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दो बड़ी कार कंपनियों को उबारने वाला धाकड़ बिजनेसमैन, जो बिना पासपोर्ट जापान से फरार हो गया

किसी को पता नहीं कार्लोस जापान से बाहर कैसे निकले.

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जापान में निसान के रिवाइवल को एक बड़ी घटना माना गया. कार्लोस गोन ने निसान के रिवाइवल को अंजाम दिया था और रातों-रात वो हीरो बन गए. फोटो: Twitter
दुनिया की दो बड़ी कार कंपनियां. रेनॉ और निसान. एक दौर में इन्हें दीवालिया होने से बचाने वाला शख्स. इन दोनों कंपनियों को मित्सुबिशी से जोड़कर तीन कंपनियों का एलायंस बनाकर बड़ा बिजनेस एंपायर खड़ा करने वाला शख्स. जापान में इतना फेमस कि उस पर कॉमिक्स बनीं. कई किताबें लिखी गईं. जिसे एक दौर में एशिया का सबसे बड़ा बिजनेसमैन कहा गया. जिसे कभी बिल गेट्स से भी ज़्यादा प्रभावशाली माना गया. वो आर्थिक अनियमितता के आरोप झेल रहा है.
बात हो रही है निसान, रेनॉ और एलायंस के पूर्व चेयरमैन-सीईओ कार्लोस गोन की. उनके पास तीन पासपोर्ट थे, तीनों जापान ने जब्त कर लिये थे. इसके बावजूद वह जापान से लेबनान भाग गए. बिना पासपोर्ट के. फिल्मी तरीके से. सब हैरान हैं कि गोन लेबनान कैसे पहुंचे? इसकी कई थ्योरीज़ भी चल रही हैं.
लेबनान में होने की सूचना ख़ुद गोन ने दी. उन्होंने लिखा,
'मैं अब लेबनान में हूं और अब मैं कभी भी जापान के पक्षपातपूर्ण जस्टिस सिस्टम का कैदी बनकर नहीं रहूंगा, जहां दोष पहले ही मान लिया जाता है. जहां खूब भेदभाव है और जहां मूलभूत मानवाधिकारों से वंचित रखा जाता है. मैं न्याय से भागा नहीं हूं. मैं अन्याय और राजनीतिक उत्पीड़न से बच कर निकला हूं.'
गोन लेबनान की राजधानी बेरूत में ही पले-बढ़े हैं. उनका जन्म ब्राज़ील में हुआ था. उनके पास ब्राज़ील, फ्रांस और लेबनान के पासपोर्ट हैं. लेबनान में उनका अच्छा-खासा रसूख है और वहां तगड़ी पकड़ रखते हैं. गोन के वकील जूनिचिरो हीरोनाका भी उनके भागने से हैरान हैं. उन्होंने कहा, 'मैं ख़ुद अवाक हूं. मुझे तो ये भी नहीं पता कि हम उनसे संपर्क कर सकते हैं या नहीं. मुझे नहीं पता कि हम आगे कैसे बढ़ेंगे.'
#मिस्टर फिक्स इट एंड कॉस्ट किलर
1978 में टायर बनाने वाली कंपनी मिचेलिन से अपना करियर शुरू करने वाले गोन ने 1996 में रेनॉ कंपनी जॉइन की. तब कंपनी लगभग दीवालिया होने वाली थी. यहां वो कंपनी को नई ऊंचाई पर ले गए. अपनी फाइनेंशियल समझ और कॉस्ट कटिंग की वजह से उन्हें Le Cost Killer और Mr. Fix It भी कहा जाता था. 1999 में तीन बड़ी कंपनियों का गठबंधन हुआ. फ्रांस की रेनॉ, जापान की मित्सुबिशी और निसान. उस दौरान निसान बड़े आर्थिक संकट से जूझ रही थी. तब गोन ने निसान रिवाइवल प्लान (NRP) पर काम किया और कंपनी को उबारा.
आज निसान इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है. कंपनी के रिवाइवल को जापान में एक बड़ी घटना माना गया. कार्लोस गोन रातों-रात हीरो बन गए. 2001 में गोन ने बिल गेट्स को पीछे छोड़ते हुए टाइम मैगजीन की प्रभावशाली व्यक्तियों की लिस्ट में टॉप पर जगह बनाई. जापान सरकार ने 2004 में उन्हें 'जापान मेडल विथ ब्लू रिबन' सम्मान दिया. 2002 में फॉर्चून मैगजीन ने उन्हें एशिया का बिजनेसमैन ऑफ द इयर माना. जापान में गोन इतने लोकप्रिय हुए कि उन पर सुपरहीरो कॉमिक बुक बनी. 2002 में ये 'द ट्रू स्टोरी ऑफ कार्लोस गोन' के नाम से प्रकाशित हुई. उन पर कई किताबें कई भाषाओं में लिखी जा चुकी हैं. उन्होंने ख़ुद 'Shift: Inside Nisan's Historic Revival' नाम की बेस्टसेलिंग किताब लिखी है.
2013 में निसान डैटसन गो की लॉन्चिंग के दौरान नई दिल्ली में कार्लोस गोन. फोटो: विकीपीडिया
2013 में निसान डैटसन गो की लॉन्चिंग के दौरान नई दिल्ली में कार्लोस गोन. फोटो: विकीपीडिया

