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कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने पैदा किया बुरहान वानी के बाप सैयद सलाहुद्दीन को

इंडियन पोस्ट ऑफिस में काम करने वाले का बेटा चुनाव लड़ा और हार गया. कश्मीर में आतंक मचाने लगा.

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सैयद सलाहुद्दीन
आतंकी सैयद सलाहुद्दीन. नाम से तो लगता है ईमान की राह पर चलने वाला. मगर कमबख्त जाहिलपन की हदें पार करता हुआ जुल्म के रास्ते पर दौड़ पड़ा. बाप इंडियन पोस्ट ऑफिस में लोगों के खतों को उनकी मंजिल तक पहुंचाते रहे. बेटे के दिमाग में ऐसा जहरीला कीड़ा घुसा कि उसका दिमाग कीचड़ हो गया और लोगों में आतंक का जहर भरने लगा. MLA बनना चाहता था. इलेक्शन में धांधली की, लेकिन जीत नहीं पाया और बन गया आतंकी. जम्मू-कश्मीर में इंडिया के खिलाफ लोगों को भड़काने लगा. पूरी एक सेना तैयार कर ली, ताकि इंडियन आर्मी से लड़ सके. आज इस आतंकी का नाम एनआईए की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में है. सैयद सलाहुद्दीन पहले सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह था. 18 फरवरी 1946 को जब जम्मू कश्मीर के बड़गाम में पैदा हुआ तो मां-बाप ने सोचा भी नहीं होगा कि बेटे का मुस्तकबिल क्या होगा? आतंकी बनने का ख्याल तो उनके जहन में भी नहीं आया होगा. अपनी फैमिली में सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह सातवीं औलाद थी. पहले मेडिसिन की पढ़ाई की. भले ही वह सिविल सर्विस में जाना चाहता था, लेकिन दिमाग कुछ और ही चाहता था. धीरे-धीरे उसकी दिलचस्पी जमात-ए-इस्लामी संगठन में बढ़ती गई और फिर इस संगठन के लिए कश्मीर में काम करने लगा.

MLA बनने का भूत सवार हुआ

29 साल पहले 1987 में जम्मू-कश्मीर में असेंबली इलेक्शन होते हैं. सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट से श्रीनगर की अमीराकदल विधानसभा सीट से इलेक्शन लड़ता है. इलेक्शन हो जाते हैं. वोट काउंटिंग के दौरान वह जीत रहा होता है. उसी वक्त बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगता है. कहा जाता है कि उसने वोटिंग में धांधली की है. नेशनल कांफ्रेंस के कैंडिडेट गुलाम मोहिउद्दीन शाह को विनर साबित कर दिया जाता है. सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह और यासीन मलिक को पुलिस अरेस्ट कर लेती है और उन्हें 1987 के लास्ट तक बंद रखा जाता है. नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन को 62 सीटें मिलती हैं. सरकार बनती है. चुनाव में हेराफेरी और बूथ कैप्चरिंग करने के लिए उस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगता है. अलगाववादी मूवमेंट की वजह से उसे फिर से जेल में डालवा दिया जाता है. चुनावों में कथित धांधली की बात को लेकर पूरे जम्मू-कश्मीर में गुस्से की लहर थी. पूरे सूबे में युवा सड़कों पर उतर आए. स्टेट की एक बड़ी आबादी ये मानने लगी कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम युनाइटेड फ्रंट के प्रत्याशियों को फर्जीवाड़ा करके चुनाव हरवाया है.

नाम बदल कर हो गया सैयद सलाहुद्दीन?

1989 में सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह जेल से बाहर आता है, लेकिन पूरी तरह बदल जाता है. बदलने का मतलब सुधरने से नहीं है. वो सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह से सैयद सलाहुद्दीन बन जाता है. जेल से छूटकर आने के बाद वो कहता है कि इंडिया ने कश्मीर को गुलाम बना रखा है, इसलिए उसे हरवाया गया. ऐलान करता है कि कश्मीर को आजाद कराने के लिए बंदूक का सहारा लेना ही सही होगा. जब सैयद सलाहुद्दीन जेल से निकलने के बाद बड़गाम में अपने गांव सुईबुग पहुंचा, तो उसका जोरदार स्वागत हुआ. हाथ में बंदूक लिए सैयद सलाहुद्दीन ने मंच से जहर उगला.
सैयद सलाहुद्दीन ने कहा- 'हम अमन के रास्ते विधानसभा में जाना चाहते थे, लेकिन हमें ऐसा नहीं करने दिया गया. हमारी आवाज दबाने के लिए हमें जेल भेज दिया गया. कश्मीर के लिए हथियार उठाने के अलावा अब हमारे पास कोई चारा नहीं.' इसके बाद उसने आजादी का नारा लगाया.
इसके बाद सैयद सलाहुद्दीन ने हिजबुल मुजाहिदीन की मेंबरशिप ले ली. इंडिया के खिलाफ उसकी काली करतूत देखकर आईएसआई ने उसे अपनी गोद में बैठा लिया. अब अगर आईएसआई की गोदी में बैठा हो और उसे उसके काले कारनामों का इनाम न मिले, ये कैसे हो सकता है? चमचा बना था पाक ख़ुफ़िया एजेंसी का, तो उसने भी सैयद सलाहुद्दीन की मदद की और हिजबुल मुजाहिदीन का मुखिया बनवा दिया.

बनाने लगा आतंकी

सलाहुद्दीन आतंकी संगठन मुत्ताहिदा जिहाद काउंसिल से भी जुड़ा है. जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के अन्य हिस्सों में आतंकी वारदात को अंजाम देने, इंडिया की जासूसी करने और कश्मीर में युवाओं को गुमराह कर आतंकी बनने के लिए प्रेरित करने का भी आरोप है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक उसका नाम साल 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट में हुए बम धमाकों के मास्टरमाइंड के रूप में आता है. इसने इंडियन आर्मी पर भी हमले कराए.

पांच बेटे हैं, मगर ताल्लुक नहीं रखते

सैयद सलाहुद्दीन के पांच बेटे हैं लेकिन उससे ताल्लुक नहीं रखते. उसका बड़ा बेटा शकील यूसुफ़ शेर-ए-कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में मेडिकल असिस्टेंट है. दूसरा बेटा जावेद यूसुफ एजुकेशन डिपार्टमेंट में कंप्यूटर ऑपरेटर है. शाहिद यूसुफ रिसर्च फेलो है. चौथा बेटा वाहिद यूसुफ डॉक्टर है. उसका पांचवां बेटा मुईद यूसुफ एक कंपनी में आईटी मैनेजर के तौर पर काम करता है. फिलहाल सैयद सलाहुद्दीन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हैं. वहीं से इंडिया के खिलाफ आतंकी साजिश रच रहा है. हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद वो जमात-उद-दावा हाफिज सईद से मिला. दोनों ने एक ही मंच से इंडिया के खिलाफ जहर उगला.

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