढ़ ली तो तुम्हें अपनी आने वाली ज़िन्दगी से घिन आने लगेगी. तुम्हारी जो उम्र और मेच्योरिटी है वहां से दुनिया ऑन पेपर एक दम परफेक्ट दिखती है और तुम्हारे सपने की औकात चाहे चव्वनी भर की हो, मैं उसको तोड़ना नहीं चाहता.
या फ़िर जब तुम्हें कुछ समझ नहीं आ रहा तो तुम ये भी कर सकते हो कि एक साल का ब्रेक ले लो. नहीं मेडिकल या इंजीनियरिंग या लॉ की तैयारी के लिए नहीं, अपने लिए. तुम खुद अपने लिए किसी भी कॉलेज की मेडिकल या इंजीन्यरिंग की सीट से तो ज़्यादा ही इंपोर्टेंट हो न. क्या पता तुम्हें जवाब मिल जाए. और जवाब न भी मिले. जिंदगी में एक दो असली सवाल ही ढूंढ़ लिए तो यार खेल समझ गए तुम!
दिव्य प्रकाश दुबे


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