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वेगस: हमलावर मुसलमान होता तो बिना जांच के ही मान लेते आतंकवादी!

हर हिंसा की घटना आतंकवादी हमला नहीं होती. क्राइम और आतंकवाद में फर्क होता है.

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मास शूटिंग के दौरान एक लड़की के ऊपर लेटकर उसे बचाने की कोशिश करता युवक.
स्टीवन पेडॉक. ये नाम 64 साल के एक हत्यारे का है. लास वेगस दुनिया के सबसे जिंदादिल शहरों में से एक माना जाता है. इसी शहर में अपने होटल की खिड़की से अंधाधुंध गोलियां चलाकर स्टीवन ने 59 लोगों की जान ले ली. 500 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया. अमेरिका में आए दिन गोलीबारी की ऐसी घटनाएं होती रहती हैं लेकिन ये घटना अमेरिका की सबसे बड़ी और खौफनाक मास शूटिंग है. पुलिस को हमलावर के कमरे से एक हैंडगन के अलावा कम से कम 20 रायफल मिले हैं. लोग कहने लगे कि ये आतंकवादी हमला है. जांचकर्ताओं ने इससे इनकार किया. उन्होंने कहा, ये मास शूटिंग है. आतंकवाद नहीं. इसे लेकर अब अमेरिका में एक बहस शुरू हो गई है. लोग खूब सवाल पूछ रहे हैं. 59 लोगों की बेमतलब जान लेना आतंकवाद नहीं है? लोग जानना चाहते हैं. अगर ये आतंकवाद नहीं है तो और क्या है? आतंकवाद क्या है?
इसी होटल की 32वीं मंजिल पर अपने कमरे की खिड़की से हमवालर ने गोलियां चलाईं.
इसी होटल की 32वीं मंजिल पर अपने कमरे की खिड़की से हमवालर ने गोलियां चलाईं. तस्वीर में हमलावर के कमरे की दोनों खिड़कियों के टूटे कांच साफ नजर आ रहे हैं.

आतंकवाद की परिभाषा क्या है?

अमेरिकी कानून की परिभाषा पर गौर करते हैं. इसके मुताबिक, लोगों के या फिर संपत्ति के खिलाफ हिंसा का गैरकानूनी इस्तेमाल आतंकवाद की श्रेणी में आएगा. बशर्ते, इसका मकसद अपने राजनैतिक और सामाजिक विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार या फिर नागरिकों (या फिर किसी भी समूह) को धमकाना/मजबूर करना हो. इसके लिए ज़रूरी है कि आतंकवादी गतिविधि में शामिल शख्स के पास कोई मकसद हो. मकसद होना बुनियादी शर्त मानी जाती है. फिर चाहे 500 लोग मारे जाएं या फिर कुछ लोग घायल भर हों. जांच एजेंसियों को अभी स्टीफन पैडोक के पास ऐसा कोई मकसद नहीं मिला है. किसी आतंकवादी संगठन के साथ उसका लिंक भी नहीं मिला है. इस लिहाज से देखें तो लास वेगास में हुई गोलीबारी की घटना आतंकवाद के दायरे से बाहर है. अगर आगे की जांच में कुछ नया मिलता है तो अलग बात है.
लास वेगास में शहर की प्रमुख इमारतों और अस्पतालों के बाहर खून की जरूरत का नोटिस फ्लैश किया जा रहा था, ताकि लोग ब्लड डोनेट करने आएं.
लास वेगस में शहर की प्रमुख इमारतों और अस्पतालों के बाहर खून की जरूरत का नोटिस फ्लैश किया जा रहा था, ताकि लोग ब्लड डोनेट करने आएं.

