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क्या अनुराग कश्यप खुद श्रवण सिंह उर्फ़ मुक्काबाज़ हैं?

'मुक्काबाज़' श्रवण उर्फ़ अनुराग के जीवन पर आंशिक रूप से आधारित है.

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फोटो - thelallantop

'मुक्काबाज़' श्रवण उर्फ़ अनुराग के जीवन पर आंशिक रूप से आधारित है. मुक्केबाज़ी उर्फ़ फिल्ममेकिंग उसका पैशन है, जो उसके पिता उर्फ़ कुछ रिव्यूअर्स को उसका फैशन सुनाई देता है.

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डायलॉग का मुक्का वो बढ़िया भांजता है और सिर्फ़ रिंग में ही नहीं भांजता, बाहर भी भांज लेता है. कभी-कभी पैसे के लिए मुक्का मार के पांच ईंटा उर्फ़ टीवी-एड फ़ॉर्मेट भी तोड़ लेता है. वो ख़ुद को हिंदी सिनेमा का माइक टायसन उर्फ़ क्वेंटिन टैरेंटिनो कहता है. उसकी ज़िंदगी में भगवान दास मिश्राओं उर्फ़ मसाला दास मेकर्स की भी कमी नहीं है, जिन्हें ये गुरूर है कि वो फिल्मों के ब्राम्हण हैं. मसाला दास मेकर्स ने सिनेमा के पूरे सिस्टम को करप्ट कर रखा है.


मोमबत्तियां बुझाते अनुराग और उनकी पीठ पर हाथ रखे टेरेंटीनो
मोमबत्तियां बुझाते अनुराग और उनकी पीठ पर हाथ रखे टेरेंटीनो

उन्हीं मसाला दास मेकर्स की रिश्तेदार है सुनैना उर्फ़ ऑडिएंस. जिसके वो बाप तो हैं नहीं, लेकिन उस पर हक बाप से ज़्यादा जताते हैं. अनुराग को पहली नज़र में ऑडिएंस से मोहब्बत हो जाती है और उसे प्रभावित करने के लिए वो मसाला दास मेकर्स से भिड़ लेता है. बैकग्राउंड में "बहुत हुआ सम्मान" गूंज उठता है. अनुराग, मसाला दास मेकर्स को गरम दिमाग़ में मेनस्ट्रीम फ़िल्म का एक मुक्का उर्फ़ बॉम्बे वेलवेट मारता है, लेकिन उल्टा इतना पिट जाता है कि कोई दूसरा तो रिंग में उतरना ही भूल जाए, लेकिन प्रेमी अनुराग हार नहीं मानता. अब होता यह है कि मेनस्ट्रीम फ़िल्ममेकिंग की रिंग में उसे उतरने ही नहीं दिया जाता.

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फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' की टीम: अनुराग कश्यप, अनुष्का शर्मा, रणबीर कपूर और करण जौहर (बाएं से दाएं)
फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' की टीम: अनुराग कश्यप, अनुष्का शर्मा, रणबीर कपूर और करण जौहर (बाएं से दाएं)

ऑडिएंस, जो बोल नहीं सकती है, इशारे में उससे प्रेम का इज़हार करती है. वो अनुराग से कहती है कि वो हिट फ़िल्में देना शुरू कर दे, नहीं तो मसाला दास मेकर्स उसे किसी घटिया कंटेंट की जागीर बना देंगे. वो अच्छी हिट फ़िल्मों के साथ रहके और प्रोग्रेसिव होना चाहती है. अनुराग उसे देखता है और बैकग्राउंड में "मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये" बजने लगता है.

अनुराग, हिट फ़िल्म बनाना चाहता है, लेकिन उसे लगातार अनफ़िट बोलकर रिंग से बाहर रखा जाता है. इस दौरान वो बीच-बीच में मसाला दास मेकर्स से छोटी-छोटी भिड़ंत में, "हाथापाई" के ध्वनि प्रसारण के साथ, दिल से छोटी-छोटी फ़िल्मों के मुक्के भांजता रहता है, जिसमें वो ज़रा सा मारता है और ज़रा सा पिटता है.


एक ऐड में अनुराग कश्यप
एक ऐड में अनुराग कश्यप

मसाला दास मेकर्स की योजना अनुसार ऑडिएंस, अनुराग से दूर होती चली जाती है और दोनों के मन में "बहुत दुखा रे बहुत दुखा मन" घुलने लगता है.

