'चिंटू जी' को याद किया जा रहा है. तमाम तरीकों से. लेकिन एक बेटा अपने बाप को बुरी तरह मिस कर रहा होगा. रनबीर कपूर.
रनबीर कपूर ने कहा था कि वो हमेशा अपने पिता से फ्रेंडली होना चाहते थे लेकिन उनके बीच रिश्ता फॉर्मल किस्म का रहा. ऋषि कपूर ने भी एक पुराने इंटरव्यू
में कहा था कि वो रनबीर के दोस्त नहीं बन पाए. इसका उन्हें अफसोस रहेगा. उन्होंने कहा कि हमारे बीच एक ग्लास की दीवार है. ये भी बोला कि बाप-बेटे के बीच में थोड़ा डिस्टेंस होना चाहिए. ट्रैडिशनल बाप-बेटे वाले संबंध के बीच ऋषि कपूर को लेकर रनबीर के मन में काफी सम्मान भी रहा. उन्होंने ऋषि कपूर की ऑटोबायोग्राफी 'खुल्लम-खुल्ला' की भूमिका लिखी थी. इसके अलावा कई इंटरव्यू में भी उन्होंने पिता के बारे में अपनी राय रखी.
रनबीर की अपने पिता के बारे में कही गई कुछ बातें आपको पढ़वाते हैं:
1. 'मेरी आवाज़ डैड जैसी है'
रनबीर ने एक इंटव्यू में बताया, "मेरे माता-पिता, दादा और परदादा का असर ज़ाहिर है मुझ पर रहा है. मेरे पापा न्यूट्रल ऐक्टर हैं, बग़ैर किसी खास स्टाइल के. मैं मां की तरह दिखता हूं लेकिन मेरी आवाज़ मेरे डैड जैसी है. 40 साल के अपने फिल्म करियर में वो 10 गुना ज़्यादा उत्साहित हैं और फिल्मों को लेकर उनमें जुनून है. वो मुझसे 10 गुना ज़्यादा बिजी हैं."
2. 'हमारे बीच फोन वाला रिश्ता नहीं है'
पिता के साथ अपने फॉर्मल संबंधों पर रनबीर कहते हैं,
मुझे लगता है डैड ने मेरे साथ अपना रिश्ता उस तरह ढाला, जैसा उनका अपने पिता के साथ था. और ये सही है कि मैंने उनके साथ एक खास लाइन कभी क्रॉस नहीं की. कभी-कभी मेरी इच्छा होती है कि मैं उनके साथ फ्रेंडली हो सकूं या उनके साथ ज़्यादा समय बिताऊं. कभी-कभी तो मुझे लगता है कि सिर्फ फोन उठाऊं और उनसे पूछूं, ''डैड, आप कैसे हैं?' लेकिन हमारे बीच ऐसा नहीं है. हमारे बीच फोन वाला रिश्ता नहीं है. ये है कि वो मुझे मेसेज करते हैं.

1970 में राज कपूर की फिल्म 'मेरा नाम जोकर' में ऋषि कपूर बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट नजर आए.
3. 'मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चों के साथ भी रिश्ते फॉर्मल रहें'
बाप-बेटे के रिलेशनशिप के बारे में रनबीर ने कहा,
जब मेरी शादी होगी और बच्चे होंगे, तब चाहूंगा कि हमारे बीच रिश्ते उतने फॉर्मल न रहें जितने मेरे रिश्ते मेरे पिता के साथ हैं. मैं बच्चों के साथ ज़्यादा फ्रेंडली रहूंगा, ज़्यादा वक्त बिताउंगा. ये कहने का मतलब ये नहीं है कि मैं अपने पिता से प्यार नहीं करता. मैं उनसे बेहद प्यार करता हूं और उनका सम्मान करता हूं. मैं उनसे इंस्पायर होता हूं और उन्हें कभी निराश नहीं करना चाहूंगा.

1973 में बॉबी से उन्होंने बतौर लीड ऐक्टर फिल्मी करियर शुरू किया. ये फिल्म सुपरहिट रही थी. फोटो: India Today
4. 'सोशल मीडिया पर्सनल चीज़ है लेकिन उनका कोई एजेंडा नहीं'
बाद के दिनों में ऋषि कपूर ट्विटर पर काफी सक्रिय थे. कुछ विवाद भी उनके हुए. इस पर रनबीर ने कहा था,
वो ट्विटर पर कैसे हैं, इस पर मेरी कोई राय नहीं है. हालांकि, लोग मुझसे सबसे पहले इसी को लेकर सवाल करते हैं. मैं बस ये कह सकता हूं कि जब तक वो ईमानदार हैं और उन्हें इसमें मज़ा आ रहा है, तब तक सब सही है. सोशल मीडिया बेहद पर्सनल चीज़ है. वो बेबाक बोलते हैं, इस वजह से कई बार निशाने पर भी आ जाते हैं. लेकिन मैं जानता हूं कि उनका कोई एजेंडा या छिपा हुआ उद्देश्य नहीं है.

