आज लोगों की बारी जो कहें कै लेने दे तेरा भी दिन आएगा उस दिन हिसाब चुका के रहना
लांबी का दंगल चलेगा लंबा, पटियाला में पक्का फौजी हारेगा
पंजाब की इन दो सीटों पर चुनाव धाकड़ होगा. नतीजा कुछ भी दिलचस्पी पूरी बनी रहेगी.
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फोटो - thelallantop
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अरे भेड़ की हाहाकार के बदले शेर की एक दहाड़ है प्यारे दंगल दंगल
भले ही शेर की दहाड़ न हो लेकिन बादल की गर्जन थी जो 1997 में कांग्रेस से पंजाब में लांबी विधानसभा सीट ऐसी छीनी कि लगातार चार बार से जीत रहे हैं. 1992 में लांबी से गुरनाम सिंह अबुल खुराना विधायक बने थे. इसके बाद 1997 में चुनाव हुए और शिरोमणी अकाली दल के प्रमुख प्रकाश सिंह बदल ने खूंटा गाढ़ दिया. जो इतना मज़बूत निकला कि कोई उखाड़ नहीं पाया. लेकिन...सूरज तेरा चढ़ता ढलता गर्दिश में करते हैं तारे दंगल दंगल
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प्रकाश सिंह बादल 8 दिसम्बर 1927 को पंजाब के छोटे से गांव अबुल खुराना के जाट सिख परिवार में पैदा हुए. 1947 में महज 20 साल के थे और सरपंच का चुनाव जीत लिया. 1957 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा में पहुंचे. 1969 में दोबारा विधायक बने. 1969-70 में मंत्री भी बनें. पहली बार 1970-71 में पंजाब के मुख्यमंत्री बन गए. उन्होंने कांग्रेस से राजनीतिक सफर की शुरुआत की लेकिन बाद में उन्होंने अपने रास्ते अलग कर लिए और शिरोमणि अकाली दल में आ गए. पांच बार पंजाब के सीएम बने. 70 साल के राजनीतिक सफर में बादल ने जेल में भी कई साल गुज़ारे. इस बार का चुनाव देश के इस बुज़ुर्ग नेता के लिए आसान नहीं होगा.दंगल दंगल...! चुनावी दंगल. सीएम प्रकाश सिंह बादल के तारे इस बार गर्दिश में दिख रहे हैं. इसकी वजह है यहां कांग्रेस के कैप्टेन अमरिंदर सिंह का चुनावी मैदान में उतरना और आम आदमी पार्टी से जरनैल सिंह का ताल ठोकना. इस बार लांबी की लड़ाई लंबी होने वाली है. एक तरफ कैप्टेन तो दूसरी तरफ बड़ा बादल. और बीच में हैं 'आप' उम्मीदवार जरनैल सिंह. अमरिंदर दो जगह से चुनाव लड़ेंगे. एक पटियाला सीट भी शामिल है. मगर यहां पक्का एक फौजी की हार निश्चित है. जानिये इस धाकड़ चुनावी दंगल की कहानी. कांग्रेस नेता कैप्टेन अमरिंदर का लांबी से चुनाव मैदान में उतरने का एक ही मकसद है. बादल की गर्जन को शांत करना. इसलिए वो पटियाला से भी चुनाव लड़ेंगे. अमरिंदर का कहना है कि वह सीएम प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब को बर्बाद कर दिया है. इस बार उन्हें जीतने नहीं दूंगा.
पंजाब सीएम प्रकाश सिंह बादल (बीच में).
कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला और लंबी दोनों जगह से चुनाव लड़ेंगे. एक तरफ उनका मुकाबला जनरल जेजे सिंह से है तो दूसरी तरफ प्रकाश सिंह बादल से है. कैप्टन के लिए मुश्किल ये होगा कि वो अपनी ये दोनों सीटें देखेंगे या फिर पूरा पंजाब. कैप्टन का कहना है, 'मैं बादल को लटका दूंगा. 74 साल का हो चुका हूं और अब अंतिम बार चुनाव लड़ रहा हूं, इसके बाद नौजवानों को मौका मिलेगा. 11 मार्च को मेरा जन्मदिन है, मुझे पंजाब के लोग सीएम पद की सौगात देंगे.'

