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'मैडम आज तो माल लग रही हो, हैपी विमेंस डे'

घर से लेकर बाहर तक भेदभाव, छेड़खानी और गंभीर अपराधों की शिकार आधी आबादी को एक दिन दे दो.

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सरदार खान औरतों को जिस जुर्रत से अप्रोच करता था, वही मानसिकता बाकी पुरुषों की आज बनी हुई है. (फोटो साभारः निर्माता कंपनी वायाकॉम 18)
सुबह आंख खुली तो मोबाइल का इंटरनेट ऑन किया. पता चला कि रात से ही बधाइयों का लेन देन चालू है. नहीं, इंडिया मैच नहीं जीता, न किसी का बड्डे था. ये तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की गहमा गहमी थी. फेसबुक ट्विटर पर पुरुष महिलाओं को बधाई दे रहे हैं, महिलाएं महिलाओं को बधाई दे रही हैं. माहौल एकदम महिलामय बना हुआ है. एक जगह तो ये भी लिखा दिखा कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता." मन एकदम प्रफुल्लित हो गया. ऐसा लगा जैसे किसी नए ही ग्रह पर पहुंच गया हूं. हालांकि गाली खाने का डर था फिर भी मैंने एक गुजारिश की कि सभी महिलाएं पार्टी वार्टी करके शाम 6 बजे से पहले घर लौट आएं. क्योंकि उसके बाद हारमोनल आउटबर्स्ट वाला मामला जोर पकड़ लेता है. अचानक दोस्त का मैसेज आया कि वो बच्चे को स्कूल छोड़ने गई थी. लौटकर आ रही थी तो दो लड़के बगल से गुजरे ये कहते हुए कि मैडम आज तो माल लग रही हो. फिर हैपी विमेंस डे कहकर बाइक भगा ले गए. उनके लिए वीमेंस डे एक चिढ़ाने की चीज था.
अखबार, टीवी से सोशल मीडिया तक महिला दिवस सेलिब्रेट किया जा रहा है. सोनू भैया नहा धोकर तैयार हो रहे थे. ऑफिस के लिए निकलना था. भाभी ने पूछा क्या बात है, आज बड़ी जल्दी में हो? भैया शैंपू रगड़ते हुए बोले "आज ऑफिस में विमेन्स डे सेलिब्रेशन है. फीमेल कलीग्स के लिए गिफ्ट वगैरह लेकर जाना है. तुम जल्दी से दो पराठे सेंक दो मैं खाकर चला जाता हूं." भैया बहुत जल्दी में थे. नहाकर तौलिया लपेटे बाहर निकले. ही वॉज़ गेटिंग लेट तो चड्डी बनियान भाभी के धोने के लिए छोड़ दी थी. तौलिया बेड पर फेंका और सनसना के तैयार हुए. लपककर किसी तरह ऑफिस पहुंचे और प्रोग्राम अटेंड किया.
BHU महिला विद्यालय की लड़कियां, जिनको लड़की होने की वजह से सुविधाएं नहीं मिल रहीं.
BHU महिला विद्यालय की लड़कियां, जिनको लड़की होने की वजह से सुविधाएं नहीं मिल रहीं.

ऐसा वीमेन्स डे हमारे यहां ही संभव है. हम यहां तापसी पन्नू का कोहनी मार दांव देखकर उसकी तारीफ के पुल बांध देते हैं लेकिन बहनें हमारे सामने अपने साथ हुए सेक्शुअल हरेसमेंट को बता नहीं सकतीं. मर्यादा की बड़ी ऊंची दीवार है. उत्तर भारत के तमाम गांवों में कल्चर बहुत ऊंचा है. इतना ऊंचा कि बेटी किशोरी हो जाती है उसके बाद कभी पिता के गले नहीं लगती. सिर्फ ससुराल जाते हुए ये मर्यादा का बांध टूटता है वो भी सिर्फ एक बार को. बाकी की उम्र बेटी तरसती रहती है अपने बाप से गले मिलने को.
यहां कहा जाता है कि स्त्री धरती के समान सहनशील है. इसका मतलब ये न निकाल लेना कि पुरुष धरती का बोझ है. भले वो दिन भर एक पैर पर खड़े होकर पूरे परिवार का खयाल रखती है. रात में थकान से नींद नहीं आती तो बोला जाता है कि दिन में मत सो लिया करो. नींद का कोटा पूरा हो जाता है इसीलिए रात में नींद नहीं आती, फिर मुझे परेशान करती हो. सुबह 5 मिनट देर से उठो तो ताने, खाने में कहीं गड़बड़ हो जाए तो ताने, बच्चे न हों तो ताने, दहेज न लाई हो तो ताने. मतलब हर आई गई उसी के माथे जाती है. इतना सब झेलने के बाद भी घर में ही डटी रहती है तो धरती के समान सहनशील हुई ही न.
महिला दिवस पर हमारे पास महिलाओं को देने के लिए कमाल की खबर है. वो ये कि भारत महिलाओं के खिलाफ अपराध पिछले चार साल में 34 परसेंट बढ़े हैं. और इनमें से एक तिहाई मामले घरेलू हिंसा के हैं. मतलब पति या भाई, चाचा, मामा या अन्य रिश्तेदारों द्वारा. इस गर्व से भरी लिस्ट में सबसे ऊपर है उत्तर प्रदेश. जहां एक साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 40 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए. बाकी टॉप स्टेट रहे हैं वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश. दिल्ली में हालात सबसे ज्यादा बुरे हैं. यहां 2019 साल शुरू होते ही सिर्फ जनवरी में रेप के 131 मामले दर्ज किए गए. छेड़छाड़ के 191 मामले. 2017 के पूरे साल में 2 हजार 155 मामले दर्ज किए गए. ये आंकड़ा NCRB का है.
पिछले साल आगरा में उन दुकानदारों का गैंग पकड़ा गया था जो लड़कों के मोबाइल में ब्लू फिल्में भरते थे. ये नॉर्मल कैटेगरी वाला पॉर्न नहीं था. रेप वीडियोज की भारी डिमांड थी. लाखों का कारोबार चल निकला था. ये वही देश है जहां कुछ दिन पहले एक लड़की को किसी संगठन के खिलाफ बोलने पर गैंगरेप की धमकी दी गई थी और हमारी आंख के तारे सेलिब्रिटीज ने उसे ट्रोल किया था. नाम बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि बच्चे बच्चे के दिमाग में उसके खिलाफ जहर मतलब भर का भरा जा चुका है. यहीं बीते दिनों बेंगलुरू में एक छेड़खानी के वीडियो पर ऐसी डिबेट हुई कि उसकी धमक से अपराधी टें बोल गए.
साल 2019 चल रहा है, अपने घर परिवार में, स्कूल कॉलेज में महिला को बराबरी का दर्जा हम दे नहीं सके. वीमेंस डे मनाने के लिए अभी बहुत साल पड़े हैं.


वीडियो- कैंसर से लड़कर आईं सोनाली बेंद्रे की ये बात सबको जाननी चाहिए

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