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क्या ई-श्रम पोर्टल पर प्रवासी मजदूरों के आंकड़े में हेरफेर हो रहा है?

केंद्र सरकार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की संख्या 38 करोड़ बता रही है

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पहला फोटो : आजतक, दूसरा: ई-श्रम पोर्टल भारत सरकार
कोरोना महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन की वे तस्वीरें आपको याद होंगी, जिनमें लाचार प्रवासी मज़दूर हजारों किलो मीटर तक पैदल चलते नजर आ रहे थे. लॉकडाउन के बाद जब संसद सत्र शुरू हुआ, तो इसे लेकर खूब हंगामा कटा, बात बढ़ी और फिर विपक्ष ने सरकार से पूछा लिया कि कोरोना महामारी की वजह से कितने लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है? सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं था.
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, कोर्ट ने इसे लेकर सरकार की फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने जून, 2021 में सरकार को मजदूरों का डेटा तैयार करने का आदेश दिया. तब कोर्ट ने कहा था कि दिसंबर महीने तक मज़दूरों का पंजीकरण पूरा किया जाना चाहिए. इसके बाद 26 अगस्त 2021 को भारत सरकार ने ई-श्रम (e-SHRAM) पोर्टल लॉन्च किया. इस पोर्टल के तहत असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों के रजिस्ट्रेशन करने का फ़ैसला लिया गया.
अब तक के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ क़रीब 8.78 करोड़ मज़दूरों ने ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण करा लिया है. लेकिन ये अब भी सरकार के टार्गेट यानी कि 38 करोड़ मज़दूरों के पंजीकरण से कोसों दूर है. '38 करोड़' का आंकड़ा सुनते ही एक सवाल खड़ा होता है कि सरकार आखिर इस आंकड़े तक कैसे पहुंची? यानी उसे कैसे पता लगा कि देश के असंगठित क्षेत्र में 38 करोड़ मजदूर हैं? आइए समझने की कोशिश करते हैं कि क्या सरकार का यह आंकड़ा एकदम सही है? ई-श्रम पोर्टल पहले समझते हैं क्या है ई-श्रम पोर्टल. इस पोर्टल में असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों का डेटा रखा जाएगा. संगठित क्षेत्र के तहत ऐसे श्रमिक आते हैं, जो दफ़्तरों और फ़ैक्ट्रियों में काम करते हैं, जिनकी तनख़्वाह से प्रॉविडेंट फंड यानी कि PF कटता है. असंगठित क्षेत्र में निर्माणकार्यों में लगे मज़दूर, रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले, छोटे दुकानों में काम करने वाले, घरों में या छोटे होटलों में खाना बनाने वाले और घरों में काम करने वाले लोग शामिल हैं. ई-श्रम पोर्टल पर ऐसे श्रमिकों का एड्रेस और उनके काम से जुड़ी सारी जानकारी देनी होती है. कोई भी श्रमिक अपने आधार नंबर के साथ ई-श्रम पोर्टल पर खुद को रजिस्ट्रर कर सकता है. नाम, काम, पते के अलावा बैंक अकाउंट की जानकारी भी देनी होती है और रजिस्ट्रेशन होने पर श्रमिकों को 12 डिजिट का यूनिक नंबर मिलता है. यह कामगारों का खास आईडी नंबर होता है. ई-श्रम को लेकर सरकार का टार्गेट केंद्र सरकार ई-श्रम पोर्टल पर बनने वाले डेटाबेस का इस्तेमाल कर मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाना चाहती है. इसके अलावा इसका इस्तेमाल रोजगार के अवसरों को मज़दूरों तक पहुंचाने में मदद करना है. केंद्र राज्य सरकारों से भी मदद लेकर ये डेटा इकठ्ठा कर रही है. केंद्र के निर्देश के बाद सभी राज्य सरकारों ने मज़दूरों का डेटा इकठ्ठा करने के लिए अपने-अपने श्रम विभाग का टार्गेट सेट किया है.
E Shram Sixteen Nine
निर्माण मज़दूरों की प्रतीकात्मक तस्वीर. (फ़ोटो-आज तक)