आम आदमी पार्टी ने प्रकाश सिंह बादल के मुकाबले पर दिल्ली में राजौरी गार्डन से विधायक रह चुके जरनैल सिंह को उतारा है. पत्रकार जरनैल उस वक्त सुर्ख़ियों में आये थे, जब उन्होंने दिल्ली में सिख दंगों की जांच में हीलाहवाली का इल्ज़ाम लगाते हुए तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम पर प्रेस कांफ्रेस में अपना जूता उछाल दिया था. और अभी कुछ ही दिन पहले प्रकाश सिंह बादल पर भी जूता फेंका गया. बाद में जूता फेंकने वाले को पकड़ लिया गया. ये जूता कांड जरनैल सिंह पर असर डाल सकता है. जरनैल सिंह खुद को सीएम पद का दावेदार मान बैठे हैं. और ये तभी हो सकता है, जब पार्टी पंजाब में जीते. वो खुद कैप्टन और बादल को हरा दें. जैसे केजरीवाल ने दिल्ली में शीला दीक्षित को हराया और सीएम बन गए.
लांबी में अमरिंदर के होने से कांग्रेस को क्या फायदा होगा
ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है, जब प्रकाश सिंह बादल को अपने ही गढ़ में अमरिंदर की तरफ से चुनौती मिल रही है. बादल के खिलाफ चुनाव लड़ने से एक फायदा ये होगा कि कैप्टन की उम्मीदवारी को मजबूती मिलेगी. इसी सोच के साथ 2014 लोकसभा चुनाव में केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा था. साथ ही आमने-सामने के इस मुकाबले में उन आरोपों की भी काट हो जाएगी. जो आम आदमी पार्टी उनपर लगाती रही है.'आप' का कहना है कि कांग्रेस और अकाली दल के बीच रणनीतिक समझदारी है. दोनों एक दूसरे का बचाव करती हैं. केजरीवाल ने ट्वीट भी किया था, 'सर, बादलों ने कुछ महीने पहले आपके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले बंद कर दिए थे. क्यों? पंजाब जानना चाहता है कि क्या डील हुई थी.'चाहे केजरीवाल आरोप लगाएं या फिर बादल उन्हें कमज़ोर बताए. लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि लांबी सीट से अमरिंदर के चुनाव लड़ने से वो पहले से भी ज्यादा मजबूत कांग्रेस नेता के तौर पर उभरेंगे. 2014 लोकसभा चुनाव में कैप्टन ने अमृतसर सीट से बीजेपी नेता अरुण जेटली को 1.65 लाख वोटों से उस वक्त शिकस्त दी. जब पूरे देश में मोदी लहर थी. लेकिन लांबी के दंगल में कैप्टेन का मुकाबला इतना आसान नहीं होगा. इसकी पहली वजह ये है कि ये प्रकाश सिंह बादल वो शख्सियत हैं जो 1997 से लगातार इस सीट से विधायक चुने जा रहे हैं. साल 2012 विधानसभा चुनाव की बात करें तो प्रकाश सिंह बादल को 55.71 फीसदी वोट मिले थे. जबकि उनके खिलाफ उतरे कांग्रेस उम्मीदवार को 35.44 फीसदी वोट ही मिल थे.

गदा संभाले कैप्टेन अमरिंदर सिंह.
दूसरी वजह है कांग्रेस और 'आप' सत्ता विरोधी वोटर को अपनी ओर खींचना. दोनों ही पार्टियां उस वोटर को अपने पाले में लेने की कोशिश में लगी हैं, जो किसी न किसी वजह से प्रकाश सिंह बादल से नाराज़ है. ऐसे में होगा ये कि सत्ता विरोधी वोट दो तरफ बंट जाएगा और फायदा प्रकाश सिंह बादल को ही मिलेगा.
