The Lallantop

एक वकील साहब, जिन्हें देशभक्तों ने गद्दार घोषित कर दिया

सिने संन्यासी 5- 'ब्रिज ऑफ स्पाईज' और 'सिकारियो' पर बात. सीरीज की आखिरी कड़ी में.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
सिने संन्यासी. ‘दी लल्लनटॉप’ की सीरीज. जिसमें एक जवान साधुनुमा आदमी बात कर रहा है. आपसे. फिलहाल हॉलीवुड सिनेमा पर. वह साधु है क्योंकि उसे अपनी नाम पहचान या ऑस्कर के शोर से कोई मतलब नहीं. उसकी बस एक ही हवस है. भक्ति की तरह. फिल्में. पहली किस्त में उसने बताया कि अवॉर्ड तो बस एक फरेब भर हैं. जिसके चलते हम कई को जानते हैं, तो कई हारकर पीछे छूट जाते हैं. भले ही वह और भी हकदार हों. इसी किस्त में फिल्म ‘दी बीस्ट्स ऑफ नो नेशन’ की बात हुई. दूसरी किस्त में बात हुई ‘द डैनिश गर्ल और एक्सपेरिमेंटर’ पर. जिसके बारे में कुछ सलीके के लोग कहते हैं कि अगर एक्टिंग भर ही पैमाना होती. कोई कवित्तपूर्ण न्याय करने का दबाव न होता तो बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड ‘द डैनिश गर्ल’ के लिए एडी रेडमेइन को ही मिलता. तीसरी किस्त में सिने संन्यासी ने इस बार की बेस्ट फिल्म का ऑस्कर अवॉर्ड जीतने वाली ‘स्पॉटलाइट’ की बात की. लगे हाथ फिल्म ‘द बिग शॉर्ट’ के बारे में बताया. चौथी किस्त, जिसमें बात हुई फिल्म ‘ट्रम्बो’ की. हॉलीवुड के टॉप स्क्रीन राइटर हुआ करते थे डॉल्टन ट्रम्बो. 1947 में पॉलिटिकल रुझान की वजह से उनको जेल में डाल दिया गया था. दूसरी फिल्म थी ‘स्ट्रेट आउटा कॉम्पटन’. और अब पांचवी किस्त में 'सिकारियो' और 'ब्रिज ऑफ स्पाईज' की बात होगी. सिकारियो कहानी है एक एफबीआई एजेंट केट मेसर की. जिसे ड्रग तस्करी वाले गिरोहों से निपटने वाली स्पेशल टास्क फोर्स की गुप्त टीम का हिस्सा बनाया जाता है. लेकिन टीम के तौर तरीकों से उसे काफी प्रॉब्लम है. ब्रिज ऑफ स्पाईज एक वकील का किस्सा है. समस्या ये है कि वो वकील होने से पहले खुद को इंसान पाता है. और मानवाधिकार की रक्षा के लिए एक ऐसे आदमी को छुड़ा कर रूस को वापस सौंपने जाता है, जिस पर जासूसी का आरोप है. सोचो उसको देशद्रोही घोषित कर क्या हाल किया गया होगा उसके साथ. तो बिना देरी किए मिलिए अपने सिने संन्यासी से… Sicario Sicario poster पिछले साल हमने उससे पहले के दो सालों से भी ज्यादा ड्रग केसों में कार्रवाही की. क्या इसका असर तुम सड़कों पर महसूस कर पा रही हो? - एफबीआई एजेंट केट मेसर से उनके बॉस कहते हैं. वो एक ड्रग कार्टेल को पकड़ने के लिए बनी रक्षा विभाग और सीआईए के अंडरकवर ऑफिसर की टीम में शामिल की गई है. ये टीम कुछ बढ़ा धमाका करने वाली है, लेकिन केट देखती है कि कानून का पालन नहीं हो रहा हैं. वो ईमानदार अधिकारी है. अपने बॉस से जब शिकायत करने पहुंचती तो उनका जवाब ऐसा होता है. मेक्सिको या कोलंबिया जैसे देशों की सीमा से अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी होती है. युवा बड़े पैमाने पर सेवन करते हैं. बीते कई दशकों से ये मुल्क वॉर ऑन ड्रग्स छेड़कर बैठा है. अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं लेकिन ड्रग्स के यूज़ में जरा भी कमी नहीं आई, उल्टे हत्याओं का दौर बढ़ा है. ड्रग कार्टेल मजबूत हुए हैं. अमेरिका के अपने ही नागरिक जेलों में बढ़ते जाते हैं. यहां डेनी विलेनुव की "सिकारियो’ आती है. कहानी एक एफबीआई एजेंट केट मेसर (एमिली ब्लंट) से शुरू होती है. उसे एक स्पेशल टास्क फोर्स में शामिल किया जाता है. इसमें