‘हम पाकिस्तान की तरह दलाल देश नहीं बन सकते.’ ये बात विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सर्वदलीय मीटिंग में कही, जब उनके सामने ये सवाल आया कि पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि दशकों से अमेरिका ईरान से बातचीत में पाकिस्तान का इस्तेमाल करता आया है. वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भारत सरकार ने बुधवार 25 मार्च को यह सर्वदलीय मीटिंग बुलाई थी, जिसकी अध्यक्षता देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने की. सरकार की ओर से उन्होंने सभी दलों को जानकारी दी कि देश में फिलहाल हालात स्थिर और कंट्रोल में हैं. तेल-गैस के और भी शिपमेंट्स 4-5 दिनों में भारत आने वाले हैं.
US-ईरान जंग में पाकिस्तान की 'मध्यस्थता' पर सवाल, जयशंकर का जवाब, ‘हम दलाल देश नहीं’
सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, गृह मंत्री अमित शाह और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत सभी पार्टियों के नेता शामिल हुए. बैठक के बारे में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बैठक में सभी पार्टियों ने हिस्सा लिया.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मीटिंग में राजनाथ सिंह और एस जयशंकर के अलावा गृहमंत्री अमित शाह और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल थे. बैठक के बारे में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मीटिंग में शामिल सभी दलों ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष और भारत पर इसके असर पर अपनी चिंताएं जाहिर कीं. रिजिजू ने बताया कि सभी विपक्षी पार्टियों ने भरोसा दिलाया है कि वो इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार अपना पूरा समर्थन देंगे.
रिजिजू ने कहा,
"विपक्ष के सभी साथियों ने कहा है कि संकट की इस घड़ी में सरकार जो भी फैसला लेगी, मौजूदा हालात के हिसाब से जो भी कदम उठाएगी. हर कोई एकजुट होकर उसका समर्थन करेगा."
रिजिजू ने कहा कि केंद्र सरकार ने सभी विपक्षी पार्टियों के साथ मामले से जुड़ी पर्याप्त जानकारी शेयर की है.
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार ने बैठक में कहा कि देश में पहले से ही "पर्याप्त ऊर्जा सुरक्षा" मौजूद है. इससे देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा रही है. सरकार ने यह भी बताया कि तेल और गैस की कमी न पड़े इसलिए पहले ही एडवांस बुकिंग कर ली गई है. इसे लेकर कई देशों के साथ बातचीत चल रही है, जिससे बिना किसी समस्या के देश में ऊर्जा की आपूर्ति की जा सके. बैठक में विपक्ष ने LPG संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली शिपमेंट पर भी सवाल किए.
इसके जवाब में सरकार ने कहा कि सब कुछ कंट्रोल में है और अगले 4-5 दिनों में चार जहाजों के पोर्ट पर पहुंचने की उम्मीद भी है.
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बता दें कि इस बैठक ने सरकार ने इस बात पर खास जोर दिया की किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है. साथ संबंधित चीजों की पर्याप्त स्टोरेज है. बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई बात का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ‘इस बातचीत में एक चीज साफ हुई है कि जंग खत्म होनी चाहिए. क्योंकि इससे सभी लोगों को परेशानी हो रही है.'
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बैठक के दौरान विपक्ष की ओर ईरान जंग में शांति के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल किया गया. इस सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने कहा कि अमेरिका 1981 से ही यही कर रहा है. एक तरह से उसने सालों से पाकिस्तान का इस्तेमाल ईरान के साथ बातचीत के लिए ही किया है. विदेश मंत्री ने आगे कहा कि हम ‘हम दलाल देश नहीं बन सकते.’
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