एक समय था जब आतंकवाद का मतलब क्रांतिकारी होना था

एक दौर था. उपनिवेशवाद का. तब आजादी के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को भी आतंकवादी कहा जाता था. जैसे, भगत सिंह. भगत सिंह ने भी हिंसा को विरोध का जरिया बनाया था. हिंसा मकसद नहीं था, विरोध जताने का तरीका भर था. ऐसी ही एक घटना रूस की है. जुलाई 1877. कर्नल फ्योदोर त्रेपोव सेंट पीटर्सबर्ग का गर्वनर था. पोलैंड के क्रांतिकारियों का खूब दमन करता था. क्रांतिकारी उससे नाराज़ थे. वेरा जेसुलिच ने विरोध के तौर पर त्रेपोव को गोली मार दी. वेरा ने ख्याल रखा कि त्रेपोव मरे न, बस घायल हो. मामला अदालत पहुंचा. कोर्ट ने उससे पूछा कि जो किया, वो क्यों किया? वेरा का जवाब था- मैं अपराधी नहीं हूं. आतंकवादी हूं. वेरा का मतलब था कि उसका एक राजनैतिक स्टैंड है. अपना संदेश पहुंचाने के लिए उसने हिंसा का सहारा लिया था लेकिन ये हिंसा घातक नहीं, सांकेतिक थी. ये भी एक दौर था. तब आतंकवादी कहलाना सम्मानजनक माना जाता था.
हमले के बाद म्यूजिक फेस्टिवल से जान बचाकर भागते लोग.
हमले के बाद म्यूजिक फेस्टिवल से जान बचाकर भागते लोग.

चार तरह के आतंकवाद का दौर देखा है दुनिया ने अब तक

1880 के दशक से लेकर अब तक चार मुख्य तरह के आतंकवाद का दौर दुनिया ने देखा है. पहला- अराजकतावादी. ऐसी राजनैतिक विचारधारा जो कि स्वशासित समुदायों की वकालत करती है. दूसरा- औपनिवेशिक दमन का विरोध करने के लिए हिंसा का सहारा लेने वाले लोग. जैसे भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी. तीसरा- वामपंथी विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले. जो एक 'आदर्श' समाज की स्थापना के लिए हिंसा का विकल्प चुनते हैं. चौथा- धार्मिक कट्टरपंथी. इसमें अातंकवादी किसी भी धर्म का हो सकता है.
साढ़े 500 से ज्यादा लोग इस घटना में घायल हुए हैं. घायलों के इलाज के लिए शहर के अस्पतालों को खून की सख्त जरूरत है. खून दान करने के लिए लाइन में लगे लोग.
साढ़े 500 से ज्यादा लोग इस घटना में घायल हुए हैं. घायलों के इलाज के लिए शहर के अस्पतालों को खून की सख्त ज़रूरत है. खून दान करने के लिए लाइन में लगे लोग.

क्राइम एक चीज है, आतंकवाद दूसरी

अपराध और आतंकवाद में फर्क होता है. आतंकवाद एक किस्म की विचारधारा है. इसका मकसद काफी व्यापक है. अपराधी भी एक से एक नृशंस होते हैं लेकिन अपराधी और आतंकवादी के मकसद में काफी फर्क होता है. पैसे हासिल करने के लिए बंदूक चलाकर बैंक लूटने वाला शख्स अपराधी होता है. आतंकवादी नहीं. जब तक राजनैतिक, धार्मिक या फिर विचारधारा संबंधी मकसद शामिल न हो, तब तक किसी घटना को आतंकवादी गतिविधि नहीं माना जा सकता है. निर्दोष लोगों का कत्ल बहुत बुरा और बर्बर है लेकिन महज हिंसा और बर्बरता ही किसी घटना को आतंकवादी वारदात साबित नहीं करते. बाकी शर्तों का पूरा होना बेहद ज़रूरी है. इस पर बहस हो सकती है. परिभाषाएं सही हैं या गलत, इसे लेकर चर्चा हो सकती है. होती भी हैं. लेकिन फिलहाल जो है, सो है.
हमले के बाद म्यूजिक फेस्टिवल के बाहर का नजारा.
हमले के बाद म्यूजिक फेस्टिवल के बाहर का नजारा.

किसी मुस्लिम को क्यों नहीं मिलता बेनिफिट ऑफ डाउट?

कोई घटना आतंकवाद से जुड़ी है या नहीं, इसे तय करने में जांच एजेंसियों को वक्त लगता है. हालांकि अगर किसी घटना में कोई मुसलमान शामिल हो तो लोग पहले ही उसके आतंकवादी होने का ऐलान कर देते हैं. आम मानसिकता ही ऐसी है. मुस्लिम है तो आतंकवादी होगा. ये भी सच है कि अगर लास वेगास की घटना को किसी मुस्लिम ने अंजाम दिया होता तो लोग कब का इसे टेरर अटैक मान चुके होते. मुसलमानों को बेनिफिट ऑफ डाउट मुश्किल से ही मिलता है. एक मुसलमान द्वारा किए गए अपराध को समुदाय से जोड़ने की होड़ लग जाती है. ऐसे मामलों में ज्यादातर लोग जांच पूरी होने तक सब्र नहीं रख पाते. तुरंत नतीजे पर कूद जाते हैं.