भारत सरकार के लेबर डिपार्टमेंट में कार्यरत एक अफ़सर ने दी लल्लनटॉप को बताया,
"ई-श्रम पोर्टल पर मज़दूरों के रजिस्ट्रेशन के लिए केंद्र सरकार ने टार्गेट सेट किया. ये टार्गेट सरकार के पास मौजूद आंकड़ों के आधार पर किया गया है. ये आंकड़े नगर निगम, बाल विकास, निर्माण मज़दूर, मनरेगा, राशन कार्ड आदि योजनाओं के तहत काम करने वाले पंजीकृत लोगों के हैं. इस आंकड़े के तहत असंगठित क्षेत्र में 38 करोड़ मजदूर हैं."
टार्गेट कितना सटीक? इस टार्गेट में एक समस्या है. UP के लखनऊ डिविज़न के एक लेबर कमिशनर ने नाम न बताने के शर्त पर बताया कि केंद्र सरकार ने जिस तरह से टार्गेट सेट किया है, वो सही तरीक़ा नहीं है. उन्होंने कहा,
"क्योंकि मनरेगा में काम करने वाला मज़दूर, निर्माण मज़दूरी का काम भी कर सकता है. और वही मज़दूर राशन कार्ड का इस्तेमाल कर राशन का लाभ भी ले रहा होगा. ऐसे में डेटा में डुप्लिकेशन का चान्स बहुत बढ़ जाता है. और वास्तव में इस टार्गेट को पाने में राज्य के श्रम विभागों को काफ़ी मशक़्क़त करनी पड़ रही है."
वो आगे बताते हैं,
"भारत सरकार ने UP के 6.67 करोड़ का टार्गेट सेट किया है. हमने राज्य के लेवल पर अलग-अलग क्षेत्रों में पंजीकृत मज़दूरों का आंकड़ा जुटाया. ये आंकड़ा आया लगभग 8 करोड़. इसको हमने 75 ज़िलों में बांट दिया. आज की तारीख में हम लगभग 2 करोड़ लोगों को पंजीकृत कर चुके हैं. लेकिन टार्गेट तक पहुंच पाना काफ़ी मुश्किल है."
ई-श्रम पर पंजीकरण के पैमाने ओडिशा के श्रम विभाग में एक बड़े अधिकारी का ये भी मानना है कि ई-श्रम पोर्टल में किसी तरह का डूप्लिकेशन होना संभव नहीं है. वो कहते हैं कि रजिस्ट्रेशन में क्योंकि आधार कार्ड का इस्तेमाल होगा, इस वजह से डुप्लिकेशन नहीं होगा. लेकिन, वो आगे बताते हैं कि इसमें जो पैमाने तय किए गए हैं, उस आधार पर ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि सिर्फ़ असंगठित क्षेत्र के मज़दूर ही रजिस्ट्रेशन करेंगे. उन्होंने कहा,
"ऐसा कोई व्यक्ति जो इन्कम टैक्स नहीं भरता हो, जिसका प्रॉविडेंट फंड यानी कि पीएफ़ नहीं कटता हो, सालाना आय 1.8 लाख से कम हो, उम्र 17 से 59 साल हो वो ई-श्रम पोर्टल में रेजिस्ट्रेशन कर सकता है. ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता कि इसमें सिर्फ़ असंगठित क्षेत्र के मज़दूर ही नहीं, बल्कि छोटे किसान भी इस श्रेणी में आते हैं."
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बिहार की एक मज़दूर महिला को ई-श्रम कार्ड देते केंद्रीय राज्य श्रम मंत्री रामेश्वर तेली. (फ़ोटो-पीटीआई)
पोर्टल पर प्रवासी मजदूरों का सही आंकड़ा कैसे मिलेगा? जब ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण की शुरुआत हुई थी. तब इस पर 'प्रवासी मज़दूर' का एक ऑप्शन दिया गया था. लेकिन इस ऑप्शन को बाद में हटा दिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि ई-श्रम पोर्टल पर यह कैसे पता लगेगा कि प्रवासी मजदूर कितने हैं और कौन से मजदूर वाकई प्रवासी मजदूर हैं? इसका जवाब देते हुए भारत सरकार के श्रम विभाग में कार्यरत एक अधिकारी ने 'दी इंडियन एक्सप्रेस' को बताया,
"पंजीकरण प्रक्रिया जब अपने आख़िरी चरण में होगी, तो घर के पते और काम के पते के बीच के फ़र्क़ के आधार पर प्रवासी मज़दूरों का चयन किया जाएगा."
ई-श्रम पोर्टल के जरिए सरकार का मकसद एक ऐसा डेटाबेस तैयार करना है, जिसके जरिए तमाम योजनाओं का फ़ायदा देश के सभी मज़दूरों तक पहुंचाया जा सके. लेकिन उसकी यह मंशा कितनी पूरी होगी, इसे लेकर संशय के बादल छाए हुए हैं. क्योंकि मज़दूरों के सटीक आंकड़ों को लेकर अभी भी तस्वीर साफ़ नहीं हो पाई है.

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