‘मेरी कहानी मेरे 17वें जन्मदिन के ठीक बाद शुरू होती है. मेरे छोटे भाई और बहन को फॉस्टर होम (बच्चों के देखभाल की जगह) भेज दिया गया था. मेरे पिता की मौत करीब पांच साल पहले हो चुकी थी और मेरी मां शराब की आदी हो गई थीं. मां बुरी नहीं थीं, लेकिन वो बहुत परेशान थीं. फॉस्टर होम के बारे में जो बातें सुनने को मिल रही थीं, वो भी बहुत अच्छी नहीं थीं. एक स्थानीय पादरी ने मेरी मदद की. अगर मैं सेना में भर्ती हो जाता तो मुझे फॉस्टर होम नहीं जाना पड़ता.
थाईलैंड में कैसे खड़ी हो गई पूरी सेक्स इंडस्ट्री? एक युद्ध से शुरू होती है ये कहानी
वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों के R&R ने थाईलैंड में बार, होटल और नाइटलाइफ़ के साथ सेक्स इंडस्ट्री को भी बढ़ावा दिया. सैनिकों के लौटने के बाद भी बाजार कायम रहा और थाईलैंड की ग्लोबल पहचान बदल गई.

17 साल की उम्र में माता-पिता की इजाजत से सेना में भर्ती होना संभव था. लेकिन मेरी मां ने इजाजत नहीं दी. तब उस पादरी ने एक अजीब तरकीब निकाली. वो मेरी मां की पसंदीदा वोडका लेकर आए और उन्हें तब तक पिलाते रहे, जब तक वो पूरी तरह नशे में नहीं हो गईं. और फिर उन्होंने उनसे साइन करवा लिए. एक बहुत मुश्किल ट्रेनिंग के बाद मुझे वियतनाम युद्ध में भेज दिया गया. हालांकि ये कहानी असल में मेरी वियतनाम की जंग की नहीं, बल्कि थाईलैंड में बिताई मेरी RएंडR यानी Rest and Recreation की छुट्टियों की है.’
Stickman Bangkok नामक वेबसाइट पर 2012 में पब्लिश यह संस्मरण एक पूर्व अमेरिकी मरीन का है जिन्होंने अपना नाम 'माइक' लिखा है. वियतनाम युद्ध के दौरान माइक कई बार छुट्टियां मनाने थाईलैंड गए.
यही वो दौर था जब थाईलैंड टूरिज्म की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा था और इसी के साथ पर्दे के पीछे एक ऐसी इंडस्ट्री भी खड़ी हो रही थी जिसने आने वाले दशकों में थाईलैंड की पहचान बदलकर रख दी. 2011 में आई टॉड फिलिप्स की फिल्म 'हैंगओवर-2' तो आपको याद ही होगी. फिल्म में जैसा थाईलैंड को दिखाया गया है आमतौर पर उसकी वही छवि हमारे बीच लंबे समय से मौजूद है. मौज-मस्ती का अड्डा. नाइट लाइफ के लिए मशहूर और काफी हद तक सेक्स टूरिज्म के लिए कुख्यात.
सवाल ये है कि कब और कैसे थाईलैंड की फ्रिज पर 'सेक्स टूरिज्म' का ये बिल्ला चिपका दिया गया? टेक्सास से भी छोटे इस देश में ऐसा क्या मिलता है जो लोग न्यूयॉर्क, पेरिस या दुबई में नहीं खोज पाते? कैसे एक त्रासदी ने, एक युद्ध की वीभत्सता ने थाईलैंड की किस्मत को रातोरात चमका दिया और खड़ी हो गई दुनिया की सबसे चर्चित सेक्स इंडस्ट्री.

1966 से 1970 के बीच वियतनाम युद्ध के दौरान थाईलैंड की अपनी पांच यात्राओं को याद करते हुए माइक ने लिखा,
सफर करीब चार-पांच घंटे का होता था और मेरे पास हमेशा जैक डेनियल्स की एक छोटी बोतल होती थी, जो सफर में मेरा साथ देती थी. अपनी पहली यात्रा के वक्त मैं 18 साल का था. पटाया तब सिर्फ एक छोटा-सा मछली पकड़ने वाला शहर था. आज बैंकॉक में जो चमक-दमक और तड़क-भड़क दिखाई देती है, उस समय वैसा कुछ नहीं था.
