ओसियां तहसील में एक गांव है भेड़. यहां हनुमान साईं नाम का नौजवान था. पुलिस की हिस्ट्रीशीट में उसका नाम काफी वक़्त से था. प्रसिद्ध भंवरी देवी हत्याकांड में दो आरोपियों कैलाश जाखड़ और विशनाराम को भगाने के लिए कोर्ट परिसर में गोलीबारी हुई थी. हनुमान उसी गोलीबारी के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़ गया था. अपराध से पुराना जुड़ाव हनुमान राम को शराब के धंधे की तरफ लेकर गया. उसने पास ही के गांव लोड़ता के रहने वाले दलपत सिंह के साथ मिलकर अवैध शराब का कारोबार शुरू किया.

हनुमान साईं अपने परिवार के साथ
अपराध की दुनिया में अक्सर शुरुआती साझेदारियां बाद में जाकर दुश्मनी में बदल जाती हैं. हनुमान और दलपत के मामले में भी कहानी अलहदा नहीं थी. दोनों में धंधे के एरिया को लेकर विवाद शुरू हो गया. कई बार दोनों के बीच गोलीबारी की भी नौबत आ गई थी. पिछले साल 2017 में 1 अगस्त के रोज हनुमान ने एक बार फिर दलपत सिंह पर हमला कर दिया. इस हमले में एक युवक को गोली लग गई थी. दोनों गुटों में कई दफा गोलीबारी हो चुकी थी. हनुमान इस मामले में नामजद आरोपी था और उसे जेल की हवा भी खानी पड़ी थी.
14 जनवरी को मकर सक्रांति के रोज हनुमान ने एक बार फिर से अपने विरोधी दलपत सिंह पर हमला कर दिया. इस दौरान हुई गोलीबारी में एक गोली दलपत को भी लग गई. उसे पास ही के कस्बे देचू में एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया. उसे भर्ती करवाने गए उसके गुट के कुछ सदस्य उसे अस्पताल पहुंचाकर बदला लेने निकल पड़े.

सामराऊ सामान लेने आए हनुमान साईं की गाड़ी को टक्कर मारकर उसे घेर लिया गया.
इधर हनुमान अपने गांव पहुंचा. त्यौहार का दिन था. उसके ससुर अपनी बेटी से मिलने उसके घर आए थे. राजस्थान में मकर संक्रांति के रोज दाल के पकौड़े बनाने की रवायत है. घर जाकर उसे पता लगा कि शाम की दावत के लिए बाजार से कुछ सामान लाना होगा. हनुमान यही सामान लेने के लिए पास ही के गांव सामराऊ के लिए निकला.
सामराऊ के लोहावट चौराहे पर कुछ लोग उसके इंतजार में पहले से खड़े थे. जैसे ही हनुमान सामराऊ पहुंचा, इन लोगों ने उसकी स्कार्पियो गाड़ी को सामने से टक्कर मारी. प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि गाड़ियों की टक्कर के बाद दोनों गुटों में गोलीबारी शुरू हो गई. इस दौरान हनुमान के पास कारतूस खत्म हो गए. मौत को करीब देख हनुमान ने मौके से भागने का फैसला किया. वो गाड़ी से उतरा और खुले मैदान में दौड़ लगा दी.

हनुमान साईं: एक हिस्ट्रीशीटर जिसकी हत्या ने जातीय संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी है
हमलवार उसके पीछे गाड़ी दौड़ा रहे थे. वो कई गाड़ियों और पुख्ता तैयारी के साथ आए थे. उन्होंने अपनी गाड़ियों को थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खड़ा कर रखा था. हनुमान एक गाड़ी को चकमा देता तो दूसरी गाड़ी उसका पीछा करने लगती. हनुमान 200 मीटर की दौड़ पूरी करके पीएचईडी कॉलोनी की चारदीवारी तक पहुंचा. वो चारदीवारी फांदकर दूसरी पार से बच निकलना चाहता था. चश्मदीदों का कहना है कि दीवार फांदने की कोशिश के दौरान ही उसे पीछे से गोली मार दी गई. इसके बाद उसे घेरकर उसे वाहनों से कुचल दिया गया.
बुनियादी तौर पर यह दो आपराधिक गुटों के बीच की रंजिश थी. अपने एक साथी पर हुए हमले से गुस्साए एक गुट ने दूसरे गुट के एक आदमी की हत्या कर दी. खुलेआम हुए इस गैंगवार ने आसपास की जनता को सकते में डाल दिया. गुस्साए लोगों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सामराऊ चौराहे पर मौजूद शराब के ठेके पर आग लगा दी. पास ही की एक ढाणी और पांच दुकानें भी आगजनी का शिकार हो गईं.

