शतरंज हो या शेयर मार्केट सीखना आसान है, जीतना थोड़ा मुश्किल (फोटो सोर्स - PTI)ऐसे ही शेयर की ख़रीद-फ़रोख़्त करना तो आप सीख जाएंगे लेकिन प्रॉफ़िट मेकिंग की स्ट्रैटेजी इज़ दी अदर स्टोरी. बहरहाल अभी के लिए इतना समझ लीजिए कि शेयर्स की इसी ख़रीद-फ़रोख़्त को कहते हैं ट्रेडिंग. और शेयर्स की ट्रेडिंग जहां होती है वो हुआ शेयर मार्केट या शेयर बाज़ार. और हर बाज़ार की तरह ही इसके भी खुलने, बंद होने का तय वक्त है. मतलब वो वक्त जब आप शेयर्स की ट्रेडिंग कर सकते हैं. तो शेयर मार्केट में ट्रेडिंग ऑवर्स सुबह नौ से शाम के साढ़े तीन बजे तक रहता है. इसमें नौ बजे से लेकर सवा नौ बजे, यानी पहले 15 मिनट कहलाते हैं- ‘प्री ओपनिंग सेशन’. आसान भाषा में प्री ओपनिंग सेशन ऐसा ही है जैसे किसी दुकान के रिटेल उपभोक्ताओं के लिए खुलने से पहले दुकानदार अपना गल्ला-वल्ला सही करता है. भगवान की फ़ोटो को धूप दिखाता है. थोड़ी बहुत इंवेंट्री भी करता है. ऐसे ही शेयर मार्केट में भी पहले 15 मिनट आप-हम जैसा रिटेल इंवेस्टर ट्रेडिंग नहीं कर सकता. साथ ही मार्केट विशेष त्योहारों और वीकेंड्स पर बंद रहता है. यानी उस दिन भी कोई ट्रेडिंग नहीं होती.
शेयर ट्रेडिंग में प्री-ओपनिंग सेशन वैसा ही है जैसे दुकानदार के लिए दुकान खोलने की तैयारी (फोटो क्रेडिट - आज तक)पर आज हम शेयर मार्केट की दिनचर्या पर बात क्यूं कर रहे हैं? क्यूंकि हमें करनी है 'मुहूर्त सेशन' पर बात. जो शेयर मार्केट की दिनचर्या का एक्सेप्शन है. और बिना नॉर्म्स पर बात किए आप एक्सेप्शन कैसे समझेंगे? # क्या है मुहूर्त ट्रेडिंग? आपने अक्सर देखा होगा कि लोग दिवाली वाले दिन, अपनी दुकान चाहें छोटी हो या बड़ी, ऑफिस या अपने वर्कप्लेस में लक्ष्मी पूजा जरूर करते हैं. शेयर मार्केट ने भी इस परम्परा को सहेजते हुए मुहूर्त ट्रेडिंग के चलन को बरक़रार रखा है. यूं तो दिवाली वाले दिन बाजार बंद रहता है, लेकिन लक्ष्मी पूजन के वक्त निवेशकों के लिए इसे खोला जाता है. इस ट्रेडिंग सेशन को ही हम मुहूर्त ट्रेडिंग कहते हैं. इस खास समय पर निवेशक और बाजार के दिग्गज शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं. ये विशेष निवेश मुनाफे के उद्देश्य से नहीं किया जाता. ज़्यादातर लोग इसे एक शगुन के तौर पर देखते हैं. ख़ासतौर पर वो लोग, जिनकी रोज़ी-रोटी ही शेयर मार्केट से चलती है. # मुहूर्त ट्रेडिंग का इतिहास भारत के कुछ स्थानों में दिवाली के दिन को नववर्ष की तरह भी मनाया जाता है. इसे हम विक्रम सम्वत् के नाम से जानते हैं. कहते हैं 57 BC में राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय पायी थी. ये विजय इतनी बड़ी थी कि इस वर्ष को एक नए युग का प्रारम्भ भी माना गया और इसे एक कैलेंडर यानी विक्रम सम्वत् का नाम दिया गया. इसकी गणना चल रहे वर्ष में यानी ग्रेगोरियन कैलेंडर में 57 वर्ष जोड़कर की जाती है. यूं वर्ष 2021 को विक्रम सम्वत 2078 कहा जायेगा. इस विशेष अवसर को मनाने के लिए एक स्पेशल ट्रेडिंग सेशन होता है जिसे हम मुहूर्त ट्रेडिंग के नाम से जानते हैं. मुहूर्त ट्रेडिंग की शुरुआत BSE यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में 1957 में की गयी थी. वहीं NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में इसकी शुरुआत 1992 में की गयी थी.
मुहूर्त ट्रेडिंग इस बार भी 'मुहूर्त' के हिसाब से होगी. (फोटो - बिज़नेस टुडे)# मुहूर्त ट्रेडिंग 2021 का समय NSE के नोटिफिकेशन के मुताबिक 4 नवंबर यानी लक्ष्मी पूजन के दिन ब्लॉक डील सेशन शाम पौने छः बजे शुरू होगा और शाम छः बजे बंद हो जायेगा. ब्लॉक डील सेशन के बारे में भी हम कभी विस्तार से बताएंगे, पर अभी के लिए इतना जान लीजिए कि ब्लॉक डील सेशन बोले तो थोक में शेयर उठाना. यह काम ज्यादातर इंस्टीट्यूशनल प्लेयर ही करते हैं. इसके बाद प्री ओपनिंग सेशन शाम छः बजे से छः बजकर आठ मिनट तक चलेगा.
