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जेयर एयरपोर्ट नहीं बनने देना चाहता था पायलट तो किसान परिवार को कर लिया किडनैप, 5 धरे गए

Noida International Airport at Jewar: पुलिस के मुताबिक़, आरोपियों का इरादा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को गलत तरीक़े से फंसाना था. वो एयरपोर्ट के भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास प्रक्रिया में रुकावट डालना चाह रहे थे. वो ग़लत तरीक के पैसा ऐंठना भी चाह रहे थे.

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पुलिस ने एक पायलट समेट पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है. (प्रतीकात्मक फ़ोटो- PTI)

नोएडा पुलिस ने एक पायलट समेत पांच लोगों को इस आरोप में गिरफ़्तार किया है कि उन्होंने एक किसान परिवार के तीन सदस्यों को किडनैप कर लिया. पुलिस ने तीनों को छुड़ा लिया है. आरोपियों ने घटना को इसलिए अंजाम दिया क्योंकि वो कथित तौर पर जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) प्रोजेक्ट में रोड़ा डालना चाह रहे थे.

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किसान का नाम है हंसराज. उनके साथ-साथ उनकी पत्नी कमलेश देवी और उनके बेटे सौरभ को किडनैप किया गया था. हंसराज के एक और बेटे सोनू ने इसे लेकर कोर्ट में शिकायत की थी. तब जाकर पूरे मामले का खुलासा हुआ.

पुलिस ने आरोपियों की भी पहचान कर ली है. इनमें से दो की पहचान नोएडा के सेक्टर 135 निवासी कैप्टन पुत्तन सिंह और उनकी पत्नी सरोजबाला के रूप में हुई. दो आरोपी जेवर के दयानतपुर गांव के निवासी पवन चौधरी और प्रमोद हैं. जबकि दिल्ली के मैदान गढ़ी निवासी रमादेवी भी आरोपियों में शामिल है.

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पुलिस के मुताबिक़, आरोपियों का इरादा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को झूठे तरीक़े से फंसाना था. वो एयरपोर्ट के भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास प्रक्रिया में रुकावट डालना चाह रहे थे. साथ ही वो ग़लत तरीक के पैसा भी ऐंठना चाह रहे थे.

मामला क्या है?

ग्रेटर नोएडा के DCP साद मिया खान ने मीडिया को घटना की जानकारी दी. बताया कि हंसराज का परिवार उन छह गांवों के निवासियों में शामिल है. जिन्हें एयरपोर्ट के विकास के पहले चरण के दौरान पुनर्वासित (Rehabilitate) करने का फ़ैसला लिया गया. लेकिन उन्होंने पुनर्वास और पुनर्स्थापन (R&R) वाली जगह पर जाने से मना कर दिया.

बीते तीन सालों से हंसराज का परिवार रोही गांव में अपने घर पर ही रह था. ये गांव एयरपोर्ट के एरिया में ही आता है. फिर 29 मई, 2025 की तारीख़ आई. जब हंसराज के परिवार को जेवर उप-ज़िला मजिस्ट्रेट ने ट्रांसफ़र करने का फ़ैसला किया. जिसके बाद उन्हें R&R साइट पर भेज दिया गया.

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29 मई को ही सौरभ ने अपने माता-पिता को जेवर के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया था. उन्हें 4 जून को छुट्टी तो दे दी गई. लेकिन वो घर नहीं पहुंचे. ऐसे में हंसराज के एक और बेटे सोनू को उनकी चिंता हुई. उसे लगा कि उसके माता-पिता और भाई सौरभ को अवैध रूप से हिरासत में ले लिया गया है.

इसी बीच, सोनू ने 2 जून को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) दायर की. (ये याचिका तब लगाई जाती है, जब किसी को अवैध हिरासत से छुड़ाना होता है.)

9 जून को कोर्ट ने याचिका को स्वीकार किया. फिर पुलिस को तीनों (सोनू के माता-पिता और भाई) को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की गई. ऐसे में शुरू हुआ हंसराज के परिवार को खोजने का सिलसिला.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, पुलिस ने बताया कि तलाशी के लिए सात टीमें गठित की गईं. ख़ुफ़िया जानकारी जुटाई गई. जिसके आधार पर पुलिस ने 27 जून को दयानतपुर गांव के एक फार्महाउस पर छापा मारा और हंसराज, कमलेश और सौरभ को छुड़ा लिया.

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पुलिस को शक है कि 29 मई से 2 जून के बीच आरोपियों ने सौरभ और उसके माता-पिता से संपर्क किया था. फिर बेहतर इलाज के लिए उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाने की पेशकश की थी. इसके बाद से ही वो लापता हो गए थे.

पुलिस ने बताया कि उन्होंने जेवर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140(3) (हत्या के लिए अपहरण या अपहरण) के तहत एफआईआर दर्ज की है. आगे की जांच जारी है.

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