सामराऊ में आगजनी का शिकार घर (फोटो: दैनिक भास्कर)
हनुमान के परिजनों ने मामले की जांच करवाने की मांग को लेकर शव उठाने से मना कर दिया और लोहावट सामराऊ रोड पर जाम लगा दिया गया. दूसरे दिन सुबह सोशल मीडिया के जरिए लोगों के पास खबर पहुंचनी शुरू हुई. सुबह करीब 11 बजे प्रदेश कांग्रेस कमिटी की सदस्य दिव्या मदेरणा भी मौके पर पहुंचकर धरने पर बैठ गईं. दिव्या महिपाल मदेरणा की बेटी हैं. उनके दादा परसराम मदेरणा और पिता महिपाल मदेरणा इस ओसियां सीट से विधायक रह चुके थे.
शाम तकरीबन चार बजे खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल भी मौके पर पहुंच गए. वो इस इलाके के उभरते हुए जाट नेता हैं. धरने पर पहुंचे हनुमान बेनीवाल ने मंच से चढ़कर भाषण देना शुरू किया-
"हनुमान साईं की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वो किसान का बेटा था, तेजा जी का भक्त था. कुछ सामंती लोगों को यह अड़चन थी कि हनुमान साईं का मुंह बंद कर दो, इस इलाके के अंदर कहर बरप जाएगा. आपने देखा होगा पिछले चार साल के अंदर किस तरह से किसान के बेटों की हत्याएं हुई. जिस तरह किसानों ने वोट देकर इस सत्तर जात वाली वसुंधरा को मुख्यमंत्री बनाया और आखिरी के साल में जाकर वसुंधरा ने अपनी जात दिखा दी.
मैं तो यहां तक कहूंगा कि अगर आनंदपाल के मामले में उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए तो उसको फरार करवाने से लेकर संरक्षण देने में राज्य सरकार के तीन-तीन मंत्रियों की भूमिका सामने आएगी. किस तरह उस अपराधी ने किसान के बेटों की हत्याएं करके पूरे राज्य में कोहराम मचा दिया था. इतना होने के बावजूद लोग उसके समर्थन में सड़कों पर उतर गए. लोगों ने यह भी नहीं सोचा कि जिस अपराधी ने प्रत्येक जाति के लोगों की हत्याएं की, लोग उसके बचाव में भी सड़कों पर आ गए. मुझे तो अचम्भा होता है कि जातियों के अंदर लोग इस कदर बंट चुके हैं कि सही-गलत की भी पहचान नहीं, न्याय-अन्याय की भी पहचान नहीं."

हनुमान बेनीवाल फिलहाल नागौर की खींवसर विधानसभा से विधायक हैं.
हनुमान बेनीवाल इस इलाके के लोकप्रिय नेता हैं. 1998 से लेकर 2008 के बीच का दौर उनके लिए अब तक का सबसे कठिन दौर रहा है. 1998 में उनके पिता रामदेव चौधरी के देहांत के बाद टिकट मिलने के बावजूद वो पर्चा भरने में लेट हो जाए और उनका नामांकन ख़ारिज हो गया. 2003 में वो अपनी परंपरागत सीट मुंडवा से इनलो के टिकट पर चुनाव लड़े और हार गए. 2006 में उन्होंने ऐसे ही एक हत्याकांड के जरिए खुद को नेता के तौर पर स्थापित किया. मामला डीडवाना के हिस्ट्रीशीटर जीवनराम गोदारा हत्याकांड का था. उस अपराध का आरोप लगा कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल और उसके साथी बलवीर बानुड़ा पर. हनुमान बेनीवाल ने इस मामले को बड़े जोर-शोर से उठाया. जल्द ही मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया और दो अपराधी गैंग्स के बीच का झगड़ा जाट बनाम राजपूत के जातीय संघर्ष में तब्दील हो गया.
12 साल बाद सामराऊ भी उसी मोड़ पर खड़ा है. सूबे में राजपूतों की झंडाबदार बनी करणी सेना के लोग सामराऊ में दिए गए हनुमान बेनीवाल के भाषण के एक ख़ास हिस्से को काटकर वायरल करने में लगे हैं. इस वायरल क्लिप में हनुमान बेनीवाल कह रहे हैं-
"तो एक बार वार्ता के लिए बात करें? क्या मूड है? या और कहीं धुवां निकलना है? तो फिर माफ़ करो आराम से और थोड़ी देर के लिए सुन लो. हमारी उपस्थिति में तो गड़बड़ मत करना कम से कम. नहीं तो ये लगेगा कि ये गड़बड़ करवाने के लिए आ गए. इतनी इज्जत तो रखोगे ना हमारी?"

