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लोकसभा में अमित शाह ने बताया मणिपुर में क्या-क्या हुआ था?

मणिपुर के बहाने ही सही संसद में उठा महिलाओं के साथ यौन शोषण का मुद्दा.

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अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दूसरे दिन मणिपुर मुद्दे पर हुई चर्चा.

तो ये मान लिया जाए कि 2024 का चुनावी बिगुल संसद के पटल से बज चुका है. अविश्वास प्रस्ताव के बहाने विपक्ष ने मोदी सरकार पर जो आरोप लगाने थे, लगा दिए. जवाब में मोदी सरकार ने बहस का जवाब ही नहीं दिया. संसद में अपना रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया. दो दिन की चर्चा का निचोड़ तो यही निकल रहा है.

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आज बहुत से सांसदों ने बहस की. लेकिन कीवर्ड दो ही बने - सांसदी बहाल होने पर लौटे राहुल गांधी. और अमित शाह, जिनके मंत्रालय से संबंधित विषय था - मणिपुर और आंतरिक सुरक्षा.

बहस के क्रम में राहुल पहले बोले, अमित शाह बाद में. लेकिन चूंकि प्रधानमंत्री के बोलने से पहले शाह की बात का वज़न ही सबसे ज़्यादा है, हम पहले उनके तर्कों पर गौर करेंगे. जैसा कि हमने पहले बताया, अमित शाह ने अपनी बात अविश्वास प्रस्ताव तक सीमित नहीं रखी. उन्होंने UPA के ज़माने में हुए कथित भ्रष्टाचार की बात की. किसानों की बात की. पाकिस्तान पर बात की. कश्मीर पर भी बात की. और अंत में वो आए मुद्दे पर - माने मणिपुर. शाह के आज के भाषण को आप 5 हिस्सों में बांट सकते हैं. एक-एक करके हम इन हिस्सों को समझने की कोशिश करेंगे.

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शाह ने कहा कि मणिपुर में नस्लीय हिंसा देखने को मिल रही है. जिसकी मुख्य वजह एक समुदाय में फैली संशय की भावना है. उन्होंने मणिपुर में होने वाली घुसपैठ का भी जिक्र किया.

इसके बाद शाह ने सदन में मणिपुर के उस वीडियो का ज़िक्र भी किया, जिसके चलते मणिपुर का जिन्न बोतल से बाहर आया. गृहमंत्री ने कहा कि अगर किसी के पास ऐसा वीडियो है तो क्या उसे वायरल करना चाहिए? ऐसे वीडियो को सबसे पहले पुलिस को देना चाहिए था, न कि वायरल करना चाहिए था. कम से कम उन महिलाओं के बारे में सोचना चाहिए था. यहां हम शाह की बात से पूरी तरह सहमत हैं. यौन उत्पीड़न का वीडियो जारी करना नैतिक ही नहीं, कानूनी रूप से भी गलत है. लेकिन दुर्भाग्य ये है कि पुलिस को सूचना तो पहले ही मिल गई थी. लेकिन वो वीडियो आने तक, माने ढाई महीने तक बैठी रही. वीडियो आने के बाद धड़ाधड़ गिरफ्तारियां होने लगीं. क्या हम ये कह रहे हैं कि वीडियो वायरल होना चाहिये था? कतई नहीं. हम बस ये बात रेखांकित कर रहे हैं कि पहले कानून टूटा. फिर उसकी सूचना देने में एक और कानून टूटा. और तब जाकर हमारी चेतना को धक्का लगा, हम हरकत में आए. इस हम में सब शामिल हैं. विपक्ष भी. लौटते हैं शाह के बयान पर. उन्होंने सदन को ये भी बताया कि मणिपुर को लेकर सरकार की तरफ से क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं.  

