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कहानी उस गणतंत्र दिवस की जब RSS ने लिया था परेड में हिस्सा, नेहरू ने बुलाया था

Republic Day Parade History: 1950 से लेकर 1954 तक गणतंत्र दिवस परेड राजपथ पर नहीं हुई थी. बता दें, फिलहाल राष्ट्रपति भवन से लेकर विजय चौक और इंडिया गेट तक जाती हुई रोड को कर्तव्य पथ के नाम से जाना जाता है.

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1955 के बाद से 'राजपथ' (अब कर्तव्य पथ) परेड के लिए पक्का वेन्यू बना. (फ़ोटो - PTI)

भारत 76वां गणतंत्र दिवस (76th Republic Day 2025) मना रहा है. आपको (स्कूल की पढ़ाई पूरी कर चुके लोग) अपने स्कूल के दिन याद आ रहे होंगे. ये भी याद आ रहा होगा कि कितने समय तक आप टीवी पर कर्तव्य पथ (पहले राजपथ) पर होने वाली परेड (Republic Day Parade) नहीं देख पाए थे. क्योंकि आप स्कूल की परेड में थे. 'क्या हम सच्चे मायनों में गणतंत्र हैं?' वाला स्पीच दे रहे थे, 'लोकनृत्य' कर रहे थे या फिर तालियां बजा रहे थे.

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जो भी हो, आप 8 बजे से 11 बजे के बीच टीवी के सामने नहीं थे और जब साढ़े बारह बजे आप दो लड्डू लेकर घर पहुंचते, तब तक सब खतम हो जाता है. आइये आपको बताएं उस गणतंत्र दिवस की परेड के बारे में, जो आपने नहीं देखीं (Republic Day Parade History). लेकिन उसमें कुछ ऐसा हुआ, जो उस से पहले और बाद में कभी नहीं हुआ. बात बहुत पहले यानी 1963 की है. गणतंत्र दिवस की परेड होनी थी.

Republic Day Parade में RSS

माहौल आज से काफ़ी अलग था. महज़ दो महीने पहले तक चीन से लड़ाई चल रही थी. वो लड़ाई, जिसे हम अपनी कुर्बानियों के बावजूद जीत नहीं पाए. लेकिन गणतंत्र दिवस की परेड रवायत के मुताबिक हुई. पर एक बदलाव के साथ. बताया जाता है कि इस गणतंत्र दिवस पर फौज की टुकड़ियों के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी राजपथ पर होने वाली परेड में हिस्सा लिया. कहते हैं कि उस दिन राजपथ पर 3500 स्वयंसेवकों ने परेड की.

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(फ़ोटो - RSS की वेबसाइट से साभार)

गणतंत्र दिवस की परेड में आमतौर पर सेना, पैरामिलिट्री (अर्ध सैनिक बल), एनसीसी और स्कूलों से दस्ते होते हैं. 1963 की परेड में RSS का शामिल होना एक नई बात थी. कहा जाता है कि RSS ने चीन के साथ हुई लड़ाई में फौज की मदद की थी. इस बात का आभार जताने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री नेहरू ने परेड में हिस्सा लेने का न्योता दिया था.

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जब गणतंत्र दिवस परेड राजपथ पर नहीं होती थी

एक जानने लायक बात ये भी है कि 1950 से अब तक की सारी परेड राजपथ (अब के कर्तव्य पथ) पर नहीं हुईं. 1950 से लेकर 1954 तक गणतंत्र दिवस परेड राजपथ पर नहीं हुई थी. ये कभी इर्विन स्टेडियम, कभी किंग्सवे कैंप, तो कभी रामलीला मैदान में आयोजित होती थीं. राजपथ पर परेड 1955 से हो रही है. 1955 के बाद से राजपथ परेड के लिए पक्का वेन्यू बना. इस साल पाकिस्तान के गवर्ऩर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद परेड के मुख्य अतिथि थे.

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राजपथ नाम कैसे पड़ा था?

फिलहाल राष्ट्रपति भवन से लेकर विजय चौक और इंडिया गेट तक जाती हुई रोड को कर्तव्य पथ के नाम से जाना जाता है. 20वीं शताब्दी के पहले दशक में इसका निर्माण कराया गया था. तब इसका नाम अंग्रेजों ने 'किंगस्वे' रखा था. साल 1911 में किंग जॉर्ज पंचम भारत आए थे और उन्हीं के सम्मान में इस सड़क का नाम किंगस्वे पड़ा था.

उसी समय जॉर्ज पंचम में ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से शिफ्ट कर दिल्ली कर दिया था, जो कि मुगल साम्राज्य के समय में भी राजधानी हुआ करती थी. भारत जब आजाद हुआ, तब इस रोड का नाम बदलकर राजपथ कर दिया गया था. सितंबर, 2022 में 'राजपथ' का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' कर दिया गया. कर्तव्य को दिल्ली के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक माना जाता है.

(ये ख़बर हमारे साथी रहे निखिल ने लिखी थी.)

वीडियो: आसान भाषा में: गणतंत्र दिवस पर परेड की परंपरा कहां से आई, झांकियों पर हंगामा क्यों?

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