आग की चपेट में आया सवाई सिंह का रावला
हनुमान बेनीवाल सामराऊ में हुए आगजनी के मामले के संदर्भ में 'धुवां निकलना है' शब्द का प्रयोग कर रहे थे. करणी सेना के लोग इसे उकसावा करार दे रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि भाषण सामराऊ में आगजनी होने के बाद का है. दी लल्लनटॉप से बातचीत करते हुए वो सफाई देते हैं कि वो मामले को शांत करवा रहे थे. उनका कहना है कि वो मंच पर सरेआम इस आगजनी की निंदा कर चुके हैं.
हनुमान साईं की हत्या के अगले दिन माने 15 जनवरी के रोज सुबह से लोग सामराऊ गांव में जुटने लगे. ये लोग हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे. इस सिलसिले में प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच शांति वार्ता भी चल रही थी. शाम करीब चार बजे यह वार्ता विफल हो गई और लोग आगजनी पर उतर आए. इस आगजनी का शिकार हुए ज्यादातर घर राजपूत परिवारों के हैं.

आगजनी के बाद सकते में है परबत सिंह का परिवार (फोटो: दैनिक भास्कर )
इस सामराऊ गांव के परबत सिंह की बेटी की 6 फरवरी को शादी होने जा रही है. शादी की खरीदारी करने के लिए परिवार के लोग जोधपुर गए हुए थे. इधर गांव में शाम करीब चार बजे शांति वार्ता के असफल होने के बाद करीब 700 से 800 प्रदर्शनकारियों ने हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिए. परबत सिंह का घर भी इसी आगजनी की चपेट में आ गया. उसके घर में रखी 80 तोला चांदी, सात तोला सोना और 35 हजार रुपये लूट लिए गए. दहेज़ के लिए खरीदी गई एक बाइक, टीवी, फ्रिज और कपड़े भी आग के हवाले कर दिए गए. यही वाकया किशन सिंह के साथ पेश आया. उनके घर में उनका और उनके तीन भाइयों का करीब 100 तोला सोना, डेढ़ किलो चांदी और करीब डेढ़ लाख रुपये लूट लिए गए. घर को आग लगा दी गई.
सामराऊ बाजार में अभय सिंह की कपड़े की दुकान है. डेढ़ साल पहले अपनी जमीन बेचकर उसने यह दुकान शुरू की थी. उपद्रवियों ने इस दुकान में पड़ा सारा माल और फर्नीचर जला डाला. दुकान की नकदी लूट ली. गांव में सवाई सिंह के रावले को आग के हवाले कर दिया गया. करमसोत की ढाणी में गोपसिंह के दो झोपड़ों को फूंक डाला. भैरो सिंह की ढाणी को भी उपद्रवियों ने नहीं बख्शा.

ये आग तो बुझ गई है, लेकिन जातीय तनाव अब भी धधक रहा है.
लाचार वृद्ध करण सिंह के घर पर जब हमला हुआ, उस समय वो चारपाई पर लेटे थे. पीछे की खिड़की में आग लगाए जाने के बाद वो किसी तरह घिसटते हुए घर से बाहर निकले. आगजनी होने के बाद लोग घर छोड़कर खेतों में भाग गए. कई परिवारों ने ठंड में ठिठुरते हुए पूरी रात बिताई. सुबह जब घर लौटे तब तक सबकुछ तबाह हो चुका था.
शाम ढले करीब 8.30 पर खबर आई कि हनुमान साईं की हत्या के मुख्य आरोपी और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. इसके बाद सामराऊ में हत्या का विरोध करने आए हुए लोग बिखरने शुरू हुए. पूरी रात गांव में भय और हिंसा का माहौल बना रहा. इस पूरी आगजनी में राजपूत समाज के लोगों के घरों को ही निशाना बनाया गया. आगजनी ने पूरे मामले को जातीय मोड़ दे दिया.
करणी सेना का महासंग्राम
इस घटना के एक दिन बाद 17 जनवरी को राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने अपने पेज से फेसबुक लाइव किया. इस लाइव में वो 'चीर देंगे-फाड़ देंगे' के अंदाज में 21 जनवरी के रोज सामराऊ में महासंग्राम के लिए राजपूत युवकों से जुटने का आह्वान कर रहे हैं. 18 मिनट लंबा यह फेसबुक लाइव भी काफी वायरल हो रहा है.

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी
राजस्थान में इसी साल अंत में चुनाव होने हैं. राजनीतिक दलों के नेता इस मामले में पीछे नहीं छूटना चाहते हैं. जोधपुर के दौरे पर आए बाड़मेर के बीजेपी सांसद कर्नल सोनाराम पत्रकारों के सामने यह कहते हुए पाए गए कि अगर करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव गोगामेड़ी सामराऊ आते हैं तो खून-खराबा हो जाएगा.
पिछले एक साल में यह दूसरा मौक़ा है जब कोई अपराधी अपनी जाति का गौरव बन गया. एक अपराधी की मौत जातीय संघर्ष का अखाड़ा बन गई. सिर पर खड़े चुनावी हालात इसे और ज्यादा बेकाबू कर रहे हैं. इस बीच तेजी से चरमराता सामाजिक ढांचा है, जिस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है.
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