स्टीवन पेडॉक मुसलमान होता तो?

अमेरिका और यूरोप में पिछले कुछ समय से ऐसी हिंसक घटनाओं में इजाफा हुआ है. जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं, मुस्लिम प्रार्थना करने लग जाते हैं. काश, हमलावर मुसलमान न हो! उनके डर की मजबूत वजह है. आंकड़े बताते हैं. ऐसी घटनाओं के बाद आम मुसलमानों के प्रति नस्लीय नफरत बढ़ जाती है. मुसलमानों को मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं. उनके साथ बदसलूकी की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं. स्टीफन पैडोक मुस्लिम नहीं था. किसी मिडिल-ईस्ट देश से ताल्लुक नहीं रखता था. रिफ्यूजी नहीं था. श्वेत नस्ल का था. आतंकवादी संगठन से भी नहीं जुड़ा था. जब पैडोक के आतंकवादी होने की संभावना खारिज की जाएगी, तब बेशक उसका ये बैकग्राउंड भी मायने रखेगा.
हमले के बाद म्यूजिक फेस्टिवल के वेन्यू के बाहर सीढ़ियों पर पड़े बूट्स.
हमले के बाद म्यूजिक फेस्टिवल के वेन्यू के बाहर सीढ़ियों पर पड़े बूट्स.

लास वेगस की घटना से गन कंट्रोल पर गंभीर बहस शुरू होनी चाहिए

गन कंट्रोल पर अमेरिका जाने कब से बहस कर रहा है. नतीजा? कुछ नहीं. स्टीवन आतंकवादी नहीं था तो भी क्या? हत्यारा तो था ही. उसके पास हथियार थे. ये हथियार कहां से आए? मार्केट से. जहां गन कंट्रोल पर कोई गंभीर नीति नहीं है. अमेरिका के लिए ये बेहद भावुक मसला है. हथियार रखने के अधिकार को कैसे नियंत्रित किया जाए? क्या किया जाए कि हथियार ऐसे हत्यारों की पहुंच से दूर रहें? पैडोक के पास कम से कम 23 हथियार थे. दो ट्राइपॉड थे. दो अलग-अलग खिड़कियों पर उसने दो रायफल तैनात किए थे. निशाने पर थी 22 हजार की निर्दोष भीड़. किसी के दिमाग में हत्या करने का ख्याल न आए, ये सुनिश्चित करना मुमकिन नहीं है. लेकिन किसी अस्थिर व्यक्ति या संभावित हत्यारे के हाथ हथियार न आए, इसे सुनिश्चित करना मुमकिन है. ऐसी जगहों पर गन कंट्रोल अहम साबित होता है.
हमले के बाद बचकर बाहर भागने में कामयाब लड़की.
हमले के बाद बचकर बाहर भागने में कामयाब लड़की.

कुछ आंकड़े हैं. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन के. इन पर गौर करना जरूरी है:
  • अमेरिका में लगभग 89 पर्सेंट लोगों के पास बंदूक है.
  • 50 साल में करीब 15 लाख हत्याएं हो चुकी हैं.
  • इनमें पांच लाख हत्याएं मास शूटिंग/मर्डर्स हैं
  • बाकी गलती से चली गोलियां और आत्महत्याएं हैं.
  • औसतन 12 हजार मौतें सालाना होती हैं.

