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प्लास्टिक के पैकेट्स खोलने में आपकी ये गलती लोगों की 'जान' ले सकती है!

चिप्स खाते वक्त, दूध का पैकेट फाड़ते वक्त हर कोई ये गलती कर रहा है. हल बहुत आसान है और हर हाल में इसे जान लेना चाहिए...

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प्लास्टिक पैकेट्स के टुकड़े नुकसानदेह हैं, काटने का सही तरीका सबको जानना चाहिए.

फ़ास्ट फ़ूड खाते वक्त आपसे एक गलती हो रही है, जिससे आप शायद अनजान हों. गलती ये कि मान लीजिए आपने एक चिप्स का पैकेट लिया. उसको फाड़ा. और फाड़ने के साथ हाथ में आया प्लास्टिक का छोटा टुकड़ा जमीन पर फेंक दिया. खाने के बाद आपने भले चिप्स का पैकेट डस्टबिन में डाल दिया. मगर जो छोटा टुकड़ा आपने बेफिक्र होकर जमीन पर फेंका, वो बड़ी आफत बन रहा है, कैसे. चलिए समझते हैं.  

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सबसे पहले हम आपके सामने कुछ आंकड़े रखते हैं जो हमें 'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट' के प्रोग्राम मैनेजर सिद्दार्थ सिंह से पता चले. 

# ये जो प्लास्टिक का कचरा है, वो हर साल टनों की मात्रा में समुद्र या डंप साइट्स में चला जाता है. 'सेंट्रल पॉल्यूशन ऑफ़ कण्ट्रोल बोर्ड' की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, करीबन हर डंप साइट में 7% प्लास्टिक कचरा होता है, जो आज के समय में दोगुना हो गया है. 

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आपको जानकर हैरानी होगी कि ये प्लास्टिक वेस्ट दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती पर्यावरणीय समस्याओं में से एक बन गया है. ये भी जानना जरूरी है कि बड़े प्लास्टिक के पैकेट्स तो फिर भी रीसायकल हो जाते हैं, लेकिन जो छोटे प्लास्टिक के टुकड़े ऐसे ही फेंक दिए जाते हैं, वो खत्म नहीं हो पाते. तो क्या होता है उनका? 

प्लास्टिक के छोटे टुकड़े रीसायकल करना है मुश्किल 

'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट' के प्रोग्राम मैनेजर, सिद्दार्थ सिंह का यह भी कहना है कि, वजन में हल्के प्लास्टिक का कलेक्शन भी थोड़ा कठिन हो जाता है. जो प्लास्टिक का टुकड़ा हम पैकेट से अलग कर देते हैं, वो आगे चलकर माइक्रोप्लास्टिक्स का रूप ले लेता है.

अब ये माइक्रोप्लास्टिक क्या है? माइक्रोप्लास्टिक दरअसल 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं. इनका आकार एक तिल के बीज के बराबर हो सकता है. अब बड़ा खतरा ये है कि कई बार ये कण इंसानों के फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं. इससे त्वचा और सांस संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं. जान तक जोखिम में आ सकती है. 

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प्लास्टिक पैकेट खोलने का सही तरीका क्या?

तो मुद्दे की बात ये है कि सबसे पहले हमें प्लास्टिक का उपयोग करने से बचना चाहिए. इसको मानने में दिक्कत ये है कि ज्यादातर चीजें प्लास्टिक बंद पैकेट्स में आती हैं तो क्या किया जाए. जवाब है एक जुगाड़. जुगाड़ आप नीचे लगी तस्वीर देख समझ जाएंगे. इसमें एक दूध का पैकेट दिख रहा है. जिसको फाड़ते वक्त ये खयाल रखा गया है कि प्लास्टिक का छोटा तुकड़ा पैकेट से अलग ना हो. माने साइड पर कट लगा काम चलाया गया है. तो आपको भी यही करना चाहिए.

अदम्य चेतना संस्था ने प्लास्टिक पैकेट्स के लिए बेंगलुरु में अभियान चला रखा है.  

अदम्य चेतना संस्था की अध्यक्ष तेजस्विनी अनंतकुमार के अनुसार, अगर हम सभी दूध के पैकेट से बिना टुकड़े को अलग किए खोलें तो बड़ा फायदा हो सकता है. अकेले बेंगलुरु में 50,00,000 छोटे प्लास्टिक के टुकड़ों को कूड़े में जाने से रोका जा सकता है. हम फिर आपको ध्यान दिला दें कि ये छोटे टुकड़े रीसायकल नहीं हो पाते हैं. तो ऐसा ही करना है और पर्यावरण को सुरक्षित करने में अपना योगदान देना है.

                                                                                                          (ये खबर हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं चेतना ने की है.)

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