मार्टिन लूथर किंग यानी अमेरिकी सिविल राइट्स मूवमेंट का नायक. 15 जनवरी को पैदा हुए किंग को 1964 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला. उनके नस्लभेद विरोधी आंदोलन से लोग इतना खफा हो गए थे कि अप्रैल 1968 में गोली मारकर किंग की हत्या कर दी गई. किंग की हत्या होती भी क्यों न, बचपन से दोयम दर्जे का व्यवहार झेलता आ रहा एक बच्चा कॉलेज में ‘ईश्वर की अलग-अलग धारणाओं’ पर पीएचडी करता है.
1955 में जब 15 साल की एक अश्वेत, प्रेगनेंट और अविवाहित लड़की बस में एक गोरे को सीट देने से मना कर देती है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है. किंग बस बॉयकॉट शुरू करवाते हैं. 385 दिन लंबा बॉयकॉट गोरों को इतना परेशान कर देता है कि उनके घर पर बम फेंका जाता है. इस बम कांड के बाद अश्वेतों को बस में बराबर हक मिलते हैं.इस बार किंग को रंग और नस्ल से परे समर्थन मिलता है, उन सभी का जो युद्ध नहीं चाहते हैं. मगर मीडिया के कुछ तबके किंग के इस भाषण की खिल्ली उड़ाते हैं. आज की तारीख में किंग का ये भाषण तमाम अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च सेंटर्स में स्लेबस का हिस्सा है.
अमेरिका की गांधी सोसायटी के साथ किंग बराबरी के हक की मांग करते हैं. कैनेडी से मांग करते हैं कि वो राष्ट्रपति के तौर पर लिंकन का अनुसरण करें. कैनेडी मना कर देते हैं. एफबीआई उनकी जासूसी करवाती है. किंग पर वामपंथी, देशद्रोही होने के आरोप लगे. मगर किंग अहिंसा से ही देश में बराबरी लाने के विश्वास के साथ डटे रहते हैं. 1961 में एल्बेनी में किंग शहर के लोगों के साथ आंदोलन चलाते हैं. किंग को 178 डॉलर या 45 दिन की जेल की सज़ा होती है. किंग जेल जाना चुनते है. मगर शहर में अशांति फैलने के डर से पुलिस किंग को तीसरे दिन ही जमानत पर रिहा कर देती है.
7 मार्च 1965 को ब्लडी संडे कहा जाता है. शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस और गोरों की भीड़ हमला करती है. किंग इस प्रदर्शन में शामिल नहीं थे. इसके 2 दिन बाद 9 तारीख को किंग फिर पर्दशन करते हैं. लोगों के अंदर का आक्रोश और बढ़ जाता है.
वियतनाम युद्ध शुरू होता है. किंग युद्ध का खुल कर विरोध करते हैं. अपने प्रसिद्ध भाषण ‘बियॉन्ड वियतनाम’ में किंग कहते हैं इस युद्ध को टालने से जो पैसे बचेंगे उससे तमाम भलाई के काम हो सकते हैं. किंग अमेरिका पर लाखों बेगुनाहों के कत्ल का इल्ज़ाम लगाते हैं.

वियतनाम पर भाषण देते किंग
वैसे किंग का सार समझने के लिए उनके प्रसिद्ध भाषण आई हैव अ ड्रीम के एक हिस्से को पढ़ना चाहिए.
मेरे दोस्तों, आज और कल की तमाम मुश्किलातों के बाद भी मेरे पास एक सपना है. ये अमेरिका के सपने की जड़ों में गहरे तक जमा हुआ सपना है. मेरा सपना है कि देश खड़ा होगा और अपनी नस्ल के सच्चे अर्थों को जिएगा. हम सच में ऐसे जिएंगे कि सारे इंसान एक हैं. मेरा सपना है कि पुराने गुलामों के लड़के और उनके मालिकों की संताने जॉर्जिया की किसी पहाड़ी पर भाईचारे की मेज पर साथ बैठेंगे. ... मेरा सपना है कि मेरे चार छोटे बच्चे उनके रंग और नाक-नक्श से नहीं बल्कि उनके कैरेक्टर से पहचाने जाएंगे. मेरे पास एक सपना है. ...
1963 में दिए गए इस भाषण को अमेरिकी इतिहास का सर्वश्रेष्ठ भाषण माना जाता है. इस भाषण का प्रभाव ऐसा था कि 1964 के सिविल राइट ऐक्ट के समय समान अधिकारों के मुद्दे को टॉप पर रखा गया.
29 मार्च 1968, किंग बेहतर इलाज की मांग कर रहे लोगों से मिलने टेनेसी जाते हैं. 3 अप्रैल को भाषण देते हैं. 4 अप्रैल की सुबह किंग 'लॉरैन मोटल' के कमरा नंबर 306 की बालकनी के बाहर खड़े हैं. एक गोली चलती है और दुनिया में गांधी को जीने वाला आदमी भी गांधी की नियति को प्राप्त हो जाता है.

'लॉरैन मोटल', इसे अब म्यूज़ियम बना दिया गया है.
इसके बाद पूरे अमेरिका में दंगे हुए. किंग की मौत सिविल राइट्स मूवमेंट को वो ऊंचाई देती है जिस पर चलकर लोग नस्लभेद खत्म करने के लिए खुलकर सामने आते हैं. जब बराक ओबामा राष्ट्रपति बनते हैं तो उसकी नींव में किंग का सपना होता है. वैसे किंग इस मुद्दे को लेकर कितना चिंतित थे इसको ऐसे समझा जा सकता है कि 39 साल के किंग के पोस्टमार्टम में पता चला कि उनके दिल की हालत किसी 60 साल के आदमी जैसी थी.