मणिपुर से इतर शाह के बयान में UPA सरकार पर ढेर सारे वार थे. शाह ने शुरुआत ही अविश्वास प्रस्ताव के इतिहास से की थी. उन्होंने 1993 के नोट फॉर वोट कांड का जिक्र किया. जब नरसिम्हा राव पर सरकार बचाने के लिए सांसद खरीदने का आरोप लगा था.

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शाह के बयान से ये भी साफ हुआ कि सरकार किसान आंदोलन और उसके बाद वापिस हुए कृषि कानूनों का प्रकरण भूली नहीं है. सरकार कानून लेकर आई. किसान महीनों दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे रहे. रास्ते बंद रहे. और MSP को लेकर सरकार के साथ कई राउंड की बैठक भी किसी काम न आ सकी. आखिरकार सरकार को कानून वापस लेना पड़ा. और विपक्ष ने सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप गढ़ा. इसलिए अमित शाह आज उस नैरेटिव को भी कांउटर कर रहे थे.  

इसके बाद शाह ने पाकिस्तान और कश्मीर के मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अंदर हमारी सरकार ने दो बार सर्जिकल स्ट्राइक किया. यही नहीं अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद से कश्मीर में पत्थरबाजी भी बंद हो गई है.

आखिर में शाह ने विपक्षी गठबंधन INDIA पर निशाना साधा. कहा कि जब कंपनियां दिवालिया हो जाती हैं तो अपना नाम बदल लेती हैं. UPA नाम तो ठीक था. बदल क्यों दिया गया.

आपने शाह के भाषण की पांच अहम बातें सुनीं. अब उनकी बात सुनिए, जिन्हें शाह जवाब दे रहे थे - राहुल गांधी. कल न सही, राहुल ने आज अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की. अडाणी से बात शुरू करते हुए राहुल गांधी ने कुछ कहानियां भारत जोड़ो यात्रा की भी सुनाई. इस दौरान ट्रेजरी बेंच की तरफ से कहा गया कि मणिपुर पर बोलिए न. कुछ देर बाद राहुल मणिपुर पर लौटे. उन्होंने मोदी सरकार पर एक-एक करके गंभीर आरोप लगाए. अगर राहुल गांधी की स्पीच सुनेंगे तो आपको कुछ कीवर्ड्स मिलेंगे - बंटवारा, भारत माता, देशद्रोह. ये वही कीवर्ड्स हैं जिन्हें बीजेपी की डिक्शनरी में हाई-लाइट किया गया है. बीजेपी के प्रवक्ता, सांसद और मंत्री चाहे प्रेस कॉन्फ्रेंस करें या फिर चुनावी रैलियों को संबोधित करें. कांग्रेस, राहुल गांधी और दूसरे नेताओं पर इन्हीं विषयों को लेकर आरोप लगाते हैं. राहुल ने आज इन्हीं कीवर्ड्स पर सरकार को घेरने की कोशिश की.

राहुल ने इस बात को भी रेखांकित किया कि वो मणिपुर गए, लेकिन प्रधानमंत्री नहीं. राहुल ने इस दौरान नूह हिंसा का भी जिक्र किया. मोदी सरकार पर नफरत की राजनीतिक करने का आरोप लगाया.

अविश्वास प्रस्ताव पर आज हुई चर्चा का एक हिस्सा महिलाओं पर केंद्रित रहा. मंशा भले ही ये ना रही हो. लेकिन देश में महिलाओं के उत्पीड़न पर आज सदन का ध्यान जरूर गया. राहुल ने भी जब मणिपुर की बात की तो उन्होंने मणिपुर की महिलाओं पर हुए अत्याचारों और उनके दुखों की तरफ ध्यान दिलाया. राहुल गांधी 29 जून को मणिपुर गए थे. दौरे में उन्होंने वहां के पीड़ितों से मुलाकात की थी. राहुल ने आज उसी मुलाकात की दो कहानियां सुनाई.

