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CCTV कैमरों पर अमित शाह को घेरने के चक्कर में मनीष सिसोदिया ने बड़ी गड़बड़ कर दी

क्या दिल्ली के डिप्टी CM ने अपने पद का दुरुपयोग किया?

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दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर अमित शाह और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया आमने-सामने हैं.
दिल्ली में 6 जनवरी को साइकिल ट्रैक की आधारशिला रखी गई. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस मंच से केजरीवाल के CCTV कैमरे का मुद्दा उठाया. शाह ने कहा,
दिल्ली की सुरक्षा के लिए 15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगने थे. आज भी दिल्ली की जनता ढूंढ रही है कि कहां हैं वो कैमरे? दूरबीन से भी देखने पर सीसीटीवी कैमरे नजर नहीं आते हैं.
अमित शाह के आरोपों का आम आदमी पार्टी ने जवाब दिया. दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. सिसोदिया ने कहा,
अमित शाह लगातार जनता के बीच ये सवाल कर रहे हैं कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली की गलियों में सीसीटीवी लगाने का वादा किया था. वो सीसीटीवी कैमरे कहां हैं? मैं मीडिया के माध्यम से अमित शाह को बता दूं कि वो सीसीटीवी कैमरे कहां लगे हैं.
इसके बाद मनीष सिसोदिया ने एक वीडियो दिखाया. इस वीडियो में अमित शाह पूछ रहे हैं कि सीसीटीवी कैमरे कहां हैं? इसके बाद वीडियो में उन जगहों को दिखाया जाता है जहां सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. मनीष सिसोदिया कहते हैं,
ये इसलिए बता रहा हूं कि दो दिन पहले अमित शाह लाजपत नगर गए थे. डोर-टू-डोर करने. वो 8 घरों में गए थे. जिस गली में वो डोर-टू-डोर कैंपेन के लिए गए थे, वहां दिल्ली सरकार के 16 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. यहां तक कि जिस घर के अंदर वो गए थे, उसके बाहर भी सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है. ये वो फुटेज है जो सीसीटीवी कैमरों से निकली है. मैंने सोचा हो सकता है कि सीसीटीवी कैमरे काम न कर रहे हों इस वजह से उन्होंने ऐसा कहा हो.
मनीष सिसोदिया ने तीन कैमरों की फुटेज मीडिया को दिखाई. उन्होंने आगे कहा,
सीसीटीवी कैमरे ढूंढने के लिए दूरबीन मत लगाइए. जिन गलियों में आप डोर-टू-डोर कर रहे हैं वहां 5-10 फीट की उंचाई पर आपको कैमरे दिख जाएंगे. उनमें आपकी फुटेज कैप्चर हो रही है. आप डोर-टू-डोर करने जा रहे हैं. कौन लोग आपके लिए दरवाजे नहीं बंद कर रहे, कौन लोग आपके लिए सवाल कर रहे हैं, कौन लोग आपको किस तरह से ट्रीट कर रहे हैं, सबकुछ कैप्चर हो रहा है.
इस पूरी कवायद के बाद सवाल उठ रहे हैं कि दिल्ली में लगे सीसीटीवी कैमरों का मकसद क्या है? आम आदमी पार्टी ने 2015 के अपने घोषणा पत्र में सीसीटीवी लगाने का वादा किया था. मकसद नागरिकों की सुरक्षा करना था. लेकिन इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या आम आदमी पार्टी इन सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल पॉलिटिकल सर्विलांस के लिए कर रही है? विरोधी पार्टियों पर नजर रखने के लिए कर रही है. सिसोदिया ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये तक बता दिया कि शाह किन 8 घरों में गए थे. जाने अनजाने में मनीष सिसोदिया इस चीज़ को जनता के सामने ले आए. वो चाहते तो अमित शाह की बातों को झुठलाने के लिए बिना फुटेज के आंकड़े दे सकते थे. अमित शाह के कैंपेन से जुड़ी एक-एक बात बताने की जरूरत नहीं थी. इसके साथ ही प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. आरोप लगते रहे हैं कि सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सरकारें जनता पर नज़र रखती हैं. अगर एक गली में 16 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो ये कैमरे उस गली में रहने वाले, वहां से गुजरने वाले लोगों को भी कैप्चर कर रहे हैं. उन घरों में आने जानेवाले लोगों पर नज़र रख रहे हैं. आप कह सकते हैं कि सुरक्षा के नजरिए से क्राइम से बचने के लिए, क्रिमिनल को पकड़ने के लिए इन कैमरों की फुटेज काम आ सकती है. लेकिन डर ये भी है कि ये फुटेज अगर गलत हाथ में चली जाए तो फिर क्या होगा? सवाल ये भी है कि अगर दिल्ली में कल को किसी और पार्टी की सरकार आती है तो इस तरह के सीसीटीवी फुटेज का इस्तेमाल अपने विरोधियों के खिलाफ कर सकती है. जैसा कि मनीष सिसोदिया ने तीन कैमरों की फुटेज जारी कर की. सिसोदिया ने ये भी कहा कि सबकुछ रिकॉर्ड हो रहा है. अमित शाह आपके साथ कौन-कैसा बर्ताव कर रहा है ये भी रिकॉर्ड हो रहा है.ऐसे में  सवाल उठ रहे हैं कि क्या शाह को जवाब देने के लिए सिसोदिया ने फुटेज जारी कर अपने पद का गलत इस्तेमाल किया?
केजरीवाल की बात समझने के लिए अमित शाह को हॉलीवुड मूवी देखनी पड़ेगी

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