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जोशीमठ में मुआवजा तय नहीं हुआ, फिर भी लोगों को प्रदर्शन खत्म क्यों करना पड़ा?

मुआवज़े के बद्रीनाथ बनाम उत्तरकाशी मॉडल पर क्या पेच फंसा हुआ है?

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बाएं से दाएं: धरना दे रही महिलाएं और सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (फोटो - PTI)

जोशीमठ (Joshimath) में इमारतों की तोड़-फोड़ शुरू हो गई है. सबसे पहले होटल मल्लारी-इन को गिराया जा रहा है. हमने इस मामले में दोनों पक्षों से बात की. नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह पंवार का कहना है कि मुआवज़ा तय हो गया है. हालांकि, मल्लारी-इन के मालिक ठाकुर सिंह राणा का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया.

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फिर मुआवज़े के लिए धरना दे रहे लोगों ने विरोध प्रदर्शन क्यों ख़त्म कर दिया? और, प्रदर्शनकारियों की मांग क्या थी?

विरोध क्यों खत्म हुआ?

जोशीमठ में हर दिन प्रभावित इमारतों और परिवारों की गिनती बढ़ती जा रही है. 10 जनवरी तक के मुआयने में 678 इमारतों में दरारें थीं. ये आंकड़ा बढ़कर 725 हो गया है. इनमें से 86 ऐसे घर हैं, जिन्हें प्रशासन ने 'असुरक्षित' घोषित कर दिया है. लाल निशान लगा दिया है. असुरक्षित इमारतें दूसरे घरों के लिए ख़तरा हो सकती हैं, तो प्रशासन उन्हें जल्द से जल्द गिरा देना चाहता है. वैसे तो ये काम 10 जनवरी को शुरू हो जाना था, लेकिन जैसे ही प्रशासन ने भसक रहे होटलों को गिराने की तैयारी शुरू की, होटल मालिक और स्थानीय नागरिक धरने पर बैठ गए. 12 जनवरी की सुबह तक निवासियों ने जोशीमठ में धरना दिया.

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होटल मल्लारी-इन और होटल माउंट व्यू एक-दूसरे की तरफ़ झुक रहे हैं (फोटो - इंडिया टुडे)

होटस मल्लारी-इन के मालिक का कहना था कि वो होटल ढहाने को विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन पहले प्रशासन उनका मुआवज़ा तय कर दे. धरने पर बैठे एक प्रदर्शनकारी ने इंडिया टुडे के अमित भारद्वाज को बताया था,

"प्रशासन पहले हमसे बात करता है कि हम आपके घर-ज़मीन तब तक नहीं तोड़ेंगे, जब तक आपके पूरे मुआवज़े की बात न हो जाए. और, बात करने के बाद प्रशासन ने पूरी फ़ोर्स भेज दी. सारे घरों की लाइट काट दी. उनका प्लान था कि वो रात के अंधेरे में इमारतें तोड़ दें. ये सरकार और प्रशासन की गुंडागर्दी है. पहले हमें मुआवज़ा दीजिए. बद्रीनाथ की तरह ही हमारा पुनर्वास करिए. उसके बाद आप तोड़िए; कोई बात नहीं."

मुआवज़े पर असहमति को सुलझाने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने प्रदर्शनकारियों के साथ बैठक की. प्रदर्शनकारियों ने बद्रीनाथ मॉडल पर मुआवज़ा देने की बात कही, लेकिन मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि बद्रीनाथ की तरह मुआवज़ा देना मुमकिन नहीं है. उत्तरकाशी की तर्ज़ पर मुआवज़ा दिया जा सकता है.

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बद्रीनाथ और उत्तरकाशी के मुआवज़े में फ़र्क़ क्या है?

उत्तराखंड में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे गजेंद्र रौतेला से हमने बीत की. गजेंद्र ने हमें बताया कि उत्तरकाशी में मुआवज़े की नौबत क्यों आई? उन्होंने बताया,

"उत्तरकाशी जिस पहाड़ की तलहटी में है, 2003-04 में उस पहाड़ में दरारें आने लगीं. छोटे-बड़े पत्थर टूट-टूट कर बसावट पर गिरने लगे. तब सरकार ने उत्तरकाशी के निवासियों को दूसरी जगह शिफ़्ट होने के लिए मुआवज़ा दिया था. लेकिन ये केस जोशीमठ से अलग है. उत्तरकाशी पुनर्वासन में पर्याप्त समय मिला था. अगले तीन-चार सालों तक लोगों ने आस-पास की जगहों पर नई ज़मीनें ख़रीदीं, नए घर बनाए. 

मैंने प्रभावित लोगों से बात भी की है. उन्होंने मुझे बताया कि सरकार ने उन्हें मुआवज़ा देने में बहुत परेशान किया था. कितने ही धरने दिए. कभी ज़िला अधिकारी के कार्यालय के सामने, कभी नगर पालिका के दफ़्तर के सामने. तब जाकर सात साल बाद मुआवज़ा दिया गया. और, उनकी ग़लती क्या थी? कि उन्होंने प्रशासन के वादे को लिखित में नहीं लिया था."

अब बात है कि मुआवज़ा मिला किस आधार पर? हर इलाक़े में सर्कल रेट होता है. माने सरकारी रिकॉर्ड में उस ज़मीन की क़ीमत. जैसे, आज के समय में जोशीमठ का सर्कल रेट है- 5 लाख 94 हज़ार, प्रति नाली. पहाड़ में बीघा और कट्ठे के हिसाब से नहीं, नाली के हिसाब से मापा जाता है. एक नाली बराबर 2,160 वर्ग फ़ीट या 200 वर्ग मीटर.

