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एक वक़्त बस में टिकट बेचने वाले रजनीकांत, जिनकी फिल्म की टिकट के लिए आज मार हो जाती है

जो फिल्म में मरने वाले हों तो स्क्रिप्ट बदलनी पड़ती है.

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बस कंडक्टर से शुरू हुआ सफर, हिंदुस्तान के सबसे महंगे एक्टर बनने तक पहुंचा
बात साल 2014 की है, कोयंबटूर शहर के एक सिनेमा हॉल की सीट पर, एक शख्स मरा हुआ मिला. उसके हाथ की नसों में ड्रिप (सुई) लगी हुई थी. इस आदमी को किडनी की सीरियस बीमारी थी जिसके कारण वह पास के ही एक अस्पताल में भर्ती था. उसी समय उसके पसंदीदा हीरो की एक फिल्म आई हुई थी. अपने चेहते हीरो का वह इतना बड़ा फैन था कि हर हाल में उसे वह फिल्म देखनी थी. हॉस्पिटल का स्टाफ़ उसे किसी भी हालत में बाहर जाने नहीं देना चाहता था. मौका पाते ही वह शख्स अस्पताल से भागकर, सीधे सिनेमा हॉल पहुंच गया. सिनेमा हॉल में फिल्म देखते-देखते ही उसकी मौत हो गई. उस शख्स का नाम था 'रविन्द्रन' और उस फिल्म का नाम था 'लिंगा'.  उसका चहेता हीरो था 'रजनीकांत'.
फिल्म 'काला' का एक सीन
रजनीकांत के फैंस उन्हें 'भगवान' की तरह पूजते हैं  

ये छोटी सी कहानी एक ऐसे अभिनेता की थी, जिसके फैन्स के लिए उनका चहेता 'हीरो' पहले आता है, भगवान बाद में. जितने दिलचस्प रजनी के फैन्स की दीवानगी के किस्से हैं, उतने ही दिलचस्प हैं रजनी की जिंदगी के किस्से.

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#1
रजनीकांत के पिता एक कांस्टेबल थे. यानी रजनीकांत बेहद नॉर्मल  फैमिली से ही आते थे. रजनीकांत ने जवानी के दिनों में सबसे पहले कुली का काम किया. थोड़ी और तरक्की की तो कारपेंटर बन गए. थोड़े और अच्छे दिन आए तो बैंगलोर ट्रांसपोर्ट सर्विस में कंडक्टर की नौकरी लग गई.
रजनीकांत के फैंस उन्हें 'भगवान' की तरह पूजते हैं.
फिल्म 'काला' का एक सीन 

#2
बैंगलोर ट्रांसपोर्ट सर्विस में ही रजनीकांत का एक दोस्त बना. जिसका नाम था राज बहादुर.  राज बहादुर एक बस ड्राईवर थे. राजबहादुर ने ही रजनीकांत को कुछ बड़ा करने की सलाह दी थी. शुरू में रजनी के घर वालों ने एक्टिंग में सपोर्ट देने से एकदम मना कर दिया. इसके बाद  राजबहादुर और दूसरे साथियों ने मिलकर रजनीकांत के एडमिशन के लिए पैसे इकट्ठे किए. अंततः रजनीकांत का मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट में एडमिशन करवा दिया गया. उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है. अब भी रजनीकांत छुप-छुपकर अपने दोस्त से मिलने बंगलुरु जाते रहते हैं. अपने बचपन के दोस्त राजबहादुर के साथ गप्पें मारना आज भी उनका फेवरेट काम है.
अपने दोस्त राजबहादुर के साथ अभिनेता रजनीकांत
अपने दोस्त राजबहादुर के साथ रजनीकांत

#3
रजनीकांत मराठी फैमिली से हैं. उनके बचपन का नाम शिवाजी राव गायकवाड़ था. इस तरह उनकी मातृभाषा मराठी ही थी न कि तमिल. रजनीकांत को तो तमिल भाषा आती भी नहीं थी. फिर वो तमिल फिल्मों के सुपरस्टार कैसे बने? इसके पीछे भी एक कहानी है. एक दिन रजनीकांत अपने एक्टिंग स्कूल में एक नाटक कर रहे थे. उसी समय तमिल फिल्म इंडस्ट्री के डायरेक्टर के बालचंद्रन की  नजर उनपर पड़ी. के बालचंद्रन ने रजनीकांत को अपने पास बुलाकर कहा कि तमिल सीखो. बस फिर क्या था, रजनीकांत ने तुरंत ही तमिल सीखना शुरू कर दिया. और इस कदर सीखी कि इतिहास बना दिया.
#4
साल 2014 में रजनीकांत ने पहली बार अपना ऑफिशियल ट्विटर हैंडल खोला था. रजनी के फैन्स ने वहां भी उनका एक रिकॉर्ड बनवा दिया. 24 घंटे के अंदर ही रजनीकांत के 2,10, 000 से ज्यादा फॉलोवर्स बन गए. भारत में किसी भी सेलेब्रिटी के एक दिन में इतने अधिक फॉलोवर्स नहीं बने.
रजनीकांत के सिगरेट पीने का स्टाइल कौन भूल सकता है!
रजनीकांत के सिगरेट पीने का स्टाइल कौन भूल सकता है!