उन्होंने आगे लिखा, 'हर बार में आमतौर पर 20 से 60 लड़कियां मौजूद रहती थीं. उस समय का माहौल आज से काफी अलग था. मुझे ऐसे किस्से भी याद हैं कि कुछ बार कई लड़कियां ऐसे सैनिकों के साथ चली जाती थीं जिनके पास पैसे नहीं होते थे. उस समय किसी लड़की को पसंद करने पर मामला सीधे पैसे की बातचीत से शुरू नहीं होता था. जैसे किसी को पसंद किया तो बात धीरे-धीरे आगे बढ़ती थी और जब सही वक्त आता था तो बस इतना पूछ लिया जाता था कि- 'तुम मेरे साथ चलोगी?' तब पैसे दिखाना अच्छा नहीं माना जाता था. अगर पैसे देने होते तो चुपचाप हाथ में या उसके पर्स में रख दिए जाते. माइक ने लिखा कि उस समय एक अच्छी लड़की के साथ पूरी रात बिताने के करीब पांच डॉलर मिलते थे.
थाईलैंड पहुंचते हैं करोड़ों टूरिस्टथाईलैंड वर्ल्ड टूरिज्म की लिस्ट में टॉप पर गिने जाने वाले देशों में से एक है. Statistical Yearbook-2025 के मुताबिक, सिर्फ 2024 में ही यहां 3 करोड़ 50 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक पहुंचे. कुछ दिनों पहले ही खबर आई थी कि 286 दिनों तक समुद्र में रहने के बाद करीब 5,000 अमेरिकी नौसैनिक थाईलैंड के लेम पियर पर पहुंचे हैं. यहां से देश का सबसे चर्चित और 'बदनाम' शहर पटाया ज्यादा दूर नहीं है.

थाईलैंड की जिस तस्वीर को आज हम देखते हैं, वो हमेशा से ऐसी नहीं थी. थाईलैंड की टूरिज्म इंडस्ट्री 20वीं सदी के मध्य में तेजी से खड़ी हुई और इसी दौर में एक ऐसा बदलाव शुरू हुआ, एक ऐसी घटना हुई, जिसने आने वाले दशकों में थाईलैंड की अर्थव्यवस्था और उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को पूरी तरह बदलकर रख दिया.
क्या हुआ था? यह जानने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं.
थाईलैंड का पुराना नाम सियाम था. 1939 में देश का आधिकारिक नाम सियाम से थाईलैंड कर दिया गया. सेक्स का कारोबार सियाम में भी मौजूद था. यूरोपीय यात्रियों और व्यापारियों के दस्तावेज़ों में 17वीं सदी तक इसके संकेत मिलते हैं. हालांकि, उस दौर को आज की सेक्स इंडस्ट्री से सीधे जोड़कर देखना ठीक नहीं होगा. उस समय शादी, गुलामी, किसी महिला को अपने साथ रखने और यौन संबंधों को लेकर समाज के नियम और सोच आज से काफी अलग थे.
पुराने सियाम में महिलाओं की सामाजिक स्थिति भी आज जैसी नहीं थी. गुलामी या दासता मौजूद थी. कुछ महिलाएं कर्ज़, युद्ध या सामाजिक व्यवस्था के कारण दूसरों के अधीन होती थीं. 19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी की शुरुआत में राजा चुलालोंगकोर्न यानी राम पंचम के दौर में गुलामी खत्म करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और 1905 में यह पूरी तरह समाप्त हो गई. समाज की पुरानी संरचनाएं टूटने लगीं. इसका असर महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा.