दरअसल, 19 जलाई तक हम सिर्फ इसी चर्चा में मशगूल थे कि मणिपुर के दो समुदाय आपस में लड़ रहे हैं. सभी का ऐसा मानना था कि न राज्य की पुलिस, न केंद्र के सुरक्षाबल और न डबल इंजन की सरकार उस हिंसा को रोक पा रहे हैं. लेकिन 19 जुलाई यानी संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले मणिपुर की दो महिलाओं के साथ हुई बर्बरता का वीडियो सामने आता है. और तब पूरे देश का ध्यान वहां की महिलाओं के रेप, उनके यौन शोषण, और हत्याओं पर गया. और हमने मणिपुर को एक मानव त्रासदी की तरह देखना शुरू किया.

मामला महिलाओं पर अत्याचार का बनने लगा, तो भाजपा ने इस बात को रेखांकित करना शुरू किया था कि दूसरे राज्यों में भी महिलाओं के खिलाफ हिंसा होती रही है. सदन में भी इसी लाइन पर बयान आए. लेकिन इसी बहाने देश की महिलाओं पर होने वाली हिंसा की बात तो हुई. खैर, 2014 के बाद से राहुल गांधी को काउंटर करने के लिए बीजेपी स्मृति ईरानी को मैदान में उतारती आई है. आज लोकसभा में भी कुछ ऐसा ही हुआ. राहुल गांधी ने भाषण खत्म किया और सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी उन्हें कांउटर करने के लिए खड़ी हुईं.

स्मृति ने पहले तो राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया. कहा कि मणिपुर देश का अभिन्न अंग है. वो कभी विभाजित नहीं किया जा सकता. इसके बाद उन्होंने सदन में कुछ तस्वीरें दिखाईं और उनकी कहानी सुनाई. ये कहानियां थीं कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के दौरान वहां की महिलाओं पर होने वाले भयानक अत्याचारों की. उन्होंने गिरिजा टिक्कू की कहानी सुनाई. गैंगरेप के बाद उनकी हत्या कर दी गई. सरला भट्ट की कहानी सुनाई. विस्थापन के दौरान जिनका गैंगरेप किया गया. स्मृति ने पूछा कि गिरिजा टिक्कू और सरला भट्ट को इंसाफ कब मिलेगा.

राहुल ने मणिपुर पर सरकार को घेरा था. स्मृति ने जब बोलना शुरू किया तो वो सदन को कश्मीर ले गईं. गिरिजा और सरला के बाद उन्होंने कश्मीर में महिलाओं के अधिकारों बात की. उन्होंने आरोप लगाया कि अनुच्छेद 370 की वजह से कश्मीर की बेटियों के अधिकार छिन रहे थे. और कांग्रेस चाहती है कि 370 को पुन:स्थापित किया जाए.

हालांकि जब जम्मू कश्मीर के श्रीनगर से सांसद फारुक अब्दुल्ला ने स्मृति के इस दावे का खंडन किया. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में बाल विवाह तो 1920 के दशक में ही बैन कर दिया गया था.

स्मृति राजस्थान के भीलवाड़ा में 14 साल की लड़की की रेप के बाद हत्या का जिक्र किया. उन्होंने इमरजेंसी के दौरान जेलों में महिला कैदियों के साथ होने वाले अत्याचारों का भी जिक्र किया. इसके बाद स्मृति ने खुले में शौच की वजह से महिलाओं पर होने वाले यौन शोषण का जिक्र किया.

इसके बाद नीतीश कुमार की पार्टी से राजीव रंजन ने भी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मणिपुर क मसले को हल्के में ले रही है, और जब वहां के हालातों को लेकर चर्चा होती है तब सत्ता पक्ष के लोग विभिन्न राज्यों की छिटपुट घटनाओं का जिक्र कर उसे जस्टिफाई करना चाहते हैं. 29 जुलाई को विपक्षी गठबंधन के 21 सांसद मणिपुर के दौरे पर गए थे. ललन सिंह भी इनमें शामिल थे. इस दौरे का जिक्र करते हुए ललन सिंह ने बताया कि राहत शिविरों में हिंसा प्रभावित महिलाओं का प्रसव कराया जा रहा है.

शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने चर्चा में हिस्सा लिया. अकाली दल ना INDIA का हिस्सा है ना NDA का. इसलिए हरसिमरत ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और केंद्र सरकार पर भी. 1984 के दंगों का जिक्र स्मृति ईरानी ने भी किया था. लेकिन हरसिमरत ने जिस तरफ ध्यान दिलाया वो इस देश के लिए बेहद अफसोसजनक है. उन्होंने कहा कि दुनिया में सिर्फ एक जगह ऐसी है जहां विधवा कॉलोनी है. दिल्ली में. 1984 के दंगों के बाद विधवाओं के लिए कॉलोनी बनाई गई थी. क्योंकि बड़े स्तर पर नरसंहार हुआ था. और आज कांग्रेस देश जलने की बात कर रही है. हालांकि उन्होंने सरकार को भी घेरा. हरसिमरत ने कहा कि बीजेपी को तभी 1984 याद आता है जब कांग्रेस पर निशाना साधना होता है. 9 साल में इस सरकार ने क्या किया दंगा पीड़ितों के लिए. क्या सरकार का कोई भी नुमाइंदा इन 9 सालों में विधवा कॉलोनी गया.

मोदी सरकार की तरफ से आज केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव भी बोले. उन्होंने मोदी सरकार के कामों का बखान तो किया ही साथ-साथ ये भी बताया कि उनकी सरकार ने आदिवासी समाज से पहली महिला राष्ट्रपति बनाने का काम भी किया है.

अंत में बात उस चीज़ की, जिसपर आज दिनभर टीवी चैनलों पर खूब हल्ला कटा. क्या राहुल गांधी ने सदन में फ्लाइंग किस दिया और महिला सांसदों का अपमान किया. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन में फ्लाइंग किस दिया ये जानते हुए भी कि यहां महिला सांसद भी बैठी हैं. इसके बाद एनडीए की महिला सांसदों ने पत्र के जरिए लोकसभा अध्यक्ष के पास शिकायत भी दर्ज कराई है.

राहुल गांधी पर इस आचरण का आरोप सदन की कार्यवाही के दौरान लगा है. आपकी निगाहें इस वक्त स्क्रीन पर वो वीडियो ढूंढ रहीं हैं तो साफ कर दें कि संसद टीवी के कैमरे पर ये वाकया कैद नहीं हुआ है. इंडिया टुडे ग्रुप की सीनियर कॉरसपॉन्डेंट मौसमी सिंह द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, जब राहुल गांधी संसद से बाहर निकल रहे थे तो उस वक्त उनके हाथ से कुछ कागज नीचे गिर गए. जिनको उठाने के लिए जैसे ही राहुल गांधी नीचे झुके बीजेपी के सांसद हंसने लगे. इसके बाद ही राहुल ने ट्रेजरी बेंच की ओर फ्लाइंग किस का इशारा दिया और निकल गए.

ख़ैर ये पहली बार नहीं है जब संसद में राहुल के हाव-भाव पर विवादों की दुंदुभी बजी हो. साल 2018 में उस वक्त भी लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी की सीट पर जाकर उन्हें गले लगाया, फिर अपनी सीट पर जाकर अपनी पार्टी की सांसदों की ओर आंख मारकर इशारा किया. दूसरा मामला 2019 का है. लोकेशन लोकसभा ही है. तब AIADMK के सांसद थंबीदुरई के स्पीच के दौरान राहुल गांधी मेज पीटते और अपने साथी सांसदों की ओर आंख मारते देखे गए थे.

इन चीज़ों का ज़िक्र प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में भी किया था. लेकिन ये सारी चीज़ें क्षेपक की तरह हैं. मुख्य मुद्दा है मणिपुर और अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष तथा सरकार के बीच होने वाली बहस. और उससे निकलने वाले संकेत. 

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