अपनी डीपी से जो ज़ाहिर है छिपाएं कैसे तेरी मरज़ी के मुताबिक नज़र आएं कैसे
लाइक बटोरने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है पहले ये तो तय हो कि स्टेटस बनाएं कैसे
फेसबुक आंख का बर्ताव बदल देता है कमेंटबाज़ तुझे आंसू नज़र आएं कैसे
लाख फ्रेंड रिक्वेस्ट खिंची चली आती हों दोस्त बनाना नहीं आया तो बनाएं कैसे
वैसे ओरिजिनल ग़ज़ल इस तरह है. https://www.youtube.com/watch?v=zRUCaJMS91Q इसे जगजीत सिंह ने भी गाया है https://www.youtube.com/watch?v=NSB6OHgMEr4 पढ़ें फेसबुक शायरी का पहला वर्जन, 'कल वीकएंड की पहली रात थी'





