#5
अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'शिवाजी द बॉस' की सफल ओपनिंग के बाद रजनी नजदीक के एक मंदिर में जाना चाहते थे. लेकिन मंदिर में भागदौड़ की सम्भावना की वजह से उनके दोस्तों ने उन्हें मन्दिर जाने से मना किया. लेकिन रजनी ने भेष बदलकर मन्दिर जाने का प्लान बनाया. उन्होंने अपनी डेंटिस्ट किट की हेल्प से अपना हुलिया बदल लिया. एक पुरानी शर्ट और लुंगी पहनकर  मंदिर में पहुंच गए. किसी ने भी रजनीकांत को नहीं पहचाना. लेकिन उनकी दशा पर दया करके एक गुजराती महिला ने 10 का नोट उनके हाथों में थमा दिया. इसे देखकर रजनीकांत मुस्कुराए. और विनम्रता के साथ दस का नोट ले लिया. जब वो सौ रुपए का नोट मन्दिर के दानपात्र में डालने लगे तो महिला शर्म महसूस करने लगी. महिला ने दस का नोट वापस लेकर माफ़ी मांगनी चाही. लेकिन जितना सुंदर उस महिला का दस रुपए देना था, उतना ही सुंदर रजनी का महिला को जवाब था:
'हर बार भगवान कोई न कोई रास्ता खोज लेता है. ये याद दिलाने के लिए कि उसके दरबार पर मैं एक भिखारी से ज्यादा नहीं हूं. आप केवल एक माध्यम हैं. जिसके द्वारा भगवान को ये याद दिलाना था. ये ऊपर वाले का ही एक तरीका है. हम सब उसके सामने कुछ भी नहीं हैं.'
#6
रजनीकांत के फैन्स उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं. जब भी उनकी कोई फिल्म रिलीज होती है तो पूरे दक्षिण भारत में उनकी बड़ी-बड़ी होर्डिंग पर दूध चढ़ाया जाना आम नज़ारा है. ये मामला इतना बढ़ गया कि इसपर बैन लगाने के लिए एक समाजसेवी ने अदालत में एक याचिका डाल दी. ताकि हजारों लीटर दूध बहने पर रोक लगाई जा सके.
रजनीकांत के पोस्टरों पर दूध चढ़ाते हुए उनके फैंस
रजनीकांत के पोस्टरों पर दूध चढ़ाते हुए उनके फैंस

#7
कहा जाता है कि रजनीकांत के फैन्स अपने हीरो को किसी भी फिल्म में मरते हुए नहीं देख सकते हैं. इसलिए किसी भी फिल्म में उनका किरदार ऐसा नहीं रखा जाता जो लास्ट में टाएं-टाएं हो जाए. उनके किरदार हमेशा अजर-अमर ही रखे जाते हैं. एक सुनी-सुनाई बात ये भी है कि मणि रत्नम की फिल्म 'थालापथी रजनी' के क्लाइमेक्स में रजनीकांत की मौत हो जाती है. लेकिन उनके फैन्स के द्वारा दंगे या तोड़फोड़ के डर से वो सीन पहले ही बदल दिया गया.
#8
रजनीकांत की पत्नी का नाम है लता रंगाचारी.  लता अपने कॉलेज की मैगज़ीन के लिए रजनीकांत का इंटरव्यू लेने आई थीं. यहीं दोनों की पहली मुलाक़ात हुई थी. दोनों को प्यार हो गया. साल 1981 में दोनों ने शादी भी कर ली. रजनीकांत की दो बेटियां हैं. जिनके नाम हैं ऐश्वर्या और सौंदर्या. ऐश्वर्या की शादी साउथ के ही सुपरस्टार धनुष से हुई है. वही धनुष! 'रांझना' वाले.

ये स्टोरी हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे श्याम ने की है.




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