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'मेरे 17 साल बर्बाद हो गए... ', मालेगांव केस में जज का फैसला सुन रो पड़ीं प्रज्ञा ठाकुर

Pragya Thakur News: कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया है. उनका कहना है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर अपराध साबित करने में कामयाब नहीं रहा. फैसले के बाद प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित के बयान भी आए हैं.

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प्रज्ञा ठाकुर को बरी कर दिया गया है. (फाइल फोटो: PTI)
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विद्या

मालेगांव ब्लास्ट केस (Malegaon Blast Case) में पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया गया है. एनआईए की स्पेशल अदालत ने 17 साल बाद इस मामले में अपना फैसला सुनाया है. फैसले के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर कोर्ट में भावुक हो गईं और जज लाहोटी के सामने उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. इसके बाद प्रज्ञा ठाकुर (Pragya Thakur) ने कहा कि उन्हें इस केस के कारण सालों तक अपमान सहना पड़ा.

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31 जुलाई को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया है. उनका कहना है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर अपराध साबित करने में कामयाब नहीं रहा. कोर्ट से बाहर निकलते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने कहा,

मैंने सालों तक अपमान सहा, कई बार संघर्ष किया. मुझे तब कलंकित किया गया, जब मैं दोषी नहीं थी. आज, भगवा की जीत हुई है, हिंदुत्व की जीत हुई है. 'भगवा आतंकवाद' का झूठा आरोप अब झूठा साबित हो गया है. 

मेरे जीवन के 17 साल बर्बाद हो गए. ईश्वर उन्हें दंड देगा जिन्होंने भगवा को बदनाम करने की कोशिश की.

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लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने क्या कहा?

पूर्व भाजपा सांसद के अलावा बरी होने वालों में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी शामिल हैं. लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने कोर्ट के फैसले पर कहा,

मैं इस देश से निःस्वार्थ प्रेम करने वाला एक सैनिक हूं. मैं मानसिक रूप से बीमार लोगों का शिकार बना. देश सर्वोपरि है और इसकी नींव मजबूत होनी चाहिए. कुछ लोगों ने हमारी ताकत का गलत इस्तेमाल किया, और उसकी सजा हमें भुगतनी पड़ी.

मालेगांव केस को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने अपने फैसले में पाया कि ये साबित नहीं हो पाया कि जिस मोटरसाइकिल पर बम रखने की बात कही जा रही थी वो प्रज्ञा ठाकुर की थी. इतना ही नहीं, सबूतों से ये भी सिद्ध नहीं हो पाया कि गाड़ी पर ही बम रखा गया था. गाड़ी के चेचिस नंबर से छेड़छाड़ की गई थी. कोर्ट ने ये निष्कर्ष निकाला है कि बम गाड़ी से बाहर भी कहीं रखा गया हो सकता है.

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अदालत ने ये भी कहा कि 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, क्योंकि कोई भी धर्म हिंसा की वकालत नहीं करता है.' कोर्ट ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.

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क्या हुआ था मालेगांव में?

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में भीक्कू चौक के पास एक जोरदार धमाका हुआ था. इसके महज कुछ मिनट बाद ही गुजरात के मोडासा में भी धमाका हुआ. मालेगांव धमाके में 7 लोगों की मौत हुई थी जबकि मोडासा में एक 15 साल के लड़के की जान चली गई थी. कुल 80 लोग घायल हुए थे. 24 अक्टूबर 2008 को पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर शामिल थीं. 2019 से 2024 तक प्रज्ञा ठाकुर भाजपा के टिकट पर भोपाल से सांसद भी रहीं.

वीडियो: मालेगांव और समझौता ट्रेन ब्लास्ट में कर्नल पुरोहित का नाम आने का सच ये है?

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