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वो प्रोफेसर जिसने एक वोट से वाजपेयी की सरकार को गिरा दिया था

आज जन्मदिन है.

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फोटो - thelallantop
सोपोर. कश्मीर में है. हमेशा खबर आती है कि सोपोर में मुठभेड़. यहीं से आते हैं सैफुद्दीन सोज. पुराने राजनीतिज्ञ हैं. केंद्रीय मंत्री रहे हैं. बहुत काम किया है. पर दो बातों के लिए जाना जाता है इनको- 1. इनकी लड़की नाहिदा को आतंकवादियों ने किडनैप कर लिया था. और एक सप्ताह में ही छोड़ भी दिया. ये कैसे हुआ, किसी को नहीं पता. क्या हुआ था, ये भी नहीं पता. पर बाद में किडनैपर यासीन भट्ट को पकड़ भी लिया गया और सजा भी हुई. 2. 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 महीने की सरकार एक वोट से गिराने वाले सैफुद्दीन सोज ही थे. इनका ही एक वोट था, जो वाजपेयी सरकार के खिलाफ गया था. 23 नवंबर 1937 को जन्म हुआ था सैफुद्दीन सोज का. कश्मीर यूनिवर्सिटी से इकॉनमिक्स में मास्टर्स किया. इस यूनिवर्सिटी के बहुत सारे कॉलेजों में पढ़ाया भी. उसी यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार भी बने. फिर ये जम्मू-कश्मीर स्टेट एजुकेशन बोर्ड में चले गये. 1983 में वहां से वालंटरी रिटायरमेंट लिया और सरकारी नौकरी से राजनीति में आ गये. 1983 के लोकसभा चुनाव में लड़े बारामूला सीट से. फारूख अब्दुल्ला की जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस से. जीते. यहीं से और इसी पार्टी से 3 बार और जीते. ये वो दौर था जब पाकिस्तान की ISI अफगानिस्तान के बहाने बहुत पैसा बना चुकी थी अमेरिका से. और अब अपना ध्यान कश्मीर पर लगा रही थी. ऐसा नहीं था कि पहले ध्यान नहीं था. इस बार तरीका नया था. आतंकवाद का सहारा ले रहे थे. मुजाहिदीन बना रहे थे. कश्मीर के फ्रस्ट्रेटेड लड़कों को ट्रेनिंग और पैसे देकर आतंकवादी बनाया जा रहा था. भारत सरकार गलतियों पर गलतियां कर रही थी. चुनी हुई राज्य सरकार को गिरा कर कश्मीरियों के मन में नफरत और शक भरा जा रहा था. सैफुद्दीन सोज संसद में कश्मीर का प्रतिनिधित्व करते रहे. 1996 में इंद्र कुमार गुजराल की सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे. देवेगौड़ा की सरकार में भी मंत्री रहे. फारूख अब्दुल्ला की पार्टी यूनाइटेड फ्रंट की सरकार में लगातार बनी हुई थी. प्रधानमंत्री चेंज हो रहे थे. पर सपोर्ट बना हुआ था. 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी. फारूख अब्दुल्ला की पार्टी का सपोर्ट इनको भी था. पर सैफुद्दीन सोज ने विश्वास मत के दौरान वाजपेयी सरकार के खिलाफ वोट कर दिया. 13 महीने की सरकार बस इसी वोट के चलते गिर गई. सैफुद्दीन सोज को पार्टी से बाहर कर दिया गया. सैफुद्दीन ने कहा था कि मैंने पार्टी से कहा था, वोट के दिन एब्सेंट रहने के लिये. पर ये लोग वोट करने पर आमादा थे. मैं किसी कम्युनल पार्टी को वोट नहीं कर सकता. मेरे सिद्धांतों के खिलाफ है ये. 2003 में सैफुद्दीन सोज ने कांग्रेस जॉइन कर ली. राज्य सभा पहुंचे. 2006 में मनमोहन सरकार में वाटर रिसोर्सेज मिनिस्टर रहे. 2008 में जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के स्टेट प्रेसिडेंट बना दिये गये. विकिलीक्स ने इनके बारे में भी एक केबल दिया था. कि 2006 के पहले सैफुद्दीन भारत सरकार और कश्मीर के अलगाववादी नेताओं में बात-चीत करा रहे थे. हाई लेवल पर. पर किसी वजह से नहीं हो पाई थी ये बात. सैफुद्दीन सोज कश्मीर में AFSPA हटाने के पक्ष में रहे हैं. कहते हैं कि कश्मीर इसके चलते बहुत प्रभावित हुआ है. सैफुद्दीन को परवेज मुशर्रफ का कश्मीर पर 4-पॉइंट फॉर्मूला पसंद आया था. पर बात नहीं हो पाई थी इसपे. क्योंकि मुशर्रफ कहते कुछ और थे, करते कुछ और. अब सैफुद्दीन सोज के बेटे सलमान सोज भी पॉलिटिक्स में आ चुके हैं. येल यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री है इनके पास. वर्ल्ड बैंक में काम भी किया है. अब वापस आ गये.
 
कश्मीर में 90 के दशक में तीन हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग्स हुई थीं- 1. दिसंबर 1989 को आतंकवादियों ने मुफ्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैय्या सईद को किडनैप कर लिया. मुफ्ती उस वक्त देश के होम मिनिस्टर थे. इसके बदले में बहुत सारे आतंकवादियों को छोड़ा गया. फारुख अब्दुल्ला ने उस वक्त कहा था कि फ्लडगेट खोल दिये गये हैं. ये बात सही भी थी. आतंकवादियों को एक नया तरीका मिल गया था. 2. अगस्त 1991 में सैफुद्दीन सोज की बेटी नाहिदा को किडनैप कर लिया गया. इस बार भी वही कहानी दुहराई गई. आतंकवादी छोड़े गये. कितने, ये नहीं पता. सीक्रेट डील थी. 3. सितंबर 1991 में गुलाम नबी आजाद के ब्रदर-इन-लॉ तसद्दुक को किडनैप कर लिया गया. फिर से वही कहानी दुहराई गई. गुलाम नबी भी उस वक्त केंद्र में मंत्री थे.

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