. 'असम में भाजपा की जीत के नायक' जैसी हेडलाइन्स के साथ. इसी तरह 2014 लोकसभा चुनाव निपट जाने के बाद एक चेहरा नजर आया होगा. जिसे चुनावी जीत का पूरा क्रेडिट दिया गया. चुनाव जिताने में इनका क्रेडिट बनता है. ये तो साफ है लेकिन इन केसों में बहुत सी बातें दब जाती हैं या दबा दी जाती हैं. इंटरनेट का जमाना है भाई. सब कुछ बड़ा क्विक सा होता है. एक प्रोफाइल होगा आपके सामने. और उससे जुड़ा चमत्कार. कि इतनी कम उम्र में इसने पूरे देश की स्ट्रैटजी तय करके सरकार बना दी. आगे हेडलाइन्स चलती रहती हैं. पीछे गालियां मिलती रहती हैं. "क्या भाई, कार्यकर्ता क्या सिर्फ घास छील रहे थे? सब इनके ही पुन्य प्रताप से हो गया."
हम आपको उस चेहरे से रूबरू करा रहे हैं जो सच में एक स्टेट की सरकार का दिमाग है. वो सरकार है बिहार की. चेहरा नीतीश कुमार का. और दिमाग का नाम है रामचंद्र प्रसाद सिंह. दो दशक से ज्यादा हो रहे हैं इस आदमी को बिहार की नीति- रीति तय करते हुए. दो दशक से ज्यादा हो रहे हैं बिहार में जेडीयू और नीतीश कुमार को संभालते हुए. जेडीयू की तरफ से एक बार फिर से राज्यसभा सांसद चुने गए हैं रामचंद्र प्रसाद सिंह.

रामचंद्र प्रसाद को शॉर्ट में RCP कहते हैं. जेडीयू के लिए चुनावों में स्ट्रेटजी तय करना, स्टेट की ब्यूरोक्रेसी को कंट्रोल करना, माने उनकी पोस्टिंग-ट्रांसफर वगैरह डिसाइड करना, सरकार की नीतियां बनाना और उनको लागू करने का A2Z जिम्मा इनका है. जेडीयू में नंबर दो की हैसियत रखने वाले और नीतीश कुमार के दिमाग(दाहिने हाथ नहीं) के बारे में कुछ और जानते हैं.
जेएनयू से जेडीयू तक का लंबा सफर
शुरुआती पढ़ाई, शादी और सर्विसमुस्तफापुर, नालंदा में रहते थे दुक्खालालो देवी और सुखदेव नारायण सिंह. उन्हीं के घर पैदा हुए रामचंद्र प्रसाद. साल था 1958, तारीख 6 जुलाई. जाति बिरादरी नीतीश कुमार वाली ही है. अवधिया कुर्मी. जाति की बात करना यहां इसलिए जरूरी है कि इंडियन पॉलिटिक्स अभी काफी हद तक जाति से ही तय होती है. खास तौर से यूपी बिहार की. रामचंद्र की शुरुआती पढ़ाई नालंदा में ही हुई. फिर इतिहास से ग्रेजुएशन किया, पटना यूनिवर्सिटी से. इसी दौरान 21 मई सन 1982 को गिरिजा देवी से शादी हो गई. एक नई जिम्मेदारी ओढ़ ली घर गृहस्थी की.
उसके बाद की पढ़ाई के लिए दिल्ली को ठिकाना बनाया और जेएनयू में एडमीशन लिया. जेएनयू, जो बीते कुछ समय से राष्ट्रद्रोहियों का अड्डा कहा जा रहा है. राजस्थान के एक विधायक ने वहां इस्तेमाल होने वाले कॉन्डम का ब्योरा पेश किया और वेश्यावृत्ति का अड्डा बताया. जेएनयू रोज किसी न किसी के निशाने पर रहने लगा है. जबकि वहां से निकले हुए कई लोग सरकार में हैं.
खैर जेएनयू की कहानी सुनाने बैठ जाएंगे तो बोर हो जाओगे. अभी तो RCP पर ही बातों की रेल चलने दो. तो जेएनयू से एक्सटर्नल अफेयर स्टडी में MA करने के बाद 1984 में सिविल सर्विस ज्वाइन की. जी हां, रामचंद्र यूपी कैडर के IAS हैं. ये वो दौर था जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश बड़ी राजनैतिक उठापटक से जूझ रहा था. इसी गरम माहौल में इनकी सरकारी सर्विस शुरू हुई.

