'द टेलीग्राफ' अखबार के पूर्व एडिटर आर. राजगोपाल को अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के बाद पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से उनका नाम हटा दिया गया. पुलिस का कहना है कि जब तक वोटर लिस्ट में नाम नहीं आता, तब वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी. विपक्ष ने इसे लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) पर निशाना साधा है.
'पहले वोटर लिस्ट में नाम डलवाओ फिर... ', SIR ने बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार का पासपोर्ट फंसा दिया
The Telegraph के पूर्व एडिटर R. Rajagopal का पासपोर्ट वेरिफिकेशन रुक गया है. पुलिस ने इसकी वजह पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से उनका नाम हटना बताया है. विपक्ष ने इसे लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) पर निशाना साधा है. क्या है पूरा मामला?


इंडिया टुडे के साथ बातचीत में राजागोपाल ने बताया कि 19 मार्च को बायोमेट्रिक्स पूरे होने के बाद प्रोसेस सामान्य रूप से शुरू हुआ. अप्रैल के पहले हफ्ते में उन्हें बालीगंज पुलिस स्टेशन से एक कॉल आया और उन्हें अपने वोटर आईडी कार्ड के साथ पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा गया. पुलिस ने बताया कि वोटर कार्ड का वेरिफिकेशन करना है.
जब राजगोपाल ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, तो पुलिस ने उनसे आधार कार्ड, मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट, पिता का डेथ सर्टिफिकेट और कोलकाता के पते का यूटिलिटी बिल समेत कई दस्तावेज मांगे. उन्होंने सभी दस्तावेज जमा कर दिए.
राजगोपाल ने बताया कि कई दिन बीत गए, लेकिन कोई अपडेट नहीं मिला. उन्होंने बताया कि 2005 में कोलकाता के उसी पते से अपना पासपोर्ट बनवाया था और 2015 में उसी पते से उसे रिन्यू भी करवाया था.
जब कई हफ्तों तक उन्हें कोई अपडेट नहीं मिला तो उन्होंने 19 मई को फिर से पुलिस स्टेशन से संपर्क किया. उन्हें जानकारी दी गई कि फाइल सिक्योरिटी कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (SCO) को भेज दी गई है, जो कोलकाता पुलिस की स्पेशल ब्रांच के तहत काम करता है. उन्हें बताया गया कि लोकल पुलिस को उनके वेरिफिकेशन को लेकर कुछ शक था.
‘लिस्ट में नाम जुड़ने का इंतजार करें’SCO के अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि जब तक वोटर लिस्ट में उनका नाम दोबारा नहीं जुड़ता, तब तक पुलिस वेरिफिकेशन पूरा नहीं किया जा सकता. राजगोपाल ने बताया कि उन्होंने पूछा कि क्या ऐसा कोई सरकारी आदेश या लिखित निर्देश है, तो अधिकारी ने जवाब दिया कि यही प्रक्रिया है और उन्हें इसका पालन करना होगा. जब उन्होंने पूछा कि उन्हें आगे क्या करना चाहिए, तो जवाब सीधा था,
“वोटर लिस्ट में अपना नाम वापस जुड़ने का इंतजार करें.”
इसके बाद राजगोपाल ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और पासपोर्ट सेवा शिकायत सेल से भी संपर्क किया. 17 जून को रीजनल पासपोर्ट ऑफिस से उन्हें ईमेल और पत्र मिला, जिसमें बताया गया कि उनके एप्लीकेशन पर पुलिस रिपोर्ट आई है. रिपोर्ट में वजह वोटर लिस्ट से नाम हटना बताया गया. उन्हें 17 जुलाई को रीजनल पासपोर्ट ऑफिस में पेश होने के लिए भी कहा गया है.
राजगोपाल ने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग की तरफ से मान्य दस्तावेजों में शामिल अपना मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट भी जमा किया था, लेकिन फिर भी उनका नाम वोटर लिस्ट में बहाल नहीं किया गया. इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है और अब तक सुनवाई की तारीख नहीं मिली है. राजगोपाल का कहना है कि जब तक वोटर लिस्ट और पासपोर्ट, दोनों मामलों में फैसला नहीं हो जाता, तब तक वह दुविधा की स्थिति में हैं.
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विपक्ष का हमलाकांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), और सीपीआई (एम) जैसी विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरा है. केरल के मुख्यमंत्री ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) ने भी इसकी कड़े शब्दों में आलोचना की है. संस्थाओं का कहना है कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों और नागरिकता की पहचान का हनन है.
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