ऋषि कपूर की ऑटोबायोग्राफी 'खुल्लम-खुल्ला' की भूमिका रनबीर ने लिखी थी.
5. 'मां से प्रेम करते हैं'
रनबीर बताते हैं कि वो अपनी मां नीतू सिंह के ज़्यादा करीब हैं. वो कहते हैं,
वो मेरी मां के अच्छे पति रहे हैं. मैं अपनी मां के ज़्यादा करीब हूं. मेरे मां-बाप के भी झगड़े हुए हैं. खीझ जाने की हद तक वाले लेकिन वो मेरी मां से तगड़ी मोहब्बत करते हैं. उन्होंने खूब सारा सम्मान दिया, प्यार दिया, देख-भाल की और अब भी करते हैं. मेरे लिए और मेरी बहन के लिए ये बहुत मायने रखता है.

ऋषि कपूर और उनकी पत्नी नीतू सिंह ने करीब 12 फिल्में साथ कीं. फोटो: India Today
6. 'काम का सम्मान करना सिखाया'
पिता के बारे में रनबीर का मानना है कि वो डीटेल्स पसंद करते थे. उन्होंने कहा, उन्होंने मुझे अपने काम का सम्मान करना सिखाया. मैं 2006-07 में ऐक्टर बनाया. मैं तब अपने मां-बाप के साथ रहता था. हर सुबह पिता को शूट के लिए तैयार होते देखता. उस उम्र में भी उनका उत्साह देखता. मतलब इतने साल इंडस्ट्री में होने के बाद भी. ये उनमें था. अपना क्राफ्ट दुरुस्त करते रहना, अपने कॉस्ट्यूम की शॉपिंग करना या हर मिनट उन्हें देखना.
7. 'उनमें बच्चों जैसा उत्साह था'
दूसरी इनिंग्स में ऋषि कपूर का काम काफी पसंद किया गया. इस बारे में रनबीर बताते हैं,
दूसरी इनिंग्स में उन्होंने ख़ुद को नए अंदाज़ में पेश करने में बहुत मेहनत की. उन्होंने किरदारों के साथ प्रयोग करने शुरू किए. मैंने उनके भीतर एक बच्चे जैसा उत्साह देखा. उनका उद्देश्य हमेशा उसे बेहतर करना था, जो उन्हें ऑफर किया गया है.

फिल्म चादंनी में श्रीदेवी के साथ ऋषि कपूर. फोटो: यूट्यूब स्क्रीनग्रैब
8. 'वो लाउड भले लगते हैं पर रिज़र्व रहते हैं'
ऋषि कपूर कई बार मीडिया वालों पर भड़कने की वजह से चर्चा में आए. रनबीर कहते हैं ,
मुझे पता है मेरे पिता लाउड लगते हैं, लेकिन सच ये है कि वो बेहद रिज़र्व रहते हैं. वो ख़ुद को भी दुनिया के सामने आने नहीं देते. शायद इसलिए कि वो एक ऐक्टर हैं. बहुत से इमोशंस वो अपने अंदर छिपा लेते हैं.

ऋषि कपूर कैंसर के इलाज के लिए न्यूयॉर्क गए थे लेकिन पिछले साल वापस आ गए. इसके बाद उनकी सेहत में सुधार नहीं हुआ. फरवरी में दो बार अस्पताल में एडमिट हुए.
9. 'वज़न को परफॉर्मेंस के बीच नहीं आने दिया
1980-90 के दशक की ऋषि कपूर की फिल्मों के बारे में रनबीर कहते हैं,
जिस तरह उन्होंने गाने किए, जिस तरह अपनी हीरोइनों के साथ परदे पर दिखे, वो काबिले तारीफ है. यहां मुझे ये भी कहना चाहिए कि वो ऐसे ऐक्टर थे, जिनका वज़न ज़्यादा था. यहां तक कि जब तमाम ऐक्टर्स अपने वज़न को लेकर चिंतित होने लगे, वो वैसे ही बने रहे. इसे उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस के बीच में नहीं आने दिया. इस लिहाज से उन्होंने कई बैरियर तोड़े. और वो इतने चार्मिंग थे.

स्वेटर ऋषि कपूर की पहचान बन गया था. फिल्म 'बोल राधा बोल' का पोस्टर.
10. 'दूसरी पारी में ज़्यादा तारीफ़ मिली'
ऋषि कपूर की मुल्क से लेकर कपूर एंड संस जैसी फिल्में सफल रही थीं. रनबीर कहते हैं कि दूसरी पारी में उन्हें पहले से ज़्यादा तारीफ़ मिली. वो कहते हैं,
अपनी दूसरी पारी में अग्निपथ, दो दूनी चार, कपूर एंड संस और दूसरी कई फिल्मों में मेरे पिता और भी तारीफ पा रहे हैं, पहली पारी से भी ज़्यादा. एक अच्छे ऐक्टर को कोई नीचे नहीं धकेल सकता. एक शख्स जो समय के मानकों पर खरा उतरा है, 44 साल से शोबिज़ में है, उसमें ज़रूर कुछ खास बात होगी.
Video: ऋषि कपूर की बेटी रिद्धिमा 1400 किलोमीटर दूर हैं, मुंबई जाएंगी !