20वीं सदी में आते-आते सरकार ने सेक्स के कारोबार को अलग-अलग कानूनों के जरिए कंट्रोल करना शुरू किया. कभी इसे लाइसेंस और मेडिकल निगरानी के जरिए रेगुलेट किया गया, तो कभी पूरी तरह बैन कर दिया गया. 1960 में Prostitution Suppression Act के जरिए वेश्यावृत्ति को अपराध की श्रेणी में रखा गया. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इसी समय थाईलैंड की सरकार एक दूसरी दिशा में भी बढ़ रही थी. वो चाहती थी कि दुनिया थाईलैंड को एक बड़े टूरिस्ट हब के रूप में देखे. और यहां कहानी में एक ऐसा किरदार आता है, जिसके बिना मॉर्डन थाई टूरिज्म की कहानी अधूरी है.
इस किरदार का नाम था- फील्ड मार्शल सारित थानारात.
1957 में सत्ता पर कब्जा करने के बाद और फिर 1958 में दूसरी बार सैन्य शासन स्थापित करने के बाद सारित ने थाईलैंड को एक मजबूत सैन्य-राज्य के रूप में चलाया. 1958 में वो कुछ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते इलाज के लिए अमेरिका के वॉल्टर रीड हॉस्पिटल में भर्ती हुए. सारित ने वहां अमेरिकी पर्यटन व्यवस्था को बहुत करीब से देखा और थाईलैंड के लिए पर्यटन की संभावनाओं में दिलचस्पी ली. सत्ता में आने के बाद उन्होंने पर्यटन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया.
1959 में Tourist Organisation of Thailand बनाई गई और 1960 में उसने औपचारिक रूप से काम शुरू किया. उस साल थाईलैंड में सिर्फ करीब 81 हजार विदेशी पर्यटक आए थे. लेकिन अगले कुछ दशकों में यही संख्या आसमान छूने वाली थी. और फिर इतिहास ने थाईलैंड की टूरिज्म इंडस्ट्री को एक ऐसा ग्राहक दिया, जिसकी जरूरतें सिर्फ समुद्र, मंदिर और पहाड़ों तक सीमित नहीं थीं बल्कि उसे कुछ और भी चाहिए था.

वियतनाम युद्ध. 1960 के दशक में अमेरिका वियतनाम में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा था. थाईलैंड रणनीतिक रूप से बेहद खास था. यहां अमेरिकी सैन्य अड्डे बने. विमानों ने उड़ान भरी. सैनिक आए और सैनिकों के साथ आया खूब सारा पैसा. युद्ध सिर्फ मोर्चे पर नहीं लड़ा जाता. सैनिक महीनों तक लड़ते हैं और फिर उन्हें आराम चाहिए. इसी को कहा गया R&R यानी Rest and Recreation. थाईलैंड एक बार फिर इसी आराम का एक बड़ा अड्डा बन गया. इतिहास खुद को दोहराता तो है.
1967 में वियतनाम में तैनात अमेरिकी सैनिकों को R&R के लिए थाईलैंड आने की सुविधा मिली. बैंकॉक, पटाया और दूसरे शहरों में होटल, बार, नाइटक्लब, मसाज पार्लर और मनोरंजन के कारोबार तेजी से बढ़ने लगे. अमेरिकी सैनिकों के लिए ये युद्ध से कुछ दिनों की दूरी थी लेकिन थाईलैंड के लिए ये एक नए आर्थिक मॉडल की शुरुआत थी.
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़ा सेक्स वर्कअमेरिकी सैनिक थाईलैंड सिर्फ सेक्स के लिए नहीं आते थे. समुद्र, होटल, शराब, नाइटलाइफ़ और आराम सब इसका हिस्सा थे लेकिन सेक्स वर्क भी इसी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का एक अहम हिस्सा बन गया. 1966 के Entertainment Places Act ने नाइटक्लब, डांस हॉल, बार और ऐसे मसाज सेंटर्स को लाइसेंस व्यवस्था के तहत रखा जहां पुरुष ग्राहकों की सेवा के लिए महिलाएं मौजूद रहती थीं. कानून कहता था कि इन जगहों का इस्तेमाल वेश्यावृत्ति के लिए नहीं होना चाहिए लेकिन हकीकत कुछ और थी.
पुलिस की निगरानी ढीली थी और कई जगहों पर कानून और कारोबार के बीच एक ब्लर लाइन बन गई. यानी एक अजीब स्थिति पैदा हो गई. सेक्स वर्क कानून की नजर में अपराध था, लेकिन सेक्स इंडस्ट्री से जुड़ी पूरी इकोनॉमी तेजी से फैल रही थी और इसी दौर में पटाया की कहानी बदल गई.