रक्षा विभाग के लोग और सीआईए के अंडरकवर एजेंट मैट (जॉश ब्रोलिन) शामिल हैं. बेहद सीमित सी ये टीम क्या करना चाह रही है ये केट को अंत तक ज्ञात नहीं हो पाता. वो एक कानून-कायदे से चलने वाली ऑफिसर है और मैट को किसी मेक्सिकन कार्टेल के अपराध की जांच नहीं करनी है बल्कि कुछ ऐसा करना है जिससे कार्टेल में ऊपर तक भय की लहर दौड़ जाए. केट को ये ठीक नहीं लगता. वो ऐसे ऑपरेशंस में कोई तुक नहीं देखती. "सिकारियो’ के साथ स्थिति ये है कि आपको ये सब बातें खुद ऑब्जर्व करनी होंगी. क्योंकि इसका मूड, गति और रहस्य ऐसा है कि क्या हो रहा है ये पूरी तरह अंत में ही जान पाते हैं. और फिल्म देखने के बाद भी आप घंटों बैठकर सोच सकते हैं कि परतों में कहानी के कौन से किस्से रह ही गए. हम इन परतों में पढ़ सकते हैं कि केट "वॉर’ जैसी टर्म में खास यकीन नहीं रखती. क्योंकि मैट द्वारा सोचे गए बड़े मिशन जैसी चीजों से ड्रग के उपभोग या तस्करी में कोई कमी नहीं आनी है. कभी आई ही नहीं है. हम उरुग्वे का उदाहरण भी ला सकते हैं जहां होज़े मुजीका ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने कार्यकाल में मारिजुआना को कानूनी कर दिया था. उनका कहना था कि उनका मुल्क सामाजिक प्रयोगों की लाइब्रेरी है जिससे दुनिया सीख सकती है. उनका कहना था कि हर आदमी जो भी करना चाहे उसके लिए स्वतंत्र होना चाहिए. ड्रग्स को गैर-कानूनी करके हम उसकी तस्करी को बढ़ावा देते हैं और फिर अपने ही लोगों को उसके सेवन के लिए जेल में डाल देते हैं. इससे वो और प्रोत्साहित होते है. बजाय इसके इसे कानूनी करने के बाद अपराधों की संख्या और तस्करी न के बराबर रह जाएगी. सरकार इसमें ये करेगी कि सेवन करने वालों को रजिस्टर करेगी. जो एक सीमा से ज्यादा नशा कर रहे होंगे उन्हें काउंसलिंग की सुविधा दी जाएगी और नशा छोड़ने में मदद की जाएगी. मैं नहीं समझता इससे बेहतर और परिष्कृत तरीका कोई और हो सकता है. अमेरिका ने कोई चार दशकों से ड्रग्स के कारोबार में कमी लाने की कोशिश की है. लेकिन ये ईमानदार और बुद्धिमान नहीं. फिल्म में एक स्थान पर मैट का पात्र कहता भी है कि "हम बस ड्रग्स सेवन की मांग और पूर्ति में संतुलन बनाए रखने का काम कर रहे हैं. https://www.youtube.com/watch?v=sR0SDT2GeFg "सिकारियो’ एक एक्शन थ्रिलर है. सम्मोहित करने वाली. सबसे ताकतवर है बेनसियो डेल टोरो. वे बेहद कद्दावर हैं. उनका अभिनय और अभिव्यक्ति जबरदस्त रूप से मैच्योर हो चुकी है. इस विषय पर बेहद सुलझी सोच बताते हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा भी है िक कुछ ड्रग्स को कानूनी कर सकते हैं. Bridge of Spies bridge वहां खड़े तुम, मुझे एक आदमी की याद दिलाते हो जो हमारे घर आया करता था. मेरे पिता कहा करते थे, इस आदमी को देखो. मैंने ऐसा ही किया. हर बार जब वो मेरे घर आया. और एक बार भी उसने कभी कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया. .. फिर एक बार जब मैं तुम्हारे बेटे की उम्र का था, हमारे घर पर बॉर्डर गार्ड्स ने हमला कर दिया. वो दर्जनों थे. मेरी पिता को पीटा गया, मेरी मां को पीटा गया. और वो आदमी, मेरे पिता का दोस्त, उसे भी पीटा गया. और मैंने उस आदमी को देखा.. हर बार जब मारते, वो फिर से पलट कर खड़ा हो जाता. तो वे उसे और जोर से मारते. लेकिन वो फिर भी अपने पैरों पर खड़ा हो जाता. मुझे लगता है इसी कारण से उन्होंने उसे और नहीं मारा और जीने के लिए छोड़ दिया. .. स्टायकी मूज़िक.. मुझे