#डाउनफॉल ऑफ गोन
1 अप्रैल, 2017 को उन्होंने निसान के चेयरमैन पद पर रहते हुए सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया. 19 नवंबर, 2018 को उन्हें कॉरपोरेट रिसोर्सेज का व्यक्तिगत फायदे के लिए ग़लत इस्तेमाल करने और अपने वेतन को कम करके दिखाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. 22 नवंबर को निसान बोर्ड ने एकमत से उन्हें चेयरमैन पद से हटा दिया. मित्सुबिशी बोर्ड ने भी यही किया. रेनॉ और फ्रांस सरकार पहले उनका बचाव करती रहीं लेकिन अंत में उन्होंने भी गोन को रिटायर कर दिया. मार्च, 2019 में उन्हें जमानत मिली लेकिन निसान के फंड के ग़लत इस्तेमाल के नए चार्ज के साथ 4 अप्रैल को फिर गिरफ्तारी हुई. आरोप लगे कि उन्होंने निसान के फंड से बड़ी राशि ओमान में एक डीलरशिप के खाते में ट्रांसफर की और इसमें से 50 लाख डॉलर निजी इस्तेमाल के लिए निकाले. आरोप ये भी है कि गोन ने 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान कोशिश की कि उन्हें जो करीब 18 लाख डॉलर का निजी घाटा हुआ, निसान उसकी भरपाई कर दे. गोन इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं. उनके ख़िलाफ 2020 में  जापान में फिर से ट्रायल शुरू होने वाला था.
2011 में जापान में निसान की एक फैक्ट्री में कार्लोस. फोटो; विकीपीडिया
2011 में जापान में निसान की एक फैक्ट्री में कार्लोस. फोटो; विकीपीडिया

#'गोन विद द विंड'
जमानत के दौरान गोन पर कड़े प्रतिबंध थे. उन्हें टोक्यो छोड़ने की इजाज़त नहीं थी. उन पर निगरानी रखी जा रही थी. अपने वकील के ऑफिस को छोड़कर उन्हें कहीं भी इंटरनेट नहीं मिला था. बिना कोर्ट को बताए उन्हें दोस्तों से मिलने की इजाज़त नहीं थी. यहां तक कि उन्हें अपनी पत्नी से बात करने की इजाज़त नहीं थी. उन्हें उनके आलीशान घर में कड़ी निगरानी में रखा गया था. इसके बाद 1 जनवरी को खबर मिलती है कि गोन अपने घर में नहीं हैं.
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपुष्ट सूत्रों के हवाले से बताया कि गोन की लेबनान मूल की पत्नी कैरोल ने उनकी मदद की है. दावा ये भी किया जा रहा है कि पहले वो लकड़ी के एक बॉक्स में तुर्की आए. यहां से प्राइवेट प्लेन से लेबनान गए. कहा ये भी जा रहा है कि वो जापान में किसी छोटे एयरपोर्ट से अपनी फेक आईडी से प्राइवेट प्लेन में बैठे और लेबनान आए. ख़ैर, जितने मुंह उतनी बातें लेकिन लेबनान विदेश मंत्रालय का कहना है कि गोन लीगल तरीके से देश में आए हैं और मंत्रालय को नहीं पता कि वो जापान से कैसे यहां आए. जापान के अधिकारी भी हैरान हैं और उनके पास जवाब नहीं हैं. फिलहाल कहा जा रहा है कि गोन छुट्टियां बिताने के बाद लेबनान से प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे.
इस उठा-पटक के बीच अहम बात ये है कि लेबनान और जापान के बीच प्रत्यर्पण संधि भी नहीं है. यानी जापान कार्लोस गोन के प्रत्यर्पण के लिए लेबनान में आवेदन नहीं कर सकता है.
ट्विटर पर गोन के इस फिल्मी इस्केप को मशहूर फिल्म 'गॉन विद द विंड' की तर्ज़ पर 'गोन विद द विंड' कहा जा रहा है.
फिल्म गॉन विद द विंड का पोस्टर. फोटो: अमेजॉन
फिल्म 'गॉन विद द विंड' का पोस्टर. फोटो: अमेजॉन



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