खोड़िये में जाना बड़ा मजेदार होता था. हम अपनी मांओं को गंदी बातें करते हुए सुनते. बुआओं को लय में लय मिलाते हुए सुनते. जो बातें वो हमेशा मना करती हैं. वो बातें वो उस रात करतीं. और मजाल कि कोई बुरा मान जाए.ये गंदी बात है या अच्छी बात. पता नहीं. पर तब ये 'गंदी' हुआ करती थी. क्योंकि मम्मी ने ऐसा ही समझाया था. हम लड़कियां शादी से पहले इन बातों से दूर रहेंगे. पर खोड़िया देखने जा सकती हैं. खोड़िये में कोई बुआ 'बंदड़ा' बन जाती और कोई चाची 'बंदड़ी'. और फिर जो बातें वो करतीं. राम-राम! ये वो बातें हैं जो वो मर्दों के सामने कभी नहीं बोल सकतीं. बोल दें तो तुरंत कैरेक्टर सर्टिफिकेट जारी हो जाए.
लेकिन यहां अपने जैसी तमाम औरतों के बीच वो जो मन चाहे कह सकती हैं. उसी कल्चर ने जो मर्दों की मौजूदगी में उनका शोषण करता है, इस वक्त उनकी गुलाम जेल में एक रौशनदान बना दिया है. इस रौशनदान से कूदकर उन्हें एक रात के लिए एक लिबरेटेड दुनिया में जाना है.
एक दो गीत तो अब तक याद हैं. सोचा कि सबको पढ़ना चाहिए इन 'एसेक्शुअल' लुगाइयों का स्टैंड:
गीत :"मेरे कब्जे कै नीचै-नीचै रंग बरसै, मेरो रंडवो जेठ खड़यो तरसै मत तरसै ओ जेठ भिवाय द्युंगी, तेरी सूनी सेज सजाय द्युंगी, मेरे दामण कै नीचै-नीचै रंग बरसै, मेरो रंडवो जेठ खड़यो तरसै मत तरसै ओ जेठ भिवाय द्युंगी , तेरी सूनी सेज सजा द्युंगी हरै एक गंडा और दो पोरी, जेठ तेरी सेज पै दो गोरी."कब्जे का मतलब ब्लाउज है, दामण का मतलब घाघरा है. इनके नीचे रंग बरस रहा है और दूर खड़ा जेठ तरस रहा है. वो सांत्वना दे रही है जेठ को कि टेंशन की जरुरत नहीं है, तुम्हारी सेज भी सजा दूंगी. उसकी शादी करवाने की बात कर रही है. एक सेज पर दो गोरियों की बात कर रही है. एक जो जेठ से शादी करके आएगी, दूसरी वो खुद. भाभी को मां और जेठ को पिता जैसे बोलने वाले ग्रामीण कल्चर में ये गाना क्या दर्शाता है? इस पर आप जरा ठहरकर सोचिए. खोड़िये में गा रही औरतें खुलकर सेक्स के बारे में जोक्स मार रही हैं. जेठ-देवरों से सेक्शुअल रिलेशनशिप की बातें कर रहीं हैं. एक कहती है पति फौज में रहते हैं सारा साल. दूसरी कहती है कि देवर कब काम आएगा. आदमियों के लिंग की बातें कर रही हैं. ये सब हमारे हरियाणे में हो रहा है, जो ज्यादा कंजर्वेटिव कहा जाता है. फिर तो खोड़िये से ज्यादा लिबरेटिंग कुछ हो नहीं सकता.
ऐसा नहीं है कि ये एक गांव के खोड़िये में गाया जाता है. हर गांव के खोड़िये में गाया जाता है. हिंदुस्तान के हर गांव में शादी की रात वाला संगीत ऐसा ही होता है. शब्द अलग होते हैं. उनके अर्थ नहीं.और ऐसा नहीं है कि ये सब गाने वाली औरतें गंदी होती हैं. उन औरतों में आपकी मां, चाची, ताई सब होती हैं.
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