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सर्वे में 99% लोगों ने माना, कभी किसी सर्वे में नहीं लिया हिस्सा!

ये सर्वे कौन करता है, कहां होते हैं और आपके पास कभी कोई सर्वे वाला आया क्या?

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फोटो - thelallantop
एक सर्वे में 99% भारतीयों ने माना है कि आज तक उनके पास एक भी सर्वे वाला नहीं आया. मैं आपसे पूछता हूं, आपने कोई सर्वे वाला देखा है? आपके चाचा ने देखा, बरहटा वाली मामी ने देखा? बड़ोखर वाली बुआ के बेटे ने देखा? हममें से किसी ने भी कभी सर्वे वाले को नहीं देखा. फिर ये लोग सर्वे कहां और किन लोगों के बीच कर लेते हैं? एक सर्वे और है, जिस सर्वे में लोगों ने माना कि वो किसी भी सर्वे में सबसे ज्यादा बार इनमें से कोई नहीं चुनते हैं. आम आदमी पांच साल में एक ही सर्वे में भाग लेता है, उसे हिंदी में चुनाव कहते हैं. ये ठीक है कि सर्वे आम आदमी के बीच जाकर नहीं होते, आदमी को चुनने की आजादी दे दो तो वो घबरा जाता है.
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एक और सर्वे में 80% छात्रों ने माना कि सर्वे के नाम पर उन्होंने सिर्फ ओएमआर शीट भरी है.

ये सर्वे होते बड़े मजेदार हैं, सर्वे के सब्जेक्ट देखिए, 75% मर्दों को नाखून काटना नहीं पसंद. 67% कर्मचारी ऑफिस का टॉयलेट इस्तेमाल करते वक़्त गोले पर टिशू पेपर बिछाते हैं. 95% भारतीय पहले दाईं तरफ के बाल कटाते हैं, 34% महिलाएं सिंक में जूठे हाथ धो लेती हैं. 55 पुरुष रात के खाने में दही मांगते हैं.एक सर्वे देखिए, 75% औरतों ने माना उन्हें गैजेट सेवी मर्द ज्यादा पसंद हैं. ऐसी महिलाएं सिर्फ सर्वे में मिल सकती हैं जिन्हें ऐसे लोग पसंद हों जो उनके बगल में बैठकर मोबाइल में धंसे रहें.
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वो कौन लोग हैं जो 14 शहरों में 635 लोगों से पूछकर ये बता देते हैं कि देश में 67% मर्दों को मुंह के दायें तरफ से भात चबाना पसंद है? ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे पिछले पंद्रह सालों से एक अखबार देश का सबसे तेज बढ़ता अखबार है, एक चैनल पांच साल से सबसे ज्यादा देखा जाने वाला न्यूज चैनल है और हर मां-बाप का बेटा उसके लिए सबसे अच्छा बच्चा होता है.
10 शहरों में 900 लोगों के बीच सर्वे कराकर अगर ये कहा जा सकता है कि शादीशुदा मर्द ज्यादा आत्महत्या करते हैं. तो मैं भी घर के चार लोगों को बीच सर्वे करा के कह सकता हूं मैं दुनिया में छह फुट से ऊपर के सारे मर्दों में मैं सबसे ज्यादा आकर्षक हूं. घर के चार जनों के सर्वे से मैं ये भी साबित कर सकता हूं कि 100% मर्द घर के पर्दे से हाथ पोंछ लेते हैं. 100% महिलाएं रात को दूध पीकर सोती हैं. और पूरे की पूरी जनसंख्या को खाने में चहचिन्दा पसंद नहीं है.
सर्वे दरअसल औसत बुद्धि के लोगों के लिए होते ही नहीं हैं, एक औसत सर्वे में जितने प्रतिशत, आंकड़े, संख्या और फैक्ट्स होते हैं. उन्हें समझने के लिए गणित के एक प्रोफ़ेसर की जरूरत पड़ती सर्वे के विषय सही चुने जाने चाहिए तब आपको पता लगेगा, 80% मर्दों को गेंहू पिसाना नहीं पसंद आता, 95% महिलाओं को खाना बनाने में ओत आती है. 100% स्कूली स्टूडेंट स्कूल नहीं जाना चाहते, 60% छात्र अपने मास्टरों के नकली साइन मार लेते हैं.  सर्वे ऐसे हों कि कितने फीसदी लोग मैच फंसने पर तकिया पैर के नीचे फंसा लेते हैं. कितने प्रतिशत लोग टेबल में नकमिटनी नहीं लगाते. कितने प्रतिशत लोग ऑफिस के नेट से पिच्चर डाउनलोड करते हैं. कितने प्रतिशत लोग मैच में एक बार पुराना कैच देख उछल पड़ते हैं कि एक और आउट हो गया. कितने प्रतिशत बच्चे ये चाहते हैं उनके टीचर का एक्सीडेंट हो जाए क्योंकि इनका होमवर्क आज फिर नहीं हुआ है. 
सरकारी सर्वे और अच्छे होते हैं, वो एग्री-कल्चर को बढ़ावा देते हैं. उनमें डिस्एग्री वाला ऑप्शन नहीं होता, आधा काम यहीं हो जाता है. शेष आधा काम इसलिए हो जाता है क्योंकि जिन लोगों की राय मांगी जाती है उनके पास सरकारी ऐप्स ही नहीं होते. इस मामले में कि सर्वे कैसे होने चाहिए? जैसे अक्षय कुमार और शाहरुख की आर्मी ड्रेस वाली फोटो अगल-बगल लगाकर फेसबुक पर लिख देते हैं, कौन ज्यादा देशभक्त है. अक्षय कुमार के लिए लाइक करें शाहरुख के लिए शेयर करें. सर्वे ऐसे होने चाहिए, जिससे आदमी जुड़ सके.
 

सर्वे होने चाहिए ऐसे

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या ऐसे 

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या फिर ऐसे

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नोट बैन पर 'नमो' के सर्वे का नतीजा हमें पता है

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