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पोप फ्रांसिस की इराक में हत्या होने ही वाली थी, किताब में बताया कैसे बची जान

यह किसी पोप की पहली इराक यात्रा थी और परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें हर किसी ने वहां नहीं जाने की हिदायत दी थी.

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तीन साल पहले इराक की यात्रा के दौरान पोप फ्रांसिस. (तस्वीर:Reuters)

ईसाइयों के सबसे बड़े धार्मिक-आध्यात्मिक नेता पोप फ्रांसिस करीब तीन साल पहले इराक यात्रा के दौरान मरने से बाल-बाल बचे थे. यह किसी पोप की पहली इराक यात्रा थी और परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें हर किसी ने वहां नहीं जाने की हिदायत दी थी. ये सब बातें खुद पोप फ्रांसिस ने बताई हैं.

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पोप फ्रांसिस की हत्या होने वाली थी?

दरअसल, दुनिया के सबसे छोटे देश वैटिकन सिटी के राष्ट्राध्यक्ष पोप फ्रांसिस की आत्मकथा 14 जनवरी को रिलीज होनी वाली है. इसका नाम रखा गया है, ‘Hope'. इस आत्मकथा के कुछ अंश इटली के अखबार ‘कोरिएरे डेला सेरा’ में 17 दिसंबर को छपे हैं. इनके मुताबिक, पोप ने बताया कि तीन साल पहले, मार्च 2021 में इराक की अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दौरान वे आत्मघाती हमलावरों के निशाने पर थे. यह उनके 11 साल के कार्यकाल में सबसे जोखिम भरी विदेशी यात्राओं में से एक साबित हुई.

अखबार के मुताबिक इराक की राजधानी बगदाद पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें सूचित किया था कि कम से कम दो आत्मघाती हमलावर उनके एक कार्यक्रम को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे. किताब में पोप ने लिखा है कि उनकी यात्रा के दौरान विस्फोटकों से लदी एक महिला खुद को उड़ाने के लिए इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल पहुंचने वाली थी. इस दौरान एक वैन भी इसी मंशा से रवाना होने वाली थी.

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सही समय पर मिली खुफिया टिप से बची जान

जब पोप फ्रांसिस बगदाद पहुंचे, तो ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने इराकी अधिकारियों को इस संबंध में सूचना दी थी. इराकी अधिकारियों ने इस जानकारी को वैटिकन सैन्य पुलिस तक पहुंचाया. अमेरिकी मीडिया वेबसाइट Politico में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पोप ने जब अपने सुरक्षाकर्मियों से आत्मघाती हमलावरों के बारे में पूछा तो मालूम पड़ा कि इराकी अधिकारियों ने उन्हें मार गिराया.

17 दिसंबर यानी आज 88 साल के हो गए पोप फ्रांसिस की मोसुल यात्रा काफी महत्वपूर्ण थी. उन्होंने 5 मार्च, 2021 से 8 मार्च, 2021 तक तीन दिनों की यात्रा की थी. इस दौरान दुनिया के ज्यादातर हिस्से कोविड-19 महामारी से प्रभावित थे. मोसुल साल 2014 से 2017 तक इस्लामिक स्टेट (IS) के कब्जे में था. बीबीसी की उस वक्त की रिपोर्ट के मुताबिक, पोप फ्रांसिस ने अपनी यात्रा के तीसरे दिन उत्तरी इराक के उन इलाकों का दौरा किया, जिन पर कभी इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकवादियों का कब्जा था. इस दौरान पोप ने खंडहर हो चुके चर्च में प्रार्थना भी की थी. उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान शांति की अपील की थी.

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