रामगोपाल नपुंसक हैं. अखिलेश को मैं बचपन से जानता हूं. वह मेरी गोद में खेले हैं. मुलायम सपा के भी पिता हैं. सपा परिवार के विवाद में मेरा कोई हाथ नहीं है.एक तो ये हुआ नपुंसकता वाला बयान. दूसरा बिहार से आया है. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बेटा नंबर एक हैं तेज प्रताप यादव. सुशील मोदी के एक ट्वीट का जवाब तेज प्रताप ने इन शब्दों में दिया.
‘हमारी शादी के लिए सुशील मोदी परेशान न हों. सुशील मोदी के पुत्र नपुंसक है क्या, पहले वे उनकी शादी कराएं.'इस झगड़े की शुरुआत हंसी मजाक वाली थी. हंसी मजाक शुरू हुई सोशल मीडिया से. लालू के बेटा नंबर दो के पास 44 हजार शादी के ऑफर आए हैं. कूल गाइ हैं भैयाजी. उसी पर मौज चल रही थी सोशल मीडिया में. सुशील मोदी ट्वीट कर दिए कि छोटे की बात सब कर रहे हैं. बड़े की शादी हुई नहीं. वो कुंवारा ही रह जाएगा क्या?
उसके बदले तेज प्रताप ने ये बयान दिया. अब खिसियाए सुशील मोदी कह रहे हैं कि लालू के बेटे हैं तो संस्कार वैसे ही होंगे. किसी ने गलती से ये झूठ मार्केट में चला दिया था कि प्रेम और युद्ध में सब जायज है. राजनीति भी युद्ध हो गई है. समाजवादी पार्टी के भीतर पसरा वर्ल्ड वॉर देख ही रहे हो. इसलिए इसमें भी सब कुछ जायज होगा. ऐसा नेताजी लोग सोच जाते हैं. और गालियां देने से पहले जरा भी नहीं सोचते. उनको फॉलो करने वाली जनता में जो समझदार होते हैं वो इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते. चमचे होते हैं वो और खुलके हुंकार मारने लगते हैं. नेतृत्व धर्म पूरा हो जाता है. नपुंसक शब्द का इस्तेमाल पहली बार नहीं हुआ राजनीति में. फरवरी 2014 में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने यही हल्की बात मोदी के लिए कही थी. तब चुनाव सिर पर थे. राहुल गांधी गुस्सा हो गए थे सलमान के इस बयान से. कहा कि जबान संभाल लो. ऐसे बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.
क्या नपुंसकता गाली है?
राजनेता या कोई भी जब किसी को ये बोलता है तो उसका सीधा मतलब गाली ही होता है. वो अपने हिसाब से विरोधी पर ऐसा अचूक और तीखा वार करता है कि वो पलटकर उसका जवाब न दे पाए. गाली का संस्कारी वर्जन है नपुंसक. लेकिन नपुंसकता सच में कोई गाली है क्या? नहीं. हरगिज नहीं. ये शरीर में एक मेडिकल डिसेबिलिटी है. बल्कि डिसेबिलिटी भी नहीं, एक फीचर है जो उनमें नहीं होता. जिसकी वजह से इंसान बच्चा पैदा नहीं कर पाता. ये कई बार इलाज से ठीक भी हो जाती है. कई बार नहीं होती. किसी भी हालत में ये कोई हंसने की चीज नहीं है. न ही चिढ़ाने की. नपुंसकता का दिल, दिमाग, लीवर, हाथ, पैर से कुछ लेना देना नहीं होता. और अगर हो भी तो, वो उसका शरीर है. क्या उसपर हंसना ठीक है? वो शख्स तमाम कामों में नॉर्मल है. हो सकता है किसी काम में उसे विशेषज्ञता हासिल हो. जैसे कोई बच्चा पैदा कर पाने में नाकामयाब आदमी बहुत अच्छा कारपेंटर हो, सिंगर हो या किसान हो. कामयाब और काबिल नेता बनने के लिए बच्चे पैदा करने जैसी कोई अर्हता नहीं है.लोग छूटते ही किसी को नपुंसक या हिजड़ा कह देते हैं. और सुनने वाले उसे गाली की ही तरह लेते हैं. तभी चिढ़ाने वालों को मजा आता है. बाद में नेता लोग अपना फेवरेट डायलॉग देकर निकल जाते हैं. "मीडिया ने मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया." मेरा मतलब उनकी अक्षमता से था. तो भैया किसी और टाइप की अक्षमता को नपुंसकता से जोड़ देना आपके दिमाग की अक्षमता है. क्लियर हो लो. नपुंसकता गाली नहीं है. इसलिए इसे गाली की तरह इस्तेमाल करना भी ठीक नहीं है.
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