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गहने चोरी होने का केस आया, पुलिस ने तांत्रिक से पूछकर 'चोर' पकड़ा? HC ने बहुत फटकारा

पुलिस ने मामले की जांच कर केस लगभग सॉल्व कर दिया. लेकिन जिनके गहने गायब हुए, वो महिला 8 मई को राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) पहुंच गईं. जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए. कहा कि जांच के लिए तांत्रिक की मदद ली गई है.

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राजस्थान हाई कोर्ट ने दूसरे अधिकारी को जांच सौंपने का आदेश दिया है. (फोटो-इंडिया टुडे)

राजस्थान के नागौर जिले में श्री बालाजी थाने से जुड़े एक मामले ने पुलिस के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक महिला ने 7 मार्च 2026 को थाने में अपने और अपनी बहू के गहने चोरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने मामले की जांच भी की. लेकिन महिला ने 8 मई को राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) में इस जांच प्रक्रिया के खिलाफ याचिका दायर कर दी. याचिका में आरोप लगाया गया कि जांच के लिए तांत्रिक की मदद ली गई है. इसी पर कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई है और फिर से जांच करने के आदेश दिए हैं. 

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दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच श्रीबालाजी थाना के हेड कॉन्स्टेबल रतिराम को सौंपी गई थी. याचिकाकर्ता खेमी देवी ने जांच अधिकारियों को कुछ संदिग्धों के नाम दिए थे, लेकिन पुलिस उन आरोपियों को ट्रेस नहीं कर पाई. अब कोर्ट ने 15 दिन के अंदर जांच अधिकारी बदलने का आदेश दिया है. कोर्ट ने ये भी कहा कि नया अधिकारी किसी दूसरे पुलिस थाने से नियुक्त होना चाहिए ताकि स्वतंत्र जांच हो पाए.  

तांत्रिक ने किसे बताया चोर?

7 मार्च की रात को खेमी देवी और उनकी बहू के गहने घर से चोरी हो गए थे. इसमें डेढ़ तोला सोना, 300 तोला चांदी और 24 हज़ार कैश यानी कुल मिलाकर 12 लाख रुपयों से ज्यादा की चोरी हुई. जिसके बाद खेमी देवी ने श्रीबालाजी थाने में FIR दर्ज कराई. शिकायत मिलने पर पुलिस ने एक्शन भी लिया. फिर तांत्रिक वाला एंगल जुड़ गया. 

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रिपोर्ट के मुताबिक, खेमी देवी के वकील मनोहर सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी रतिराम उनकी बहू के पिता और कुछ गांव वालों को अलवर जिले के एक तांत्रिक के पास ले गए. तांत्रिक ने कथित तौर पर बहू के पिता को आरोपी बता दिया. जिसके बाद पुलिस ने भी उन्हें ही चोर मान लिया और उन्हें आरोपी ठहराने की दिशा में काम करने लगे. 

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फिर कोर्ट में क्या-क्या हुआ? 

कोर्ट में राज्य सरकार की तरफ से लोक अभियोजक (Public Prosecutor) विक्रम सिंह ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की. ये रिपोर्ट उन्हें नागौर के एसपी ने भेजी थी. इस रिपोर्ट में बताया गया कि जांच अधिकारी ने संदिग्धों से पूछताछ की थी और कई जगहों पर भी गए थे. हालांकि स्टेटस रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र है कि अधिकारी जांच के दौरान अलवर पहुंचे हुए थे. 

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इस मामले की सुनवाई जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की सिंगल बेंच कर रही थी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और सरकारी स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद पाया कि जांच अधिकारी के अलवर में उस तांत्रिक के स्थान पर जाने की पूरी संभावना है. जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने कहा कि किसी भी सूरत में मामले की जांच को किसी तांत्रिक के इशारे पर आधारित नहीं किया जा सकता है. खेमी देवी के वकील ने भी दलील पेश की कि कानून में कहीं भी तांत्रिक के आधार पर जांच करने का प्रावधान नहीं है. जांच केवल फैक्ट्स के आधार पर होनी चाहिए. 

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