आजकल अख़बारों में अमेरीका के प्रेसिडेंट इलेक्शन की बहुत सी ख़बरें पढ़ने को मिल जाएंगी, जिसमें प्रेसिडेंशियल डिबेट, सीनेट, सिनेटर्स, जैसे शब्द सुनने को मिल जाएंगे. इन खबरों के साथ लिखा जा रहा है 'वर्ल्ड फर्स्ट डेमोक्रेसी की चुनावी कवरेज'. पर बबुआ इन पर बिसबास मत करना. किसी इतिहासकार के पास जाओ. वो बताएगा आपको कि लोकतंत्र की शुरुआत भारत के वैशाली से हुई थी. बिहार वाला वैशाली.
हमारे वैशाली से गणतंत्र 'चुराकर' ले गया था अमेरिका, अब देखो
ये जो ट्रंप और हिलेरी माइक लेकर लदे जा रहे हैं न, ये वैशाली में होता था पहले.

हिस्टोरिकल एविडेंस के हिसाब से छठी शताब्दी में वैशाली में ही दुनिया का पहला गणतंत्र यानि 'रिपब्लिक' कायम हुआ था. सबसे पहले. आज जो अमेरिका में सीनेट है, जहां अमेरिकी सिनेटर्स अमेरिका के लिए पॉलिसी बनाते हैं. ये सिस्टम भी वैशाली रिपब्लिक में था. वहां उस समय छोटी-छोटी समितियां थी, जो रिपब्लिक के नियमों और नीतियों को बनाते थे.

इस समय आपको अक्सर अख़बारों और टीवी चैनलों पर अमेरिका में हो रहे प्रेसिडेंशियल डिबेट्स की खबर देखने को मिलेगी. आपको पता है ऐसी ही बहसें आज से लगभग 2400 साल पहले वैशाली गणराज्य में अपने नए गणराजा को चुनने के लिए होती थीं. इतिहासकारों का ये भी मानना है कि अमेरिका में जब लोकतंत्र का ताना-बाना बुना जा रहा था, तब वहां के पॉलिसी-मेकर्स के दिमाग में वैशाली के गणतंत्र का मॉड्यूल चल रहा था.
आइए आपको बताते हैं कि कैसे आज से 2400 साल पहले ही वैशाली में गणतंत्र की गंगा बहने लगी थी.

दरअसल वैशाली शहर वज्जी महाजनपद की राजधानी थी. महाजनपद बोले तो प्राचीन भारत के शक्तिशाली राज्यों में से एक. और ये ताकतवर था अपने गणतंत्र की वजह से. वैशाली में गणतंत्र की स्थापना लिच्छवियों ने की थी. लिच्छवियों का वास्ता एक हिमालयन ट्राइब लिच्छ से था. वैशाली गणराज्य को लिच्छवियों ने खड़ा किया था और ये इसलिए किया गया था, ताकि बाहरी आक्रमणकारियों से बचा जा सके. और अगर कोई बाहर से आक्रमण करे तो जनता का पूरा सपोर्ट मिले.
गणराज्य बनते ही हुआ भी यही. वैशाली सबसे ताकतवर राज्य बन गया और इसी तरह एक नया सिस्टम भी ईजाद हुआ, जिसे हम गणतंत्र कहते हैं. इसे दुनिया के ज्यादातर देशों ने अपनाया है और मॉडर्न ग्लोबल वर्ल्ड का बेस्ट सिस्टम माना गया. आज इंडिया हो या यूरोप का कोई देश या फिर अमेरिका, सब इसी सिस्टम को मानते हैं, जिसकी शुरुआत आज से 2600 साल पहले भारत के वैशाली में हुई थी.

हिमालय की तराई से लेकर गंगा के बीच फैली भूमि पर लिच्छवियों के संघ द्वारा गणतंत्र सिस्टम की शुरूआत की गई थी, जिसका नाम 'वैशाली गणराज्य' था. ईसा से लगभग छठी सदी पहले यहां के शासक जनता द्वारा चुने गए छोटे-छोटे पंच द्वारा सेलेक्ट होने लगे और गणतंत्र नाम का सिस्टम अपने वजूद में आया. आज अक्खे वर्ल्ड में जिस लोकशाही को अपनाया जा रहा है, वो 'वैशाली गणराज्य' के लिच्छवी शासकों की ही देन है. वैशाली को हिस्टोरियन गणतंत्र का मक्का भी कहते हैं. पुरानी वैशाली शहर बहुतै खूबसूरत और सुरक्षित था, जो एक-दूसरे से कुछ दूरी पर बनी हुई तीन दीवारों से घिरा था, ताकि गणतंत्र के दुश्मन से बचा जा सके.

हालांकि, आज के गणराज्य में और वैशाली के गणराज्य में बहुत से फर्क हैं, पर आइडिया वहीं से लिया गया था गुरू. वैशाली गणराज्य को कंट्रोल करने वाली समितियां हुआ करती थीं, जो हर तरह के कामों पर बारीकी से नजर रखती थीं. समय-समय पर गणराज्य की पॉलिसीज में तब्दीली लाती थीं, जो काम आज के समय में किसी डेमोक्रेटिक कंट्री में सांसद करते हैं. तो भैया कुल-मिलाकर बात ये है कि आज जो अमेरिकी चुनावों पर जो पूरी दुनिया के लोग गलियों में और नुक्कड़ों पर अपना सिर खपा रहे हैं. कभी ट्रंप को तो कभी हिलेरी को जिता रहे हैं. उनकी बहस पर अपने इंट्लेक्चुअल राय पेल रहे हैं. पर ये सिस्टम आया कहां से? अपने भारत से न.
भारत माता की जय
दी लल्लनटॉप के लिए ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने लिखी है.









