सर्च करोगे तो इनमें टॉप पर मिलेगी 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स'. ऑस्कर अवार्ड भी झटक चुकी है ये फिल्म. सयानों ने बताया कि देखो तो देख ही डालो. लेकिन नहा धो कर, खा पीकर बैठना. बीच में उठ न पाओगे. हम कहे अखंड रामायण का पाठ है क्या. फिर ज्यादा कंट्रोल नहीं हुआ. देख डाली बस. देखने के बाद लगा कि हां भाईसाब कोई फिल्म थी. एक हफ्ता तो फिल्म के सीन आंखों के सामने डोलते रहे. ऐसी होनी चाहिए वॉर फिल्म.
फिर दिमाग में आया इतना गज्जब किस्सा लिखिस कौन. फिर पता चला कि लिखने वाले जनाब तो 1973 में दुनिया से जा चुके हैं. नाम है जॉन टॉलकीन. वह ये पूरी सीरीज बहुत साल पहले लिख गए हैं. बताते हैं उनके बारे में:
टॉलकीन का पूरा नाम था जॉन रोनाल्ड रुएल टॉलकीन. 3 जनवरी 1892 को धरती पर अवतरित हुए. पापा ऑर्थर बैंक में मैनेजर थे. 3 साल के थे जब पापा की डेथ हो गई. मम्मी ने देखभाल के लिए भेज दिया ननिहाल. 12 की उम्र में बेचारी मां भी डायबिटीज से चल बसी.

1911 में ऐसे दिखते थे
भाषाओं से खेलने का शौक बचपन से था. कम उम्र में ही दोस्तों के साथ मिलकर नई भाषा बनाई न्यूबॉश. जब 16 साल के थे तो एक हसीना से मुलाकात हुई, नाम था जिसका एडिथ मैरी ब्राट. दोनों में हो गया प्यार. प्यार की दुश्मन दुनिया तो सदा से है. उनके गार्जियन थे उस वक्त फादर मोर्गन. मिलने और खत लिखने पर पहरे बिठा दिए. उधर मैरी की शादी किसी और लड़के से तय हो गई.लेकिन इश्क पर किसका जोर चला है. तमाम उठापटक के बीच सबकी चिल्ल पों को ताक पर रखा. मार्च 1916 में शादी कर ली.
ये तो रही उनकी पर्सनल लाइफ. प्रोफेशनल लाइफ में टॉलकीन 13 खाना वाली रिंच थे. मने मल्टीमीडिया आदमी. कई विधाओं के लेखक, कई भाषाएं जानने और गढ़ने वाले, यहां तक कि फौजी भी. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में इंग्लिश भाषा और साहित्य के प्रोफेसर भी रहे. इतना सोच कर ही अपनी सांस फूल जाती है भाई.
पूरी जिंदगी लिखने पढ़ने में गुजरी. लिखने की एक नई लाइन तैयार की. जिसको कहते हैं लिजेंडरियम. माइथोलॉजी लिखने का बेहतरीन तरीका. इसी तरीके से 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' लिखी. 'द बुक ऑफ लोस्ट टेल्स' इसी का नमूना है. एक फंतासी की दुनिया रची जिसका नाम है मिडिल अर्थ. इसी मिडिल अर्थ की लड़ाई दिखाई गई है लॉर्ड ऑफ द रिंग्स में.
लेकिन लिखने पढ़ने में इत्ते बिजी रहे कि अपना लिखा ही पूरा छपवा नहीं पाए. 28 मार्च 1972 को फानी दुनिया से कूच कर गए. उनकी मौत के बाद बेटे क्रिस्टोफर ने विरासत संभाली. उनका सब लिखा हुआ इकट्ठा कर के धड़ाधड़ छाप दिया. तब कहीं जाकर उसी स्क्रिप्ट पर ये धांसू फिल्में देखने को मिल रही हैं.

























