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भारत में 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करेगा UAE, पीएम मोदी के दौरे ने बड़ा संकट दूर कर दिया?

भारत के अंडरग्राउंड तेल भंडारण केंद्र विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पडूर में मौजूद है. इनमें कच्चे तेल का भंडार है जिसे आपात स्थिति में निकाला जा सकता है.

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भारत-यूएई में तेल भंडारण को लेकर बड़ा समझौता हुआ है. (फोटो- India Today)

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत में 30 मिलियन यानी 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगा. ये अहम समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई के दौरे पर हुआ है. बताया गया कि Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) और Abu Dhabi National Oil Company यानी ADNOC के बीच हुए इस करार का मकसद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है. इसके तहत दोनों देशों के बीच पेट्रोलियम भंडार और एलएनजी-एलपीजी स्टोरेज सुविधाओं में भी स्ट्रैटेजिक सहयोग बढ़ाया जाएगा.

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भारत के अंडरग्राउंड तेल भंडारण केंद्र विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पडूर में मौजूद हैं. इनमें कच्चे तेल का भंडार है जिसे आपात स्थिति में निकाला जा सकता है. फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इतना तेल लगभग 10 दिनों तक पूरे देश की खपत को पूरा कर सकता है.

3 करोड़ बैरल यूएई का तेल स्टोर होगा

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संयुक्त अरब अमीरात भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों के साथ साझेदारी करने वाला पहला देश था. अबू धाबी ने मंगलुरु भंडार में 5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का स्टोरेज किया है. आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस समझौते से भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में यूएई की हिस्सेदारी बढ़कर 3 करोड़ बैरल (30 मिलियन बैरल) तक पहुंच जाएगी. साथ ही भारत में रणनीतिक गैस भंडार बनाने में भी मदद मिलेगी.

अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी ने अलग से बयान जारी कर कहा कि इस समझौते के तहत यूएई के फुजैरा में भी भारत के रणनीतिक तेल भंडार के लिए कच्चे तेल के स्टोरेज की संभावनाओं पर काम किया जाएगा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने OPEC छोड़ने के यूएई के फैसले से उसके तेल उत्पादन में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. ऐसे में भारत जैसे तेल खरीदने वाले देशों को इससे काफी फायदा मिल सकता है.

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ADNOC ने क्या कहा?

ADNOC ने कहा कि वह ‘Indian Oil Corporation’ के साथ एलपीजी सप्लाई और ट्रेडिंग के मौके बढ़ाने की संभावनाओं पर काम करेगा. ADNOC के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ Sultan Ahmed Al Jaber ने कहा, 

भारत में बाजार का आकार और उसकी तेज विकास रफ्तार उसे दुनिया के सबसे अहम एनर्जी मार्केट्स में से एक बनाती है. बढ़ती आबादी के साथ ऊर्जा की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में यूएई-भारत ऊर्जा साझेदारी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने लंबे समय तक एलपीजी की सप्लाई के लिए अलग से समझौता भी किया है ताकि भारत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की स्थिर सप्लाई बनी रहे. भारत और यूएई ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी (Strategic Defence Partnership) के लिए भी एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए. इसका फोकस डिफेंस प्रोडक्शन में सहयोग, टेक्नॉलजी शेयरिंग, इनोवेशन और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर रहेगा.

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