ट्रंप को गन लॉबी से मोटा चंदा लेने में परहेज नहीं है

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बहुत दुखी हैं. लास वेगस की घटना से. उन्होंने एक मिनट का मौन भी रखा. मृतकों की आत्मा की शांति के लिए. कहा, पूरा अमेरिका साथ है. ठीक है. दुख की बात है. मासूमों की हत्या का अफसोस बहुत भारी होता है लेकिन ट्रंप से एक सवाल तो बनता है. अपने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए उन्होंने नेशनल रायफल असोसिएशन से लाखों डॉलर का चंदा लिया था. ये संगठन अमेरिका की सबसे बड़ी गन-राइट लॉबी है. गन-राइट लॉबी बहुत पैसे वाली है. करीब 90 हजार करोड़ रुपए का सालाना बिजनेस है इनका. ज़ाहिर है, इनसे चंदा लेने वाले राष्ट्रपति के लिए इनके खिलाफ कार्रवाई कर पाना बहुत मुश्किल सी बात है. ट्रंप अकेले नहीं हैं. ऐसी लॉबियों के पैर बहुत दूर तक पसरे होते हैं. तभी तो इनका इतना प्रभाव होता है.
लास वेगास मास शूटिंग में मारे गए लोगों के लिए एक मिनट का मौन रखते राष्ट्रपति ट्रंर और वाइट हाउस प्रशासन के अधिकारी.
लास वेगास मास शूटिंग में मारे गए लोगों के लिए एक मिनट का मौन रखते राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस प्रशासन के अधिकारी.

गन कंट्रोल पर नीति तय नहीं हुई तो आगे भी होती रहेंगी ऐसी घटनाएं!

ट्रंप जब दुख जता रहे थे, तब एक बार भी गन कंट्रोल का जिक्र नहीं किया. एक बार भी नहीं. बाद में व्हाइट हाउस प्रवक्ता सारा सैंडर्स भी इस पर चुप रहीं. पूछा गया तो बोलीं कि गन कंट्रोल पर बहस के लिए ये मुनासिब मौका नहीं. इस पर बात करना बेहद जल्दबाजी होगी. ओबामा इस मुद्दे पर बेहद जज्बाती हो गए थे. ट्रंप ने ऐसी कोई भावना नहीं दिखाई. लगता तो नहीं कि इस बार भी अमेरिका गन कंट्रोल को लेकर संवेदनशील हो सकेगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो आगे भी इस तरह की घटनाओं की आशंका बची रहेगी. बीमारी का इलाज किए बीमारी खत्म हो जाने की उम्मीद करना, मूर्खता ही तो कहलाएगी.
लास वेगास मास शूटिंग में मारे गए लोगों के प्रति शोक जताते हुए वाइट हाउस के ऊपर फहरा रहे अमेरिकी झंडे को आधा झुका दिया गया.
लास वेगास मास शूटिंग में मारे गए लोगों के प्रति शोक जताते हुए व्हाइट हाउस के ऊपर फहरा रहे अमेरिकी झंडे को आधा झुका दिया गया.

आतंकी घटना हो या नहीं, खौफनाक अपराध तो है ही

एक शब्द से क्या फर्क पड़ता है? लास वेगस में जो हुआ, वो खौफनाक तो है ही. मासूम लोग मारे गए. इतनी बड़ी संख्या में. जो मर गए, वो बेबात मरे. उन्हें कभी मालूम नहीं चलेगा कि उनका अपराध क्या था? क्यों उन्हें मार डाला गया? उनके रिश्तेदार और दोस्त अब इन सवालों का पीछा करेंगे. हम भी इसका जवाब जानना चाहते हैं. ऐसा क्या था स्टीवन पेडॉक के अतीत में कि वो इतने जघन्य हत्याकांड को अंजाम दे गया? एक इंसान दिमागी/भावनात्मक तौर पर अस्थिर हो जाए तो इतना क्रूर हो जाता है? ऐसे तो कई टूटे-परेशान इंसान हमारे इर्द-गिर्द जीते हैं. तो क्या हर कोई संभावित हत्यारा है? कई सवाल हैं, जो परेशान कर रहे हैं. इनका जवाब फिलहाल नहीं है. बस एक कहावत याद आ रही है. ताला बस इसलिए नहीं लगाते कि चोरी न हो. ताला इसलिए भी लगाते हैं कि कोई शरीफ चोर न बन जाए.
घटनास्थल के बाहर मृतकों की याद में रखे गए गुलाब के फूल.
घटनास्थल के बाहर मृतकों की याद में रखे गए गुलाब के फूल.



*हालांकि ISIS ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है, लेकिन FBI फिलहाल इसे बोगस मान रही है. वजह? ISIS पहले भी कई मौकों पर झूठी जिम्मेदारी ले चुका है. खुद का भौकाल बनाने की खातिर. जांच एजेंसियां उसके इस दावे को भी झूठ मानकर चल रही हैं.
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