आज जिस पटाया को हम चमकती नाइटलाइफ़ और समुद्र किनारे के रिसॉर्ट शहर के रूप में जानते हैं, वह हमेशा से ऐसा नहीं था. अमेरिकी सैनिकों के आने से पहले भी पटाया मौजूद था. बैंकॉक के लोग वहां मछलियां पकड़ने या कभी-कभार छुट्टियां मनाने जाते थे. लेकिन 1960 के दशक में अमेरिकी सैनिकों के R&R ने इसके विकास की रफ्तार बदल दी.
एक वक्त ऐसा आया जब पटाया का नाम ही अमेरिकी सैनिकों की छुट्टियों और सेक्स इंडस्ट्री के साथ जुड़ने लगा. यहां से कहानी सिर्फ सैनिकों की नहीं रह गई क्योंकि किसी भी सेक्स इंडस्ट्री को सिर्फ ग्राहक नहीं चलाते. उसके पीछे एक पूरा सप्लाई नेटवर्क काम करता है. थाईलैंड में इस सप्लाई की कहानी बैंकॉक से हजारों किलोमीटर दूर खेतों और गांवों तक ले जाती है.
सिर्फ विदेशियों की अय्याशी की कहानी नहींथाईलैंड का उत्तर-पूर्वी इलाका, जिसे इसान कहा जाता है. लंबे समय से देश के गरीब ग्रामीण हिस्सों में रहा है. खेती पर निर्भर अर्थव्यवस्था, कम आमदनी और रोजगार के सीमित अवसरों ने बड़ी संख्या में लोगों को शहरों की ओर जाने के लिए मजबूर किया. खासकर महिलाओं का बैंकॉक और दूसरे शहरी केंद्रों की ओर पलायन हुआ इसीलिए थाई सेक्स इंडस्ट्री को सिर्फ 'विदेशियों की अय्याशी' की कहानी मान लेना अधूरा होगा. विदेशी ग्राहक इस बाजार की मांग बढ़ाते थे, लेकिन इस बाजार की सप्लाई थाई समाज के भीतर मौजूद आर्थिक असमानता, पलायन और रोजगार के सवालों से भी जुड़ी थी. इस रिश्ते का एक चौंकाने वाला सबूत हमें आज भी दिखाई देता है.
2018 में Oxford Academic में प्रकाशित एक इकोनॉमिक स्टडी ने थाईलैंड के उन इलाकों की तुलना, जो कभी अमेरिकी सैन्य अड्डों के आसपास थे, उन इलाकों से की, जहां सैन्य अड्डे नहीं बने थे. शोधकर्ताओं को मिला कि पूर्व अमेरिकी बेस के आसपास के जिलों में आज भी कमर्शियल सेक्स वर्कर्स की संख्या करीब पांच गुना ज्यादा थी. यानी वियतनाम युद्ध खत्म हुए करीब आधी सदी बीत जाने के बाद भी उसका असर नक्शे पर दिखाई दे रहा था.
युद्ध खत्म हुआ. अमेरिकी सैनिक लौट गए. लेकिन उनके पीछे होटल रह गए. बार रह गए. सड़कें रह गईं. पर्यटन का पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर रह गया और सबसे खास एक ऐसा बाजार रह गया जिसकी मांग अब पूरी दुनिया को थी. अब ग्राहक दुनिया भर से आने लगे.

यही वो समय था जब थाईलैंड ने अपने आपको सिर्फ सैन्य R&R डेस्टिनेशन से इंटरनेशनल टूरिस्ट डेस्टिनेशन में बदलना शुरू किया. 1970 के दशक तक विदेशी पर्यटकों की संख्या 10 लाख से ऊपर पहुंच गई. 1980 और 1990 के दशक में थाईलैंड की टूरिज्म ब्रैंडिंग और मजबूत हो गई. दुनिया के सामने थाईलैंड की एक ऐसी छवि बनाई गई जिसमें समुद्र, मसाज, नाइटलाइफ़, सस्ते होटल और एग्जॉटिक एक्सपीरियंसेस सब एक साथ बिकने लगे.