याद ये वो ऐसा बोल रहे थे.. इसका मतलब कुछ यूं होता है .. स्टैंडिंग मैन. - रूडॉल्फ ऐबल, 1957 में ब्रुकलिन (अमेरिका) में पकड़ा गया सोवियत संघ का जासूस अपने वकील जेम्स डोनोवन से कहता है. डोनोवन अमेरिका के संविधान और कानून की मूल भावना के साथ खड़ा होते हुए रूडॉल्फ का न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व करता है और उसके लिए उसे अपने पूरे मुल्क की घृणा का पात्र बनना पड़ता है. लेकिन वो डटा रहता है. शाहिद आज़मी को याद करें. मुंबई के वकील. जो मानवाधिकारों के लिए लड़ते थे, आतंकवाद के आरोप में पकड़ लिए गए मुस्लिम युवकों की वकालत करते थे. 2010 में अपने ही दफ्तर में दिन दहाड़े उन्हें गोली मार दी गई. जिनकी वकालत वे करते थे वो तो घोषित जासूस या आतंकी भी न थे. आज भी स्थिति वैसी ही है, बद्तर भी है. जबकि इससे दशकों पहले 1957 में आइए. अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध चरम पर था. वो अमेरिका आज जितना ओपन न था. राष्ट्रवाद से उनकी भुजाएं फड़कती थी और बात सोवियत जासूस या साम्यवाद की हो तो अमेरिकी नागरिक आदमख़ोर हो जाते थे. ऐसे ही दौर में रूडोल्फ ऐबल पकड़ा जाता है. वो अमेरिकी सरकार के साथ सहयोग करने से इनकार कर देता है. इन्हें डर लगता है कि न्यायपूर्ण सुनवाई न चली तो सोवियत संघ इसका इस्तेमाल प्रचार हथकंडे के तौर पर करने लगेगा. तो बीमा वकील जेम्स डोनोवन (टॉम हैंक्स) को ऐबल का केस लड़ने के लिए नियुक्त किया जाता है.   डोनोवन की भुजा राष्ट्रवाद से नहीं फड़कती. वो कम्युनिस्ट भी नहीं है. वो संविधान से चलता है. वकालत के पेशे के मूल मूल्यों के मुताबिक चलता है. जब ऐबल उसे कहता है कि "तुमने कभी पूछा नहीं कि मुझ पर लगाए गए आरोप सही हैं कि नहीं? क्या वाकई में मैं एक जासूस हूं?’ तो डोनोवन का जवाब होता है, "तुम्हारे खिलाफ एक केस दर्ज होता है. इससे फर्क नहीं पड़ता कि तुमने ये किया है कि नहीं. स्टेट को ये साबित करना होगा कि तुम एक जासूस हो.’ इसी तरह एक सीन में जब जज दोनों पक्षों के वकीलों को अपने चैंबर में बुलाते हैं तो डोनोवन किसी भी आम केस की तरह प्रक्रिया की बात करने लगते हैं और जज भड़क जाते हैं. कहते हैं कि तुम्हे दाद देते हैं कि ये केस झेल रहे हो लेकिन तु्म्हारी मति फिर गई है क्या, ये एक सोवियत जासूस है. मेरे कोर्ट में नाटक नहीं करना. https://www.youtube.com/watch?v=mBBuzHrZBro एक जज के मुंह से ये सुनकर रूह कांप जाती है. लेकिन डोनोवन के मूल्य इतने ऊंचे हैं कि इनका सदियां बीतने के बाद भी अवमूल्यन नहीं होता. जब वो ट्रेन से जा रहा होता है और साथी यात्री अखबार के पहले पन्ने पर पढ़ते हैं कि यही वो आदमी है जो जासूस का केस यूं लड़ रहा है तो वे उसे हिकारत की नजर से देखते हैं. ऐसे लोग जिन्हें कानून और सभ्यताओं की कोई जानकारी नहीं है, वे तुरंत अपनी जंगली राय बना लेते हैं और जो त्रुटिहीन इंसान है उसका मजाक बना देते हैं. कहानी बाद में रोचक घुमावों से गुजरती है. अंत में डोनोवन की बुद्धिमता से अमेरिका को फायदा होता है और उसकी योग्यताओं के कारण बाद के वर्षों में राष्ट्रपति केनेडी अमेरिका की ओर से कई अहम घटनाओं में वार्ताकार के तौर पर उनकी सेवाएं लेते हैं. 1962 में उन्हें क्यूबा भेजा गया ताकि वे 1,113 बंदियों की रिहाई के लिए शर्तों पर बात कर सकें. जब बात खत्म हुई तो डोनोवन 9,703 लोगों की रिहाई तय करवा चुके थे.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement