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NEET PG में माइनस 40 नंबर लाने वालों को भी मिलेगा एडमिशन!

NEET PG: आरक्षित वर्ग के छात्रों को अब न्यूनतम अंक लाने की शर्त नहीं है. माइनस 40 स्कोर वाले छात्र भी एडमिशन ले सकते हैं.

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NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को काफी कम कर दिया गया है. (सांकेतिक फोटो: आजतक)

केंद्र सरकार ने NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को काफी कम कर दिया है. वजह है मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी PG मेडिकल सीटों का भरना. सरकार ने आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए कट-ऑफ को जीरो पर्सेंटाइल तक करने का फैसला लिया है, जिससे निगेटिव नबंरों वाले छात्रों को भी एडमिशन मिल सकेगा.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) ने 13 जनवरी को एक नोटिफिकेशन जारी किया. इसमें पीजी (MD/MS) की खाली सीटों पर एडमिशन के लिए सभी कैटेगरी के छात्रों की पात्रता आसान कर दी गई है. 

नई कट-ऑफ अपडेट में, सामान्य और EWS वर्ग के लिए क्वालिफाइंग 7 पर्सेंटाइल तक कर दिया गया. सामान्य दिव्यांग वर्ग (PwD) के लिए 5 पर्सेंटाइल कर दिया गया और SC/ST/OBC कैटेगरी के लिए 0 पर्सेंटाइल तक कर दिया गया.

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NEET PG
केंद्र सरकार ने NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को काफी कम कर दिया गया है. (फोटो: आजतक)

इसका मतलब यह है कि आरक्षित वर्ग के छात्रों को अब न्यूनतम अंक लाने की शर्त नहीं है. कुछ मामलों में बहुत कम, यहां तक कि माइनस (-40 तक) स्कोर वाले छात्र भी एडमिशन ले सकते हैं. 

पहले पीजी एडमिशन के लिए न्यूनतम कट-ऑफ सामान्य वर्ग के लिए 50 पर्सेंटाइल, सामान्य दिव्यांग वर्ग के लिए 45 पर्सेंटाइल और आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के लिए 40 पर्सेंटाइल था.

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सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दूसरे काउंसलिंग राउंड के बाद भी देश भर में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की 18,000 से ज्यादा पीजी सीटें खाली रह गई हैं. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि NEET-PG और काउंसलिंग का मकसद यह है कि सभी मेडिकल सीटों का पूरा उपयोग हो और देश में डॉक्टरों की कमी को कम किया जा सके. 

अधिकारियों का कहना है कि इतनी सीटें खाली छोड़ने से संसाधनों की बर्बादी होती है. बताते चलें कि भारत में मेडिकल कॉलेजों में MD/MS की कुल सीटें लगभग 50,000 हैं.

वीडियो: नीट पीजी 2025 की परीक्षा में कहां गड़बड़ हुई? छात्रों ने क्या आरोप लगाया?

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