अब बारी आती है- मुख्य मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन की, जो कि शाम छः बजकर पंद्रह मिनट से शुरू होकर शाम सात बजकर पंद्रह मिनट तक चलेगा. यानी एक घंटे का ट्रेडिंग सेशन जिसमें निवेशक शेयर बाजार में ट्रेडिंग कर सकते हैं. इसके बाद क्लोजिंग सेशन होगा, जो कि सात बजकर पच्चीस मिनट से लेकट सात बजकर पैंतीस मिनट तक चलेगा. मार्केट क्लोज़ होने के 15 मिनट पहले सारे इंट्राडे सौदे स्क्वायर ऑफ यानी सेटल किये जाएंगे. स्क्वायर ऑफ का मतलब यह हुआ कि जब कोई ट्रेडर इंट्राडे में बाई या सेल की पोजीशन लेता है तो उसे प्रॉफिट कमाने के लिए शाम तक यानी ट्रेडिंग डे के खत्म होने से पहले ट्रांजैक्शन उल्टा कर देना होता है, नहीं करेगा तो सिस्टम या ब्रोकर अपने आप कर देगा. उल्टा कर देना होता है मतलब, बाई किया था तो सेशन क्लोज़ होने से 15 मिनट पहले सेल, और सेल किया था तो बाई. इसे ही हम सौदा स्क्वायर ऑफ करना कहते हैं. और इंट्राडे मतलब एक ही दिन के भीतर.
शेयर ट्रेडिंग (प्रतीकात्मक तस्वीर आज तक)# क्या मुहूर्त ट्रेडिंग पर निवेश करना चाहिए? हमने आपको पहले ही बताया था कि मुहूर्त ट्रेडिंग पर शेयर खरीदना एक शगुन माना जाता है. इस दिन मुनाफ़े की चिंता के बगैर लोग पैसा लगाते हैं. जैसे आपको बर्तनों की क़तई ज़रूरत न हो, या फिर हाथ पूरी तरह तंग हो तो भी धनतेरस के दिन एक चम्मच या करछी ख़रीद कर ही सही, रस्म अदायगी तो करते हैं न.
हालांकि अगर आपने पहले से शेयर ले रखे हैं तो इस दिन उन्हें बेचकर भी आप मुनाफा कमा सकते हैं. लेकिन निवेश करना चाहिए या नहीं ये सवाल वैसा ही है जैसे कार चलानी चाहिए या नहीं या शतरंज खेलना चाहिए या नहीं. बड़े इन्वेस्टर्स मुहूर्त ट्रेडिंग हो या अन्य दिनों की ट्रेडिंग, उनका रोज़ का काम है ये. लेकिन अगर कोई आदमी जिसे ट्रेडिंग का 'ट' भी नहीं मालूम, वो अगर 'आसमान से बरसेगा पैसा' टाइप बातें सुनके मुहूर्त ट्रेडिंग में शामिल हो जाए तो नुकसान भी हो सकता है. क्यूंकि शेयर ट्रेडिंग में रूल हमेशा एक ही है - डिमांड और सप्लाई का.
हालांकि शेयर मार्केट के एक्सपर्ट्स का मानना है कि तमाम कंपनियों ने अपने आईपीओ शुरू किए हैं, और आने वाले दो साल तक आईपीओ का फ्यूचर सुनहरा है. ऐसे में आप चाहें तो इनके शेयर्स के साथ मुहूर्त ट्रेडिंग कर सकते हैं. लेकिन बतौर डिस्क्लेमर हम आपसे फिर कहेंगे, क्या? वही वाली लाइन, निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है.
शेयर मार्केट की रिसर्च आपको अच्छे रिटर्न्स दिला सकती है (सांकेतिक तस्वीर टुडे)अंत में आपको ये बता दें कि निफ़्टी और सेंसेक्स दोनों ने ही इस साल में अपने रिकॉर्ड हाई या ऑल टाइम हाई को छुआ था. हालाँकि पिछले कुछ हफ्तों में निफ़्टी और सेंसेक्स में 1.8% की गिरावट भी देखने को मिली है. इन सभी चीजों को देखकर जानकार कह रहे हैं कि अभी बॉटम फ़िशिंग करने का वक्त नहीं हैं. मतलब जो आमतौर पर थोड़ा सा शेयर गिरने पर ख़रीदने का कॉन्सेप्ट है, उसे अभी के लिए अवॉइड करें. थोड़ा-थोड़ा इंवेस्ट करें. पोर्टफ़ोलियो डायवर्सिफ़ाई रखें और लॉन्ग टर्म तक बने रहें. देखिएगा ऑन दिवाली प्रॉफ़िट की नई इबारतें लिखेंगे. अभी के लिए अलविदा. हैप्पी दिवाली.