HIV ने जब पांव फैलाएलेकिन फिर एक दिक्कत आ गई. 1980-90 के दशक में थाईलैंड में एचआईवी का संक्रमण तेजी से फैलने लगा और सेक्स इंडस्ट्री भी इसका एक अहम हिस्सा बनी. इसके बाद सरकार ने बड़े स्तर पर कंडोम के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया और लोगों को जागरूक करने के लिए पब्लिक हेल्थ कैंपेन चलाए. इसी दौर में ‘100% कंडोम प्रोग्राम’ जैसी नीतियां शुरू की गईं, जिनका मकसद एचआईवी के फैलाव को रोकना था. यानी जिस सेक्स इंडस्ट्री को कई दशकों तक पर्यटन और नाइटलाइफ़ के साथ बढ़ने दिया गया, बाद में उसी को एक बड़े पब्लिक हेल्थ संकट के हिस्से के तौर पर भी देखना पड़ा.
और फिर आया 1997. एशियाई वित्तीय संकट का साल.
2 जुलाई 1997 को थाईलैंड की करेंसी बहत बुरी तरह गिर गई. विदेशी मुद्रा रखने वालों के लिए थाईलैंड बहुत सस्ता हो गया. यानी होटल, खाना, ट्रांसपोर्ट और दूसरी सेवाएं विदेशी मुद्रा में सस्ती महसूस होने लगीं. विडंबना देखिए. जिस आर्थिक संकट ने थाईलैंड की अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया, उसी ने विदेशी पर्यटकों के लिए थाईलैंड को और ज्यादा सस्ता या अफोर्डेबल बना दिया. ठीक अगले साल, 1998 में, Thailand ने दुनिया के सामने एक बेहद सफल टूरिज्म कैंपेन पेश किया- Amazing Thailand के नाम से. थाईलैंड की पहचान अब दुनिया के आम पर्यटकों के लिए एक ड्रीम डेस्टिनेशन में बदल चुकी थी.

लेकिन सेक्स इंडस्ट्री का क्या हुआ?
कानून कहता है कि प्रॉस्टिट्यूशन गैरकानूनी है. 1996 का प्रिवेंशन एंड सप्रेशन ऑफ प्रॉस्टिट्यूशन ऐक्ट, प्रॉस्टिट्यूशन, ब्रॉथल चलाने, प्रॉस्टिट्यूशन का प्रचार करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाता है. नाबालिगों के मामले में सजा और भी कठोर है लेकिन जमीन पर बार, मसाज पार्लर, एंटरटेनमेंट वेन्यूज़ और टूरिस्ट डिस्ट्रिक्ट्स की एक ऐसी अर्थव्यवस्था विकसित हो चुकी थी जिसे सिर्फ कानून की एक लाइन से खत्म करना संभव नहीं था.
थाईलैंड में सेक्स इंडस्ट्री का सबसे बड़ा पैराडॉक्स यही है. सेक्स वर्क कानूनन प्रतिबंधित है, लेकिन उससे जुड़ी नाइटलाइफ इकोनॉमी कई दशकों से टूरिज्म इकोसिस्टम का हिस्सा बनी हुई है.
जहां पैसा, वहां शोषण का खतराइस पूरी कहानी का एक और कड़वा पहलू है. जहां पैसा होता है, वहां शोषण का खतरा भी रहता है. थाईलैंड की सेक्स इंडस्ट्री के इतिहास में मानव तस्करी, जबरन देह व्यापार और नाबालिगों के शोषण के मामले भी सामने आए हैं. 1990 के दशक में ह्यूमन राइट्स वॉच ने म्यांमार से महिलाओं और लड़कियों की तस्करी और उन्हें थाईलैंड के वेश्यालयों में जबरन देह व्यापार में धकेले जाने को लेकर गंभीर रिपोर्ट प्रकाशित की थी इसलिए इस पूरी कहानी को सिर्फ रंगीन नाइटलाइफ़ या अनोखे अनुभवों की कहानी समझना ठीक नहीं होगा. इसके पीछे गरीबी, अपनी मर्जी से लिए गए फैसले, मजबूरी, शोषण और मानवाधिकारों से जुड़ी कई कहानियां भी हैं, जो शायद आप और हम तक कभी पहुंच ही नहीं पातीं.