अमरिंदर सिंह के बारे में भी थोड़ा सा जान लीजिये
11 मार्च 1942 पटियाला में पैदा हुए. पंजाब के सीएम रह चुके हैं. राजनीति में आने से पहले इंडियन आर्मी में थे. 1965 में आर्मी से इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद पाकिस्तान से जंग छिड़ जाने के चलते फिर से आर्मी जॉइन कर ली. और जंग के बाद फिर से इस्तीफ़ा दे दिया. 1980 में लोकसभा कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ा. और जीत गए. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद कांग्रेस का दामन छोड़ दिया औरअकाली दल में शामिल हो गए, लेकिन 92 में वो वक्त आ गया जब उसे भी छोड़कर शिरोमणि अकाली दल (पंथिक) बना लिया. कांग्रेस ने इस दल को ऐसा सपोर्ट किया कि बाद में 1999 से 2002 तक के लिए कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष बन गए. 2002 से 2007 तक पंजाब के सीएम रहे. अमरिंदर और उनकी फैमिली पर करप्शन के इल्ज़ाम लगे.अगर पटियाला की बात की जाए तो ये सेफ सीट है. क्योंकि अमरिंदर सिंह यहां से लगातार तीन बार विधायक रहे हैं. और अभी मौजूदा वक्त में प्रणीत कौर विधायक हैं. जो कांग्रेस से ही हैं. दूसरा अमरिंदर यहीं के एक राजघराने से आते हैं. यानी ये उनकी अपनी सीट है. जहां से उन्हें हराना मुश्किल है.अगर वो दो जगह से चुनाव लड़ते हैं तो इससे भी कहीं न कहीं नुकसान है. और इस नुकसान को केजरीवाल के ट्वीट से समझा जा सकता है कि लोगों के बीच क्या मैसेज जाएगा.
केजरीवाल ने अमरिंदर पर निशाना साधते हुए एक और ट्वीट किया- 'सर, क्या आप दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं या सिर्फ लंबी सीट से. लोग आपको कायर कहेंगे अगर आपने दोनों सीटों से चुनाव लड़ने का फैसला किया.'आम आदमी पार्टी का कहना है कि अमरिंदर सिंह इसलिए लांबी से चुनाव लड़ रहे हैं ताकि वो प्रकाश सिंह बादल को जितवा सकें. क्योंकि उन्हें मालूम है प्रकाश सिंह बादल से लोग नाराज़ हैं और आप का कैंडिडेट जीत रहा है.
एक फौजी की हार तय है
अकाली दल ने पटियाला सीट से जरनल जेजे सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है. ऐसा पहली बार होगा जब कैप्टेन के मुकाबले जरनल होगा. जेजे सिंह पटियाला शहरी इलाक़े से अमरिंदर सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे. जेजे सिंह अमरिंदर के बीच ज़बानी जंग शुरू हो चुकी है. जनरल जेजे सिंह का ननिहाल पटियाला में है जिस पर चुटकी लेते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा था कि वे जेजे सिंह को नानी याद दिला देंगे.कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है, 'ऐसा पहली बार होगा कि कोई कैप्टन किसी जनरल को मात देगा.'

जरनल जेजे सिंह.
जनरल जेजे सिंह ने भी चुप्पी नहीं साधी और पलटवार कर दिया, "मैं एक सिपाही का पोता हूं जिसने आम लोगों की तरह संघर्ष करके नाम कमाया है. अमरिंदर सिंह की तरह सोने की थाली में खाकर बड़ा नहीं हुआ हूं.'जेजे सिंह पाकिस्तान के बहावलपुर में 1945 को पैदा हुए. उनके दादा और पिता पहले और दूसरे विश्व युद्ध में लड़ चुके हैं. कारगिल की लड़ाई के दौरान जेजे सिंह आर्मी अभियान के अतिरिक्त निदेशक थे. वो बेहतरीन शूटर भी रहे हैं. लेकिन क्या वो अमरिंदर सिंह पर निशाना लगा पाने में कामयाब होंगे. ये तो आने वाला वक्त बता देगा. यानी इस बार पंजाब की ये दोनों सीटें धुआंधार होने वाली हैं. यानी लांबी में बादल से कैप्टेन टकराएगा तो पटियाला में एक फौजी दूसरे फौजी को हराएगा. हार एक फौजी की तय है. चुनाव भी न क्या से क्या कर देता है. पटियाला में एक फौजी की हार तय है.
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