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गणतंत्र दिवस पर स्कूल में झंडा फहराया, फिर बच्चों को कागज पर खाना परोस दिया गया

MP Maihar School Viral Video: सरकारी नियमों में साफ है कि बच्चों को स्कूल में खाना या मिड डे मील, बर्तनों में ही दिया जाना चाहिए. इसके लिए बकायदा अलग से फंड जारी किया जाता है.

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बच्चों को जमीन पर कागज के टुकड़ों पर परोसा गया खाना. (Photo: ITG)

जिस दिन देश संविधान के लागू होने का जश्न मना रहा था, उसी दिन मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल में संविधान के मूल्यों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. संविधान हर नागरिक को गरिमा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है. लेकिन गणतंत्र दिवस के दिन एक स्कूल में बच्चों को गरिमा के साथ खाना भी नहीं खाने दिया गया. उन्हें स्कूल में जमीन पर बिठाकर रद्दी कागज के टुकड़ों पर खाना परोसा गया. जब इस घटना का वीडियो वायरल हुआ तो जिम्मेदारों की नींद खुली. कह रहे हैं कार्रवाई करेंगे. लेकिन सवाल है कि यह नौबत ही क्यों आई.

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आजतक से जुड़े वेंकटेंश द्विवेदी की रिपोर्ट के अनुसार मामला मध्य प्रदेश के मैहर जिले का है. यहां के शासकीय हाई स्कूल भटिंगवा में 26 जनवरी को अन्य स्कूलों की तरह गणतंत्र दिवस मनाया गया. इसके बाद छात्र-छात्राओं को खाना खिलाया गया. इसके लिए उन्हें जमीन पर पांत में बिठाया गया. लेकिन उन्हें खाना थाली, बर्तन की तो बात ही नहीं है, दोना-पत्तल तक नहीं था. बच्चों को कागज के टुकड़ों पर खाना परोसा गया.

स्वास्थ्य से भी खिलवाड़

घटना का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें साफ दिख रहा है कि छात्र-छात्राएं, खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठे हैं. उनके सामने कागज पर खाना रखा है. मामला केवल अमानवीय व्यवहार का नहीं, बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का भी है. मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि किताबों या अखबारों में जो स्याही यानी इंक इस्तेमाल की जाती है, उसमें लेड (सीसा) और अन्य जहरीले केमिकल होते हैं. ऐसे में इनके कागजों पर खाना रखने से वह केमिकल खाने में मिलेंगे और सीधे बच्चों के शरीर में जाएंगे.

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भ्रष्टाचार की आशंका

मामला यहां सिर्फ लापरवाही का नहीं है. सरकारी नियमों में साफ है कि बच्चों को स्कूल में खाना या मिड डे मील, बर्तनों में ही दिया जाना चाहिए. इसके लिए बकायदा अलग से फंड जारी किया जाता है और इसके रख-रखाव का भी पैसा दिया जाता है. लेकिन अगर स्कूल प्रशासन के पास बच्चों को खाना परोसने के लिए बर्तन नहीं थे, तो इसके लिए दिए गए पैसे कहां गए?

पूरे मामले पर गांव के लोगों का भी कहना है कि यह बच्चों के बुनियादी अधिकारों का हनन है. अब जब वीडियो वायरल हुआ और लोगों ने इस पर सवाल उठाए, तो अधिकारियों का कहना है कि जांच के आदेश दिए गए हैं. जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) विष्णु त्रिपाठी ने आजतक को बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर ब्लॉक संसाधन समन्वयक (बीआरसी) को रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है.

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प्रशासन का कहना है है कि इस घोर लापरवाही के लिए जो भी शिक्षक या कर्मचारी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. 

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