उत्तर प्रदेश सरकार के शासन में साल 1997 तक काम किया. 1993 से 97 तक कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रहे. रामपुर, बाराबंकी, हमीरपुर औऱ फतेहपुर ट्रांसफर होता रहा.
नीतीश कुमार से मुलाकात और पॉलिटिक्स में एंट्री
ये पॉलिटिक्स का अटल बिहारी काल था. हमारी उम्र के लड़के पापा से छोटी साइकिल लेने की जिद किया करते थे. टीवी पर शक्तिमान शुरू हो चुका था. सन 1998-99 में NDA की सरकार थी और अटल बिहारी बाजपेई प्रधानमंत्री थे. उनकी कैबिनेट में नीतीश कुमार को पहले रेल और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय मिला. फिर कृषि मंत्रालय. नीतीश मंत्री थे, रामचंद्र उनके पर्सनल सेक्रेट्री. उसी दौरान रामचंद्र और नीतीश करीब आए. दोनों ने एकदूसरे को समझा. फिर एक ऐसा अनकहा रिश्ता बना जिसमें दोनों ने अपने रोल चुन लिए. जिन पर अब तक दोनों कायम हैं और RCP बिना सामने आए नीतीश की फैमिली से लेकर चुनाव, सरकार और ब्यूरोक्रेसी सब संभालते हैं.

नीतीश कुमार से हमेशा इनकी बनती रही. इनके काम से खुश नीतीश ने इनको पार्टी की तरफ से पहली बार राज्यसभा में भेजा सन 2010 में. इस बार फिर सांसद चुनने का नंबर आया तो इनको आगे कर दिया. कहते हैं इनको नीतीश के साथ वैसे ही देखा जाता है जैसे इंदिरा गांधी के साथ आरके धवन को देखा जाता था.

सिंपल पर्सनैलिटी दमदार कंट्रोलर
बहुत सीधा सादा रहन सहन है. सांसद बनने के लिए जिस एफिडेविट में संपत्ति का ब्योरा देखोगे तब पता चलेगा. पता है कॉमेडियन कपिल शर्मा टीवी इंडस्ट्री में आने पर पहले साल इतना कमा लेता है कि 50 लाख की रेंज रोवर कार से घूमता है. छोटे छोटे थानों के दारोगा भी 20-30 साल की सर्विस में करोड़ों बना लेते हैं. किसी पार्टी के छुटभैये नेता से साठ गांठ हो तो बात ही क्या. रामचंद्र न जो कागजात पेश किए हैं उसके हिसाब से उनकी कुल चल-अचल संपत्ति मिलाकर कीमत होती है दो करोड़ 38 लाख रुपए.

Source: Facebook
लाइफ स्टाइल बेशक सादा है लेकिन ब्यूरोक्रेसी के दांव पेच खूब समझते हैं. घाट घाट का पानी पिए हैं यूपी में सर्विस करते हुए. वो सारा इकट्ठा किया एक्सपीरिएंस अब सरकार चलाने के काम आता है.
अभी बिहार में शराब बैन है. क्या लगता है, किसके बस का काम था ये? नशे में मानो पंजाब जैसा तो नहीं डूबा बिहार लेकिन फिर देसी और कच्ची दारू में शायद ये पंजाब से आगे हो. इस स्टेट में शराबबंदी के लिए जिस सख्ती की जरूरत थी उसमें जरा सी भी कमी नहीं की रामचंद्र प्रसाद ने.

तो भैया कोई स्ट्रेटजी मेकर एक चुनाव से नहीं बनता. न हीं ये जरूरी है कि हर चमक दमक वाला चेहरा पार्टी को थामने वाला खंभा हो. राजनीतिक पार्टी भी कच्चे घड़े जैसी है. एक आदमी बाहर से चमका के रखता है. मेन कारीगर तो अंदर होते हैं जो ठोंक पीट कर उसका शेप सही करते रहते हैं.






















