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भारत-पाकिस्तान में जीता कौन? युद्ध के एक्सपर्ट ने बता दिया

India-Pakistan Conflict: इस संघर्ष में जीत किसकी हुई? ये सवाल पूरी दुनिया में घूम रहा है. सवाल ये भी है कि ये कब और कैसे तय हुआ कि एक पक्ष के पास अब सीजफायर के अलावा कोई विकल्प नहीं है. युद्ध के एक्सपर्ट ने उदाहरण सहित सब बताया है.

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भारत के तीनों सेनाओं के प्रमुख. (तस्वीर: PTI)

भारत-पाकिस्तान में हुए हालिया संघर्ष में जीत किसकी हुई? ये सवाल पूरी दुनिया में घूम रहा है. जवाब दिया है ऑस्ट्रियाई सैन्य इतिहासकार टॉम कूपर ने. उन्होंने कहा है कि इस संघर्ष में भारत की स्पष्ट जीत हुई है. उन्होंने ना सिर्फ ये बताया है कि इसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि उन्होंने पाकिस्तानी एयरबेस और न्यूक्लियर कमांड सेंटर पर भारत के रणनीतिक हमले की ओर भी इशारा किया.

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भारत की स्पष्ट जीत

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान, कुछ वेस्टर्न मीडिया ने भारत के खिलाफ झूठे और भ्रामक दावे छापे. कूपर ने उनकी आलोचना की. उन्होंने अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखा,

CNN जैसे संस्थान पीआर करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत का ये मैसेज है कि एक जिम्मेदार लोकतंत्र के नाते वो अपनी सैन्य जीत की घोषणा नहीं कर सकते. साफ-साफ कहूं तो मैं इन बातों की परवाह नहीं करता. ना ही वेस्टर्न मिलिट्री एक्सपर्ट्स में मेरी कोई दिलचस्पी है. अगर एक देश, दूसरे देश के न्यूक्लियर हथियारों के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है, और दूसरा देश जवाब देने की ताकत खो चुका है, तो मैं मानता हूं कि ये (भारत की) बिल्कुल स्पष्ट जीत है.

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कूपर ने आगे लिखा कि पाकिस्तान के पास लंबी दूरी तक टारगेट करने वाली ऐसी मिसाइल नहीं है जो भारत का मुकाबला कर सके. उन्होंने भारत की ब्रह्मोस और SCALP-EG मिसाइलों का जिक्र किया. इस तरह की मिसाइल पाकिस्तान के पास नहीं हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान की मिसाइल ताकत की बहुत तारीफ होती है, लेकिन असल लड़ाई में वो असरदार साबित नहीं हुई.

उन्होंने आगे लिखा कि भारत के हमलों से पाकिस्तान के कई अहम एयरबेस, जैसे नूर खान, और सरगोधा, को भारी नुकसान हुआ. इसके बाद पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO से संपर्क कर सीजफायर की बात की. कूपर का मानना है कि ये दिखाता है कि जंग की स्थिति में भारत की ताकत पाकिस्तान से कहीं ज्यादा है.

पाकिस्तान डिफेंस नेटवर्क का वो अलर्ट…

कूपर के अलावा भी कई डिफेंस पत्रकारों ने अपने-अपने सूत्रों के हवालों से न्यूक्लियर कमांड सेंटर से जुड़ी रिपोर्ट की थी. NDTV से जुड़े शिव अरूर के मुताबिक, 10 मई की सुबह को पाकिस्तान ने श्रीनगर को निशाना बनाया. भारत ने पलटकर पाकिस्तानी एयरफोर्स के प्रमुख ठिकानों पर मिसाइलें दाग दीं. पाकिस्तान के रफीकी, मुरीद, चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर और चुनियन मिलिट्री ठिकानों पर हमला हुआ. 

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इस हमले के ठीक बाद पाकिस्तान डिफेंस नेटवर्क पर एक अलर्ट फ्लैश हुआ. इसमें बताया गया था कि भारत की ओर से पाकिस्तान के परमाणु कमांड और नियंत्रण ढांचें पर हमला हो सकता है. इसके बाद ही पाकिस्तान ने अमेरिका से संपर्क किया और तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा. क्योंकि उन्हें अपने परमाणु हथियारों की चिंता सताने लगी थी. 

विस्तार से पढ़ें: वो अलर्ट जिसके बाद आसिम मुनीर ने डर कर अमेरिका को किया था फोन, फिर हुआ सीजफायर

पाकिस्तान में नेशनल कमांड ऑथोरिटी की बैठक बुलाई गई?

अमेरिका की मीडिया संस्था ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से लिखा है,

एक समय ऐसा आया जब पाकिस्तान के परमाणु और अन्य सामरिक हथियारों की निगरानी करने वाली सरकारी संस्था (नेशनल कमांड ऑथोरिटी) को प्रधानमंत्री के साथ बैठक के लिए बुलाया गया. इससे अमेरिकी अधिकारियों की चिंता बढ़ गई.

हालांकि कुछ घंटों के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने इस बात को खारिज कर दिया. 

अमेरिका में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी के हवाले से ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा,

हमने अमेरिका को बताया कि ये अब बहुत गंभीर स्थिति बन गई है. अमेरिका ने खुद देखा कि रावलपिंडी में एयरबेस पर हमला हुआ. ये सबकुछ एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा था.

भारत सरकार का ये भी कहना है कि उन्होंने अपनी शर्तों पर सीजफायर की घोषणा की है. इससे अमेरिका या किसी भी तीसरे देश का कोई लेना-देना नहीं है. 

वीडियो: तारीख: खैबर के पश्तून जो पाकिस्तान को तबाह करने पर तुले हैं

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