दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक से कांग्रेस सांसद हैं. 2024 में वो चौथी बार इस सीट पर चुनाव जीते हैं. उनके पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. भूपेंद्र अपने पिता की पारंपरिक सीट रोहतक से ही चुनाव लड़ते हैं. दीपेंद्र हुड्डा की स्कूलिंग देश के प्रतिष्ठित अजमेर के मेयो कॉलेज से हुई. इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की. उनके पास B.Tech और MBA के अलावा लॉ में स्नातक की डिग्री है. उन्होंने भिवानी के टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज से इंजीनियरिंग की.
कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा ने बताया, अमेरिका में किसे हरियाणवी रागिनी सुनाते थे
दीपेंद्र हुड्डा अमेरिका की इंडियाना यूनिवर्सिटी गए. वहां उन्होंने केली स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया. उनका सब्जेट फाइनेंस एंड स्ट्रेटेजी था.


इसके बाद वो अमेरिका की इंडियाना यूनिवर्सिटी गए. वहां उन्होंने केली स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया. उनका सब्जेट फाइनेंस एंड स्ट्रेटेजी था. अमेरिका में पढ़ाई करने के बारे में दीपेंद्र हुड्डा ने कहा है कि वो वहां जाकर भी अपनी संस्कृति नहीं भूले. वो वहां भी अपने अमेरिकी दोस्तों को हरियाणवी रागिनी सुनाते थे.
लोकसभा के आर्काइवल के मुताबिक इंडियाना यूनिवर्सिटी में, दीपेंद्र हुड्डा को मानद 'बीटा गामा सिग्मा' से सम्मानित किया गया. ये सम्मान क्लास के टॉप एक प्रतिशत छात्रों को दिया जाता है. इंडियाना यूनिवर्सिटी में हुड्डा को विश्वविद्यालय में एशियाई छात्र संघ का अध्यक्ष चुना गया. अपने अमेरिका के एक्सपीरियंस के बारे में बात करते हुए दीपेंद्र कहते हैं,
"बचपन से लेकर आजतक मैं हरियाणी और रोहतकी ही हूं. मैं हमेशा से यहीं का हिस्सा रहा हूं. मुझे अमेरिका में दुनिया थोड़ी अलग लगती थी. अमेरिका में कुछ लोग होते हैं, जो भारत से अपनी संस्कृति लेकर जाते हैं. कुछ लोग वहां जाकर वहां की संस्कृति अपनाते हैं. मैं किसी को गलत सहीं नहीं ठहराना चाहता हूं. लेकिन वहां जब सारे मेरे अमेरिकी दोस्त बैठते थे तो मैं उन्हें हरियाणवी रागिनी सुनाता था. क्योंकि मैं सोचता था कि जब में इंडिया में था तो कभी मैं भी अंग्रेजी गाना सुनता था. ये संस्कृति की बात है."
दीपेंद्र हुड्डा ने अमेरिका में अपने जीवन के बारे में आगे कहा,
“वहां प्रोफेशनल लाइफ काफी ठीक थी. लाइफस्टाइल भी बढ़िया थी. जीवन के अंदर भौतिक सुख वहां पर थे, मगर मैं आत्मिक रूप से सुखी नहीं था. भौतिक और आत्मिक सुख में बहुत फर्क है. मैं जितने साल वहां रहा मुझे अंदर से हमेशा दुविधा रही. मेरा दिल अपने देश और अपने क्षेत्र में ही लगा रहा.”
दीपेंद्र ने आगे बताया कि वो अमेरिकन एयरलाइंस में थे, उसके बाद McKinsey में उन्हें कंसल्टिंग का रोल ऑफर हुआ था. जॉब स्विच करने के बीच में वो भारत आए, और फिर जब वापस अमेरिका गए तो उनकी पुरानी दुविधा ज्यादा बढ़ गई. काफी ज्यादा परेशान रहने लगे थे. तभी एक दिन वो बिल क्लिंटन की एक किताब पढ़ रहे थे. किताब की एक चीज उनके दिमाग में बैठ गई. वो ये कि जो भी फैसला करो उसका शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गोल ध्यान में रखो. दीपेंद्र ने बताया कि उन्होंने रातोरात ये निर्णय लिया कि उन्हें भारत वापस जाना है.
यह सभी बातें दीपेंद्र हुड्डा ने लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में कही है. पूरा एपिसोड आप यहां देख सकते हैं-
जमघट: दीपेंद्र हुड्डा ने कांग्रेस में गुटबाजी और हरियाणा विधानसभा चुनाव पर क्या बताया?
वीडियो: जमघट: दीपेंद्र हुड्डा ने कांग्रेस में गुटबाजी और हरियाणा विधानसभा चुनाव पर क्या बताया?






















