भारत के उच्च न्यायालय ने गुरुवार, 5 फरवरी को एक केस की सुनवाई के दौरान शादीशुदा महिलाओं के यौन शोषण को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने कहा कि अगर कोई शादीशुदा महिला अपनी सहमति से दूसरे आदमी के साथ यौन संबंध बनाती है और आगे चलकर उस पर झूठे शादी के वादे पर रेप का आरोप लगाती हैं तो उसे रेप नहीं माना जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला छत्तीसगढ़ की एक महिला वकील के केस की सुनवाई दौरान सुनाया है.
शादीशुदा महिला से शादी का वादा, लगा रेप का आरोप; सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया
SC on false rape allegations: सुप्रीम कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर शादीशुदा महिला अपनी सहमति से दूसरे आदमी के साथ यौन संबंध बनाती हैं तो उसे रेप नहीं माना जाएगा.


सुप्रीम कोर्ट ने इसे 'a classic case of a consensual relationship turning acrimonious' का दर्जा दिया है. मतलब कोर्ट का ये मानना है कि इस केस में यौन संबंध बनाने के लिए शादी के झूठे वादे का कोई प्रमाण नहीं मिलता है. जबकि ऐसा लगता है कि दो एडल्ट के बीच सहमति से फिजिकल रिलेशनशिप शुरू हुआ जिसमें बाद में कड़वाहट आ गई.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक़, केस की सुनवाई जस्टिस बी वी नागरत्ना और उज्जवल भुयान की बेंच कर रही थी. कोर्ट ने कहा,
कोर्ट ने ये बार-बार स्पष्ट किया है कि शादी के वादे के तहत शारीरिक संबंध बनाने मात्र से हर मामले में बलात्कार का केस नहीं बन जाता. आईपीसी की धारा 375 के तहत अपराध तभी बनता है जब आरोपी ने शादी का वादा केवल यौन संबंध बनाने के लिए किया हो. वादा करने के पीछे जब उसकी निभाने की मंशा शुरू से न रही हो और उस वादे का सीधा असर पीड़ित पर पड़ता हो तभी अपराध का मामला बनता है.
इससे पहले ये केस छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में भी पेश हुआ था. जहां हाई कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ FIR रद्द करने की अपील खारिज कर दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज कर दिया है.
केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता शादीशुदा हैं. शादी के दौरान ही वो दूसरे पुरुष के साथ फिजिकल रिलेशनशिप में आ गईं थीं. उनका डिवोर्स अभी तक नहीं हुआ है. हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत अगर शादीशुदा जोड़े में से कोई एक भी पार्टनर जीवित हो तो दूसरा पार्टनर दूसरी शादी नहीं कर सकता. इसी वजह से आरोपी का शादी का वादा निभा पाना कानूनन नहीं है.
33 साल की महिला वकील ने एक पुरुष वकील के ऊपर यौन शोषण का आरोप लगाया था. उन्होंने शिकायत दर्ज की कि सितंबर 2022 में वकील ने उन्हें शादी के झूठे वादे का झांसा देकर उनके साथ यौन संबंध बनाया. उनका रिश्ता जनवरी 2025 तक चला जिसके बाद वो प्रेग्नेंट हो गईं और मजबूरन उन्हें बच्चा गिराना पड़ा. जब उन्होंने अपने परिवार को इस बारे में बताया तो उनके परिवार ने उनसे मुंह मोड़ लिया. जिसके बाद उन्होंने फरवरी 2025 में केस दर्ज किया. उन्होंने आईपीसी की धारा 376 (2) (n) के तहत मामला दर्ज करवाया जिसमें ‘एक ही महिला के साथ कई बार रेप’ के आरोप में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है.
वीडियो: सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी, सुनवाई के बाद क्या बोले CJI?














.webp?width=275)


.webp?width=120)