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अब अनुराग कुछ समय के लिए अपना घर बरेली उर्फ़ फैंटम छोड़कर बनारस उर्फ़ कलर यलो का रुख करता है, जहां के एक पुराने मुक्केबाज़ संजय कुमार उर्फ़ आनंद एल. राय उसका टैलेंट पहचानते हैं. उन्हें यकीन है कि अनुराग एक अच्छा मेनस्ट्रीम फ़िल्ममेकर बन सकता है. वो अनुराग को नेशनल लेवल प्रतियोगिता उर्फ़ मेनस्ट्रीम लव स्टोरी बनाने का ऑफ़र देते हैं, लेकिन उससे पहले अनुराग को सफ़लता के पिता बॉक्स ऑफ़िस को मनाने के लिए, स्टेट लेवल जीतकर एक स्टेबल करियर बनाना है. आनंद बाबू, अनुराग की इस काम मे पूरी मदद करने की ठान लेते हैं और मेहनत की पृष्ठभूमि में धीमे से संगीत फ़ेड इन होता है. "तू खेल ले-खेल ले, ज़िंदगी का पैंतरा, सीख-सीख-सीख-सीख, ज़िंदगी का पैंतरा".


'रांझणा' और 'तनु वेड्स मनु' जैसी फिल्मों के डायरेक्टर और कलर यलो प्रॉडक्शन हाउस के संस्थापक आनंद एल रॉय और अनुराग कश्यप (दाएं से बाएं)
'रांझणा' और 'तनु वेड्स मनु' जैसी फिल्मों के डायरेक्टर और कलर यलो प्रॉडक्शन हाउस के संस्थापक आनंद एल रॉय और अनुराग कश्यप (दाएं से बाएं)

इस बीच मसाला दास मेकर्स, अपने एक प्रमुख मुक्केबाज़ उर्फ़ कालाकांडी को डोप के इंजेक्शन लगाके प्रतियोगिता में उतार देते हैं. आनंद बाबू, अनुराग को समझाते हैं कि लंबी रेस में थकाके तुम्हें इसे हराना होगा. आनंद बाबू की मदद से अनुराग, स्टेट लेवल प्रतियोगिता उर्फ़ मुक्काबाज़ फ़िल्म चलाने में सफ़लता पा लेता है. अनुराग और ऑडिएंस की गांठ जोड़ दी जाती है, लेकिन अभी अनुराग को उसकी भाषा सीखनी है और आनंद बाबू को अब भी अनुराग को मुक्काबाज़ से मुक्केबाज़ बनते हुए देखना है.


'मुक्काबाज़' की पूरी टीम. डायरेक्टर अनुराग कश्यप, प्रड्यूसर आनंद एल रॉय, एक्टर जिमी शेरगिल और रवि किशन (ऊपर खड़े हुए, बाएं से दाएं). लीड एक्टर ज़ोया हुसैन और विनीत सिंह (बैठे हुए).
'मुक्काबाज़' की पूरी टीम. डायरेक्टर अनुराग कश्यप, प्रड्यूसर आनंद एल रॉय, एक्टर जिमी शेरगिल और रवि किशन (ऊपर खड़े हुए, बाएं से दाएं). लीड एक्टर ज़ोया हुसैन और विनीत सिंह (बैठे हुए).

आगे क्या होता है, ये कहानी मैंने लिख रखी है, लेकिन मैं भी अनुराग की तरह इसे दो हिस्सों में फाड़कर इसका वासेपुर कर रहा हूं. सही वक्त आते ही वो हिस्सा भी रिलीज़ होगा.

(खेल चाहे जो भी हो, मेरा दिल हमेशा उस खेल के भगवान दास मिश्राओं के ख़िलाफ़ खड़े होने वाले श्रवणों और सुनैनाओं के साथ ही होगा. चाहे वो अभी मुक्काबाज़ से मुक्केबाज़ बनने की यात्रा में किसी भी पड़ाव पर क्यों न हों.)




ये आर्टिकल दी लल्लनटॉप के एक रीडर ने लिखा  है, जो अपना नाम ज़ाहिर नहीं करना चाहते. आप अपनी राय हमें कॉमेंट बॉक्स में बता सकते हैं.


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