The Lallantop

16 साल की उम्र में साध्वी से फौजी बन गई थी ये लड़की

19 साल की उम्र में मौत की सजा मिली थी जोन ऑफ आर्क को. इस फौजी का खौफ इतना था कि डेडबॉडी को तीन बार जलाया गया.

Advertisement
post-main-image
Source: Wikipedia
किस्सा बहादुरी का चल रहा हो. इस वीरांगना का नाम न आए. ऐसा कभी हो सकता है भला. फ्रांस के इतिहास में बड़ी इज्जत से याद किया जाता है ये नाम, जोन ऑफ आर्क. इसकी कहानी ऐसी है कि रोएं खड़े हो जाएं. एक छोटी सी आम लड़की से साध्वी और फिर फौजी लीडर बनने का सफर. वो भी सिर्फ 19 साल की उम्र में सब बन बना कर खतम भी हो गया. ये है कहानी.
14वीं सदी में चल रहा था इंग्लैंड और फ्रांस के बीच युद्ध. 1412 में आज ही के दिन पैदा हुई जोन ऑफ आर्क. उनके पापा एक आम किसान थे. पढ़ाई लिखाई हो नहीं पाई. लेकिन मम्मी ने बड़ा धरम करम भर दिया था. उधर लड़ाई चालू थी देश में. इंग्लैंड ने उत्तरी फ्रांस पर कब्जा कर रखा था. इन्हीं में जोन का गांव भी था. ये एरिया जीतने के बाद वहां दबाव डाला जा रहा था कि लोग जगह छोड़ दें. 12 साल की उम्र में जोन आत्मा से आवाज आई. वो बताने लगी कि खुदा ने उसे लड़ाई में हिस्सा लेने भेजा है. फ्रांस को दुश्मन के चंगुल से छुडाने के लिए. फ्रांस के राजा थे चार्ल्स नंबर सात. उन्हें पूरी सल्तनत दिलाने के लिए. 16 साल की उम्र थी उसकी. पापा ने शादी के लिए दबाव डाला. वो पापा के फैसले के खिलाफ कोर्ट गई और शादी के लिए मना कर दिया. मई 1428 में वह चल दी राजा चार्ल्स का भरोसा जीतने. वहां लोकल मजिस्ट्रेट रॉबर्ट डी बॉड्रीकोर्ट ने मना कर दिया. उसने अपने साथी बटोरे. साथी क्या अनुयायी टाइप थे. जो उसकी बात पर भरोसा करते थे. वो ये मानते थे कि ये लड़की जो कुंवारी है. फ्रांस जीत सकता है तो इसी की बदौलत. तब जोन ने अपने बाल काटे. मर्दों वाले कपड़े पहने और दुश्मन के एरिए में 11 दिन घूमती हुई पहुंची चार्ल्स के पास. उसने चार्ल्स से वादा किया उसे राज दिलाने का. फ्रांस को मुक्त कराने का. मांग की कि फौज उसके हवाले की जाए. उसके नेतृत्व में होगी ये लड़ाई. चार्ल्स के सलाहकारों ने बहुत हीलाहवाली की. लेकिन उसने ऑफर पर मुहर लगा दी. सौंप दी सेना जोन को. 1429 मार्च का महीना. जोन सज गई एक फौजी ड्रेस में. सफेद कपड़े, हथियार और घोड़ा भी दूध सा सफेद था. जोन ने लड़ने जीतने का सिलसिला शुरू कर दिया. जहां जहां फ्रांस की सेना हार रही थी. फौजी जवानों के हौसले पस्त थे. वो पहुंचती और नया जोश भर कर लड़ने को तैयार करती. लेकिन ये सिलसिला लंबा नहीं चला. चार्ल्स के चाटुकारों ने कान भरने शुरू कर दिए. कि ये लड़की बड़ी होशियार है. बड़ी जल्दी पूरी जंग जीत लेगी. फिर खुद बन जाएगी तानाशाह. आपको फेंक देगी कचरे में. राजा साहब कान के कच्चे थे. उसने जोन की कोई सफाई सुनी नहीं. उसके हथियार घोड़े सब छीन लिए. फेंक दिया अपने राज्य के गेट से बाहर. ये साल था 1430. बाहर दुश्मन सेना के फौजियों ने उसको पकड़ लिया. बंदी बना कर ले गए जश्न सा मनाते हुए. फिर उसका कोर्ट ट्रायल हुआ. जहां उस पर 70 मामले दर्ज थे. आदमी की तरह कपड़े पहनने से लेकर मार काट और डायन होने के भी. मई का महीना साल 1431. केस चल रहा था. वो अपने ऊपर लगे आरोपों से से इंकार करती रही. बताती रही कि खुदा के आदेश से इस लड़ाई में हिस्सा लिया. फाइनली उसे मौत की सजा सुनाई गई. 30 मई की सुबह उसकी जिंदगी की शाम बनी. सिर्फ 19 साल की उम्र में उसे जिंदा जला दिया गया. उसकी लाश को दो बार और जलाया गया ताकि उसकी राख भी न मिले. joan of Arc dead ये लड़ाई जिसे हंड्रेड इयर वार कहा जाता है, खत्म हुई. जोन की मौत के 25 साल बाद फिर उसका केस खुला. पोप तीसरे कालिक्सटस को मिली इसकी कमान. इस ट्रायल में जोन को सब आरोपों से मुक्त कर दिया गया. उसे वीरांगना और साध्वी के तौर पर सम्मान दिया गया. तब से फ्रांस में इतिहास की सबसे सम्मानित लेडी हैं जोन. जोन की जिंदगी पर ढेर सारे किस्से लिखे हैं. वो भी बड़े बड़े लोगों ने. विलियम शेक्सपियर, वोल्टेयर, फ्रेडरिक शिलर, जिसेप वर्दी,  मार्क ट्वेन, बर्तोल्त ब्रैच्त और जॉर्ज बर्नार्ड शॉ. तमाम डॉक्यूमेंट्री और फिल्में बनी हैं. https://www.youtube.com/watch?v=iaixO6NYMps

Advertisement
Advertisement