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नोटबंदी का विरोध छोड़ो, लोगों को इन बातों पर देशद्रोही क़रार दो

रामदेव के लिए सलाह है.

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फोटो - thelallantop

9 नवंबर 2016. वो तारीख जिस तारीख से 500 और 1000 के नोट्स काग़ज़ के टुकड़े हो गए, मितरों!

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जनता जनार्दन दो गुटों में बंट गयी. वो जिसे ये फ़ैसला सही लगा. वो जिसे ये फ़ैसला ग़लत लगा. बहस चालू हो गयी. तर्क-कुतर्क चालू हो गए. वाद-विवाद चालू हो गया. हास-परिहास चालू हो गया. बवाल चालू हो गया. लोग एटीएम की लाइन में लगे-लगे बाल सफ़ेद कर रहे हैं. बैंक से कितने निकलेंगे, हिसाब लगा रहे हैं. 'क्या चल रहा है?" को रिप्लेस करके "इस एटीएम में पैसे हैं क्या?" राष्ट्रीय सवाल बन चुका है. लेकिन बवाल जो है कि वो थम ही नहीं रहा. इसी बवाल में बाबा रामदेव भी कूद पड़े. कहने लगे. नोटबंदी का विरोध करना देशद्रोह के समान है.

हम चौंक पड़े. टीवी देखते रहे. खूब देर. तब तक देखा जब तक प्रोग्राम खतम नहीं हो गया. क्या पता रामदेव को न देखना भी राष्ट्रदोह घोषित हो जाए. फिर मैं क्या करूंगा? मेरी हालत भी कन्हैय्या जैसी हो जाएगी. एक दिन उसके घर जैसे मेरे घर भी फ़ोन पहुंचेगा और मेरे बाऊ जी को बताया जाएगा कि उनका इकलौता पुत्र देशद्रोही है. वैसे पापा के पास बीएसएनएल का सिम है. चांसेज़ हैं कि ये ख़बर चिट्ठी लिखकर पहुंचानी पड़े.

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खैर, ये मज़ेदार है. इससे क्या है कि लाइफ में थ्रिल बना रहता है. मैं सलमान खान फैन हूं इसलिए लाइफ में किक ढूंढता रहता हूं. इसे सलमान के लोगों पर गाड़ी चढ़ाने से न जोड़ें. मैं बस उसकी फिल्म किक की बात कर रहा हूं. वैसे, सलमान खान का फैन होना तो अभी तक देशद्रोह घोषित नहीं हुआ है न? क्या है कि वो मुसलमान भी है और उसने कुछ याकूब मेमन पर ट्वीट भी... अर्रे छोड़िये. कहां आप भी. मैं तो ये कह रहा हूं कि थ्रिल बना रहता है. क्या पता कब, कहां, कैसे और क्या राष्ट्रद्रोह घोषित हो जाए. मान लो आर्टिकल लिखना ही गद्दारी हो जाये. देश से. कॉफ़ी पीना, हेडफ़ोन लगाना, अंगुलियों के नाखून कई दिनों से न काटना, नीली टीशर्ट, नीले रंग की स्वेटशर्ट और भूरी पैंट पहनना, ये सब देशद्रोह साबित हो सकते हैं. और चूंकि मैं सलमान खान का फैन हूं इसलिए मुझे लिव द थंडर की आदत है. रामदेव जैसे महापुरुष मुझे थ्रिल दे रहे हैं. देते रहें. भगवान इन्हें दीर्घायु दें.

मेरे पास पर्सनली कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें रामदेव को तत्काल प्रभाव से देशद्रोह की कैटेगरी में डाल देना चाहिए. जो बात है सो बात है.

  1. पतंजलि प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करने पर देशद्रोही क़रार - ये इसलिए कि शुरुआत किसी के फायदे से हो. पहला पॉइंट अगर अगले को फ़ायदा पहुंचाए तो बंदा इन्ट्रेस्ट लेता है. इसलिए रामदेव, दिस इज़ फॉर यू, होमी!
  2. इन्टरनेट एक्स्प्लोरर इस्तेमाल करने पर देशद्रोही क़रार - इसका एक्सप्लेनेशन आपको कुछ दिन में मिल जायेगा.
  3. फ़ोन पर 'और बताओ' पूछने पर देशद्रोही क़रार - मैं चट चुका हूं इस सवाल का जवाब देते-देते. अब इस सवाल के डर से फ़ोन उठाने का जी नहीं करता. स्कूल में टीचर्स के 'और बताओ' से पीछा पाकर जब आगे बढ़ा तो कमबख्तों ने फ़ोन पर पूछना शुरू कर दिया.
  4.  डॉनल्ड ट्रंप पर जोक्स बनाने पर देशद्रोही क़रार - बहुत हो गया. मूव ऑन. डील विद हिम.
  5. कुमार विश्वास को कविताएं सुनाने पर देशद्रोही क़रार - कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, मगर ये आदमी जहां जाता है, बस यही क्यूं रटता है?
  6. सर्जिकल स्ट्राइक करने पर देशद्रोही क़रार - रुको. मेरा कहने का मतलब ये था कि बिना सबूत लाये, बिना वीडियो यूट्यूब पर रिलीज़ किये सर्जिकल स्ट्राइक करने वालों को गद्दार क़रार दो. और मैं अरविन्द केजरीवाल बन चुका हूं.
  7. चाउमीन खाने पर देशद्रोही क़रार - दिवाली में झालर चीन से नहीं आ रही हैं तो आप पेट में चीनी आइटम कैसे डाल सकते हैं साहब?
  8. लाइन में लगे-लगे पैर दर्द की शिकायत करने पर देशद्रोही क़रार - वहां सरहद पर जवान खड़े हैं. उन्होंने तो कभी नहीं पैर दर्द की शिकायत की.
  9.  देश को संबोधित करने पर देशद्रोही क़रार - बहुत हुआ! सारी उम्र हम संबोधित होकर जी लिए. इक पल तो अब हमें जीने दो. जीने दो.
  10. इन्टरनेट एक्स्प्लोरर बहुत स्लो चलता है. इसलिए कहा था.

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