आज थाईलैंड काफी बदल चुका है. सेक्स टूरिज़्म अब सिर्फ पश्चिमी देशों से आने वाले पुरुष पर्यटकों की कहानी नहीं है. नई टेक्नोलॉजी ने डेटिंग ऐप्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और अपने दम पर सेक्स वर्क करने के नए तरीके सामने ला दिए हैं. बैंकॉक और पटाया आज भी इस इंडस्ट्री के बड़े केंद्र हैं, लेकिन अब इसका पूरा तरीका पहले जैसा नहीं रहा. 2023 में प्रकाशित रोनाल्ड वाइट्ज़र की किताब ‘सेक्स टूरिज़्म इन थाईलैंड’ में भी बताया गया है कि पिछले दो दशकों में इस इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों की उम्र, नेशनलिटी और काम करने के तरीकों में काफी विविधता आई है.

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कैसे खड़ी हुई थाईलैंड की सेक्स इंडस्ट्री?कुल मिलाकर थाईलैंड की सेक्स इंडस्ट्री की शुरुआत किसी एक दिन, किसी एक सरकार या किसी एक आदमी ने नहीं की थी. इसकी जड़ें पुराने सियाम के सामाजिक ढांचे में थीं. बीसवीं सदी में कानून और शहरों के विकास के साथ इसका रूप बदलता गया. सारित थानारत के दौर में टूरिज़्म ने इसे एक नया बाज़ार दिया. वियतनाम युद्ध ने अमेरिकी सैनिकों और डॉलर की एक बड़ी, लेकिन अस्थायी मांग पैदा कर दी. पटाया जैसे शहरों ने इस मांग को नाइटलाइफ़ और मनोरंजन की दुनिया में बदल दिया.
गांवों से शहरों की ओर लोगों के पलायन ने इस इंडस्ट्री को काम करने वाले लोग भी दिए. फिर अमेरिकी सैनिक चले गए, लेकिन दुनिया भर से टूरिस्ट थाईलैंड आते रहे. 1997 के करेंसी क्राइसिस ने थाईलैंड को विदेशी यात्रियों के लिए और सस्ता बना दिया. अमेज़िंग थाईलैंड अभियान ने उसकी ग्लोबल ब्रैंडिंग कर दी. और धीरे-धीरे जो चीज़ कभी सैनिकों के कुछ दिनों के आराम और मनोरंजन का हिस्सा थी, वो एक अंतरराष्ट्रीय टूरिज़्म इकॉनमी का स्थायी हिस्सा बन गई.
आज अगर पटाया की किसी चमकती सड़क पर रात के वक्त हजारों लाइटें जलती दिखाई देती हैं, तो उनके पीछे सिर्फ रात की चमक नहीं है. उनके पीछे युद्ध की परछाईं है. अमेरिकी डॉलर हैं. ग्रामीण गरीबी है. शहरों की चमक है. पलायन का दर्द है. कानून और उसकी अनदेखी के बीच का फासला है. सबसे बढ़कर, पिछले करीब सात दशकों में बदलती हुई ग्लोबल टूरिज्म इकोनॉमी है.
इसलिए थाईलैंड की सेक्स इंडस्ट्री की कहानी असल में सिर्फ सेक्स की कहानी नहीं है. ये उस दुनिया की कहानी है जहां युद्ध खत्म हो जाता है, लेकिन उसके बनाए बाजार जिंदा रहते हैं. जहां सैनिक घर लौट जाते हैं, लेकिन होटल और बार रह जाते हैं. जहां कानून कुछ कहता है, समाज कुछ और करता है और बाजार दोनों के बीच अपनी जगह बना लेता है. और शायद इसी वजह से थाईलैंड को समझने के लिए सिर्फ उसके मंदिर, हैरिटेज, समुद्र और चमकती हुई रातें देखना काफी नहीं है. कभी-कभी किसी देश का सबसे छिपा हुआ इतिहास उसकी सबसे चमकदार गलियों में लिखा होता है.
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