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90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले देश में बकरीद पर कुर्बानी पर पाबंदी क्यों लगा दी गई?

मोरक्को में इस साल बकरीद पर भेड़ की कुर्बानी नहीं दी गई. किंग मोहम्मद VI ने पूरे देश की ओर से भेड़ की कुर्बानी दी. सूखे और आर्थिक संकट के कारण नागरिकों की ओर से कुर्बानी पर रोक लगाई गई थी.

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मोरक्को में भेड़ों की कुर्बानी पर रोक लगा दी गई (India Today)

उत्तर अफ्रीका में एक देश है- मोरक्को. यहां की 99 फीसदी आबादी मुस्लिम है लेकिन, इस साल बकरीद पर यहां भेड़ों की कुर्बानी नहीं दी गई. कारण था, यहां के राजा का आदेश, जिसने भेड़ों की कुर्बानी पर इस साल रोक लगा दी थी. मोरक्को के किंग मोहम्मद VI ने अपने शाही एलान में कहा था कि मोरक्को के नागरिकों की ओर से भी वही भेड़ों की बलि देंगे. इसके अलावा देश में कोई कुर्बानी नहीं दी जाएगी. राजा ने यह आदेश मोरक्को में बीते कई सालों से पड़ रहे सूखे से उपजे आर्थिक संकट को देखते हुए दिया है.

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मोरक्को वर्ल्ड न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार 7 जून को ईद की नमाज के तुरंत बाद किंग मोहम्मद VI ने दो भेड़ों कुर्बानी दी. इनमें एक कुर्बानी उनके खुद के लिए थी. वहीं दूसरे भेड़ की कुर्बानी सारे देश की ओर से थी. कुर्बानी को नेशनल टेलीविजन पर लाइव टेलीकास्ट भी किया गया. इसमें सम्राट मोरक्को की पारंपरिक पोशाक में इस्लामी परंपरा के अनुसार अनुष्ठान करते हुए दिखाई दिए.

क्यों रोकी है कुर्बानी

दरअसल, मोरक्को बीते 6 साल से सूखे से जूझ रहा है. इसकी वजह से देश की पशुधन आबादी पर गंभीर रूप से असर पड़ा है. रिपोर्ट बताती है कि 2016 से भेड़ों की संख्या में लगभग 38 प्रतिशत की गिरावट आई है. आपूर्ति कम होने के कारण जानवरों की कीमतें आसमान छू रही हैं. पिछले साल एक भेड़ की कीमत 600 डॉलर यानी लगभग 51 हजार 426 रुपये थी. यह मोरक्को के मासिक न्यूनतम आय 324 डॉलर यानी 27,833 रुपये से भी कहीं ज़्यादा थी. ऐसे में मोरक्को के कई परिवार इस इस्लामी परंपरा में हिस्सा लेने का रिस्क नहीं ले सकते थे.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मोरक्को के नागरिकता केंद्र के सर्वेक्षण में पाया गया कि 55 प्रतिशत परिवारों को कुर्बानी के लिए जानवर खरीदने में काफी संघर्ष करना पड़ा. इसके जवाब में मोरक्को सरकार ने 2025 के अपने बजट में मवेशियों और भेड़ों पर लगने वाले आयात और अन्य टैक्स को सस्पेंड कर दिया. हालांकि, कीमतें फिर भी काबू में नहीं आईं. ऐसे में राजा को कुर्बानी पर रोक लगाने का फैसला लेना पड़ा.

पहली बार नहीं

ऐसा पहली बार नहीं है जब मोरक्को के राजा ने ईद-उल अदहा के मौके पर भेड़ों की कुर्बानी पर रोक लगाई हो. उनके पिता राजा हसन द्वितीय ने भी अपने शासनकाल के दौरान 3 मौकों पर ईद की कुर्बानी को रोक दिया था. इनमें युद्ध और सूखे की वजह से दो बार कुर्बानी रोकी गई थी. वहीं एक बार जब IMF ने मोरक्को पर कठोर प्रतिबंधों लगाए थे और खाद्य सब्सिडी हटा दी गई थी, तब राजा हसन ने कुर्बानी पर रोक लगाई थी.  

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