उत्तर काशी में सरकार ने बाज़ार भाव पर मुआवज़ा दिया था. लेकिन सर्कल रेट को ही आधार माना था.

बद्रीनाथ में मामला अलग था

बद्रीनाथ में सौंदर्यीकरण मास्टर प्लैन लाया गया. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा गया. मास्टर प्लैन में उन स्ट्रक्चर्स की पहचान की जा रही है, जिन्हें हटाया जा सकता है या ट्रांसफर किया जा सकता है ताकि तीर्थयात्रियों के लिए जगह को और खुला-खुला बनाया जाए और बद्रीनाथ को पर्यटन के लिए बेहतर बनाया जाए.

जब बद्रीनाथ में मास्टर-प्लैन लागू हुआ, तो मुआवज़े का काम अलग ही तरह से हुआ. बद्रीनाथ में सर्कल रेट था 13 लाख रुपये प्रति 200 वर्ग मीटर. मास्टर प्लान लागू हुआ, तो क़ीमतें बढ़ीं और सर्कल रेट 30 से 32 लाख प्रति 200 वर्ग मीटर पर चढ़ गया. एक तो क़ीमतें बढ़ीं और ऊपर से जब सरकार ने यहां अधिग्रहण किया, तब सर्कल रेट को पांच गुना बढ़ाकर मुआवज़ा दिया. माने 200 वर्ग मीटर के लिए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक का मुआवज़ा मिला.

बद्रीनाथ मास्टर प्लैन के पहले फेज पर काम चल रहा है. ये संभावित ढांचे की तस्वीर है, जो inidesignstudio वेबसाइट से ली गई है.

साफ़ दिख ही रहा है कि बद्रीनाथ वाली डील लोगों के लिए बेहतर है, लेकिन जोशीमठ में प्रशासन बद्रीनाथ की तर्ज़ पर मुआवज़ा देने के लिए माना नहीं.

ख़बर के लिखे जाने तक प्रशासन का यही मत है कि लोगों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा. सभी स्टेक-होल्डर्स से मशवरा कर के 'उचित मुआवज़ा' दिया जाएगा. कुछ भी लिखित नहीं है, लेकिन जब हमने जोशीमठ के नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह पंवार से बात की, तो उन्होंने हमें सरकार के प्रस्ताव के बारे में बताया है. शैलेंद्र ने कहा,

"मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है. इसमें सभी नौ वॉर्ड्स के मेंबर हैं, नगर पालिका अध्यक्ष हैं, स्थानीय विधायक हैं, ज़िला प्रशासन के अधिकारी हैं. अभी जो तय हुआ है, वो यही है कि होटल और भवन जैसे कमर्शियल प्रॉपर्टीज़ का मुआवज़ा CPWD के रेट पर तय होगा. CPWD के रेट को कार्पेट एरिया से गुणा कर के मुआवज़ा निकाला जाएगा. और, रिहाइशी ज़मीनों के मुआवज़े पर बात चल रही है. प्रशासन का प्रस्ताव ये है कि प्रचलित मार्केट रेट के हिसाब से लोगों को मुआवज़ा दे दिया जाए."

शैलेंद्र ने हमें ये भी बताया कि ये जानकारी प्रदर्शनकारियों को दे दी गई है और निवासी भी इस प्रस्ताव से संतुष्ट हैं, क्योंकि उन्हें वन-टाइम सेटलमेंट मिल जाएगा. लेकिन जब हमने मल्लारी-इन होटल के मालिक ठाकुर सिंह राणा से बात की, तो उन्होंने इस बात से इनकार किया. कहा कि उन्हें इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है. CPWD रेट पर मुआवज़े की बात उन्होंने भी बस सुनी है. सरकार या प्रशासन की तरफ़ से उन्हें कोई सफ़ाई नहीं मिली है. न लिखित में, न मौखिक में. फिर उन्होंने धरना क्यों ख़त्म किया? उन्होंने बताया,

"दरारें लगातार बढ़ रही हैं. हमारे होटल के पीछे दस-एक घर हैं. अगर मेरा होटल गिरने लगे, तो उनकी प्रॉपर्टी को डैमेज करेगा. इसीलिए हमने धरना ख़त्म कर दिया, ताकि होटल को गिराया जाए. हमें सरकार की तरफ़ से मुआवज़े के बारे में कुछ नहीं बताया गया है. लोगों को ख़तरा न हो, इसलिए हमने अपना दिल छोटा कर लिया." 

हालांकि, उत्तराखंड सरकार ने प्रभावितों को प्रति परिवार के हिसाब से डेढ़ लाख रुपये की अंतरिम राहत देने का ऐलान किया है. दूसरे परिवार जो परेशानी झेल रहे हैं, उन्हें पचास-पचास हज़ार रुपये दिए जाएंगे.

अभी बहुत साफ़ नहीं है कि जोशीमठ के निवासियों को किस मॉडल की तर्ज़ पर मुआवजा दिया जाएगा. बद्रीनाथ मॉडल पर, उत्तरकाशी मॉडल पर या इस नए प्रस्तावित मॉडल पर?

वीडियो: जोशीमठ के पास एक और इलाके के घरों मे पड़ने लगीं दरारें, ये प्रोजेक्ट है वजह

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